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मक्का मस्जिद के आरोपी बरी: पूर्व अंडर सेक्रेटरी और ओवैसी का NIA पर हमला, स्वामी बोले- चिदंबरम पर करो केस

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि 'NIA ने मामले की सही पैरवी नहीं की। उन्होंने कहा कि 'जून 2014 के बाद मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस मामले में अधिकतर गवाह अपने बयान से पलट गए। NIA ने केस की पैरवी उम्मीद के मुताबिक नहीं की या फिर 'राजनीतिक मास्टर' द्वारा उन्हें ऐसा करने नहीं दिया गया।

बीजेपी सांसद सुब्रमण्यन स्वामी और AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी।

मक्का-मस्जिद ब्लास्ट केस में सभी आरोपियों को NIA की विशेष अदालत ने बरी कर दिया है। इस मामले के सभी आरोपियों को सबूत के अभाव में बरी किया गया है। केस में स्वामी असीमानंद समेत 5 लोग आरोपी थे। अदालत द्वारा इस केस के सभी आरोपियों को बरी किये जाने के फैसले के बाद अब इसपर सियासत शुरू हो गई है।

किसने क्या कहा ? ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि ‘NIA ने मामले की सही पैरवी नहीं की। उन्होंने कहा कि ‘जून 2014 के बाद मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस मामले में अधिकतर गवाह अपने बयान से पलट गए। NIA ने केस की पैरवी उम्मीद के मुताबिक नहीं की या फिर ‘राजनीतिक मास्टर’ द्वारा उन्हें ऐसा करने नहीं दिया गया। आपराधिक मामले में जबतक ऐसी पक्षपाती चीजें होती रहेंगी तबतक न्याय नहीं मिलेगा।ओवैसी ने NIA को बहरा और अंधा तोता तक बता डाला।

कांग्रेस ने भी जांच एजेंसी पर सवाल उठाया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सभी जांच एजेंसी केंद्र सरकार की कठपुतली बन गई है। इस मामले की जांच कोर्ट की निगरानी में हो। उन्होंने कहा कि NIA बीजेपी सरकार के अंदर काम करती है।

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इधर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने पूर्व गृह मंत्री पी चिंदबरम को निशाने पर लिया। सुब्रमण्यन स्वामी ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान ‘भगवा आतंकवाद’ शब्द गढ़ने को लेकर पूर्व गृह मंत्री चिदंबरम पर केस होना चाहिए। एक बात यह भी है कि अगर इस मामले के सभी आरोपी बरी हो गए हैं तो आखिर इस ब्लास्ट के पीछे था कौन? एनआईए को इस मामले में आखिर सफलता क्यों नहीं मिली?

क्या हुआ था 2007 में ?आपको बता दें कि 18 मई 2007 को मक्का-मस्जिद के पास एक बम ब्लास्ट हुआ था। इस धमाके में 9 लोग मारे गए थे जबकि करीब 58 लोग घायल हुए थे। इसी मामले में एनआईए ने जांच कर चार्जशीट फाइल की थी। अब एनआईए की विशेष अदालत ने अपने फैसले में सभी पांच आरोपी देवेंद्र गुप्ता, लोकेश शर्मा, स्वामी असीमानंद, भारत मोहनलाल और राजेंद्र चौधरी को बरी कर दिया है। इन सभी को मस्जिद विस्फोट मामले में गिरफ्तार भी किया गया था और उनपर ट्रायल चला था।

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