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खतरनाक प्रदूषण दिल्लीवासियों के लिए ‘मौत की सजा’ से कम नहीं: हाई कोर्ट

हाई कोर्चट ने कहा कि इस गंभीर हालात से छह करोड़ से ज्यादा जीवन वर्ष बर्बाद हो रहे हैं या यूं कहें तो इससे दस लाख मौतें होती हैं।

Author November 10, 2016 9:04 PM
देश में हर साल लगभग 13 लाख मौतों का कारण बनता है घर के अंदर का वायु प्रदूषण। प्रतीकात्मक चित्र

दिल्ली हाई कोर्ट ने पंजाब में सरकार की निष्क्रियता और पराली जलाने के चलन को ‘नरसंहार’ के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए आज कहा कि भयानक प्रदूषण स्तर दिल्लीवासियों के लिए वस्तुत: ‘मौत की सजा’ है जिसकी वजह से उनके जीवन के तीन साल कम किये जा रहे हैं। न्यायमूर्ति बदर दुर्रेज अहमद और न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार की पीठ ने कहा, ‘‘यह हमें मार रहा है।’’उन्होंने कहा कि इस गंभीर हालात से छह करोड़ से ज्यादा जीवन वर्ष बर्बाद हो रहे हैं या यूं कहें तो इससे दस लाख मौतें होती हैं।

पीठ ने यह भी कहा कि क्या वोट देने वालों के जीवन से ज्यादा महत्वपूर्ण वोट होते हैं। उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘राजधानी वालों को पूरी तरह मौत की सजा दी जा रही है और वो भी बिना किसी अपराध के। राजधानी में लोगों को मारा जा रहा है। आप दिल्ली को नहीं मार सकते।’’ वायु प्रदूषण के प्रभावों पर प्रकाशित विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एक अध्ययन का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा कि भारत के कई शहरों में, खासतौर पर दिल्ली में हवा मानक स्तर से ज्यादा है। दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में से 13 हमारे देश के हैं।

वीडियो देखिए: पंजाब के खेतों में अब भी जलाए जा रहे हैं फसल के अवशेष; धुआं बना विभिन्न राज्यों में प्रदूषण की वजह

पीठ ने यह भी कहा कि दिल्ली में सांस के रोगियों की संख्या और इससे मरने के मामले सर्वाधिक हैं। पीठ के मुताबिक सरकार वायु प्रदूषण के खतरे को कम करने के लिए बाध्य है लेकिन बार बार निर्देशों और सार्वजनिक राय के बावजूद जिम्मेदार सरकारों ने उस तरह से काम नहीं किया है, जिस तरह उन्हें करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली जैसे किसी शहर में वायु प्रदूषण आपके जीवन के अपेक्षित वर्षों से तीन वर्ष कम कर देता है। दिल्ली में दो करोड़ से ज्यादा की आबादी है। इसलिए छह करोड़ जीवन वर्ष बर्बाद हो रहे हैं और खत्म हो रहे हैं।’’

पीठ के मुताबिक, ‘‘सरकारी निष्क्रियता जीवन कम होने के लिए दोषी है। मामले की भयावहता को समझिए। कुछ आमूल-चूल किये जाने की जरूरत है। क्या वोट बैंक ज्यादा महत्वपूर्ण है या वोट देने वाला महिला या पुरुष।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पंजाब (पराली जलाना) हमें मार रहा है।’’अदालत ने कहा कि विभिन्न खबरों के मुताबिक दिल्ली को वायु गुणवत्ता के मामले में भारत में सबसे खराब शहर बताया गया है। अदालत के मुताबिक खराब गुणवत्ता वाली हवा न केवल लोगों को मारती है बल्कि सांस संबंधी बीमारियों को भी बढ़ाती है।

पिछले महीने वायु प्रदूषण के मामले में सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और हरियाणा राज्यों से पराली जलाने पर रोक लगाने को कहा था। फसलों के अवशेषों को जलाने की प्रथा बंद करने के राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेशों के बाद भी राष्ट्रीय राजधानी हर साल धुंध का प्रकोप झेलती है। अदालत ने कहा कि पंजाब के मुख्य सचिव को अवमानना नोटिस जारी करने से पहले हम उनसे एक हलफनामा चाहते हैं, जिसमें संकेत दिया गया हो कि हमारे निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया और उन्हें ऐसा करने से किसने रोका।’’

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