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20 फरवरी से ‘बात बिहार की’ कार्यक्रम शुरू करेंगे प्रशांत किशोर, बताया- सीएम नीतीश से क्यों गहराए मतभेद

कार्यक्रम के तहत बिहार की 8,800 पंचायतों में से ऐसे एक हजार लोगों को चुनाव जाएगा जो यह सोचते हों कि अगले 10 साल में बिहार अग्रणी 10 राज्यों में शामिल हो।

prashant kishorचुनावी रणनीतिकार और पूर्व जेडीयू उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर। (ANI)

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने मंगलवार (18 फरवरी, 2020) को कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उनके लिए पिता तुल्य है। उन्होंने कहा, ‘नीतीश जी ने मुझे बेटे की तरह रखा, उनका हर फैसला सिर माथे पर। मुझे पार्टी से निकाले जाने के उनके फैसले पर सवाल नहीं उठाउंगा।’ पीके ने कहा कि हम सशक्त नेतृत्व चाहते थे, पिछलग्गू नहीं। बस इसी बात को लेकर नीतीश कुमार से मेरा मतभेद था। उनसे मेरे मतभेद सिर्फ वैचारिक हैं।

इस बीच उन्होंने एक अहम घोषणा करते हुए कहा कि 20 फरवरी से एक नया कार्यक्रम ‘बात बिहार की’ शुरू होगा। इसके तहत बिहार की 8,800 पंचायतों में से ऐसे एक हजार लोगों को चुनाव जाएगा जो यह सोचते हों कि अगले 10 साल में बिहार अग्रणी 10 राज्यों में शामिल हो। हालांकि पीके ने साफ किया वो किसी गठबंधन या किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ने जा रहे है।

पीके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि गांधी और गोडसे एक साथ नहीं चल सकते हैं। उन्होंने भाजपा-जेडीयू गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि विकास के लिए गठबंधन हो ऐसा जरुरी नहीं है। भाजपा के साथ गठबंधन विकास नहीं दे रहा है। 2005 में बिहार में जो स्थिति थी मौजूदा समय में दूसरे राज्यों की तुलना में बिहार की वही स्थिति बनी हुई है।

दिल्ली में आप की चुनावी रणनीति का हिस्से रहे किशोर ने कहा, ‘बिहार में जीतने के लिए गठबंधन की जरुरत नहीं है और भाजपा के साथ गठबंधन विकास नहीं दे रहा। भाजपा के साथ सरकार बनाने पर उल्टे विकास की रफ्तार घटी है।’ उन्होंने कहा कि नीतीश जी अच्छी शिक्षा नहीं दे पाए। जेडीयू प्रमुख साइकिल बांटी, पोशाक बांटी मगर अच्छी शिक्षा नहीं दे पाए।

 

हालांकि प्रशांत किशोर ने बिहार में घर-घर बिजली पहुंचने पर प्रदेश की मुख्यमंत्री की तारीफ की। उन्होंने कहा कि पिछले दस सालों में बिहार में हर घर में बिजली पुहंची है। मगर बिजली खपत के मामले में बिहार देश का सबसे ज्यादा पिछड़ा राज्य बना हुआ है। मसलन बिजली तो पहुंची मगर लोगों के पास एक पंखा और एक बल्ब लगाने के अलावा खर्च वहन करने की क्षमता नहीं है।

उन्होंने कहा कि गरीबी के मामले में भी देश में सबसे ज्यादा गरीब लोग आज भी बिहार में ही हैं। बिहार में प्रतिव्यक्ति आए नहीं बढ़ी। 2005 में बिहार की प्रति व्यक्ति जीडीपी जिनती थी, आज भी वही स्थिति है।

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