पीएमओ के हैंडल से ट्वीट हुआ राजनीतिक बयान, ट्विटर पर मचा घमासान- राजनीति के लिए पीएम के आधिकारिक हैंडल के दुरुपयोग का आरोप

सोशल मीडिया पर लोगों ने विरोध जताते हुए कहा कि पीएम मोदी के लिए यह बेहद शर्मनाक है। इस तरह के बयान निजी तौर पर ठीक है, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय के ट्विटर पर जारी करना अनुचित है।

गोरखपुर में सभा को संबोधित करते पीएम मोदी (फोटो- @BJP4India)

पीएम मोदी का एक ट्वीट उनके निजी हैंडल से ट्वीट किए जाने के बाद पीएमओ के ट्विटर हैंडल से भी जारी कर दिया गया। इस ट्वीट में जो बात कही गई है, वह राजनीतिक बयान है। ऐसे में इसके प्रधानमंत्री कार्यालय के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से जारी किए जाने पर लोगों ने सख्त ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि पीएमओ का ट्विटर हैंडल सरकारी है, व्यक्तिगत नहीं, लिहाजा इस पर इस तरह के ट्वीट उचित नहीं है।

दरअसल प्रधानमंत्री मोदी 7 दिसंबर को यूपी के गोरखपुर में एक सभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, “आज पूरा यूपी अच्छी तरह जानता है कि लाल टोपी वालों को लाल बत्ती से मतलब रहा है, आपकी दुख-तकलीफों से नहीं। लाल टोपी वालों को सत्ता चाहिए, घोटालों के लिए, अपनी तिजोरी भरने के लिए, अवैध कब्जों के लिए, माफियाओं को खुली छूट देने के लिए।”

यह बयान पीएम मोदी के निजी ट्विटर हैंडल के साथ ही पीएम कार्यालय के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी जारी हो गया। इस पर सोशल मीडिया में घमासान शुरू हो गया। दिनेश गुप्ता नाम के एक यूजर्स लिखते हैं कि “पीएमओ के हैंडल से ऐसी भाषा वाला ट्वीट शर्मनाक है, ऐसा लग रहा है कि यह आपकी पार्टी का ट्विटर हैंडल है।” ट्विटर यूजर्स नेहा ने कहा, “इसे ही डर कहते हैं जिस डर को दिखा के आप सत्ता में आये थे, वही डर आज प्रधानमंत्री कार्यालय को हो रहा है।”

यूजर वैभव माहेश्वरी लिखते हैं कि “पहली बात तो ये कि देश को ऐसे मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से तुरंत छुटकारा दिलवाया जाना चाहिए, जिनकी भाषा में गांव के एक बूथ कार्यकर्ता जितनी भी गरिमा ना पाई जाती हो।”

कई लोगों का कहना है कि इस तरह के ट्वीट को प्रधानमंत्री के निजी ट्विटर पर ट्वीट करने में कोई आश्चर्य नहीं है। यूपी चुनाव में समाजवादी पार्टी एक प्रतिद्वंद्वी पार्टी है। पीएम मोदी भाजपा नेता के रूप में प्रतिपक्ष के लिए राजनीतिक बयान दे सकते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इसे जारी किया जाना उसका दुरुपयोग है। उससे भी बड़ा आश्चर्य यह है कि इसे हटाया नहीं गया। ट्विटर पर विरोध कर रहे लोगों ने कहा कि इसे नहीं हटाने का साफ मतलब है कि यह जानबूझकर ट्वीट किया गया है, अंजाने में नहीं हुआ है।

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