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चुनाव हो या न पर नेताओं की पौबारह, जानें अप्रैल में कितने करोड़ के इलेक्टोरल बांड कैश हुए

एसबीआई ने 1 से 10 अप्रैल के बीच में 811 चुनावी बांड बेचे हैं। पार्टियों को अप्रैल में 648.48 करोड़ रुपये के चुनावी बांड प्राप्त हुए हैं।

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राजनीतिक पार्टियों को मिल रहा जमकर चंदा (प्रतीकात्मक फोटो- @pixabay)

देश में चुनाव हो या ना हो लेकिन राजनीतिक पार्टियों के चंदे में कोई कमी नहीं है। सिर्फ अप्रैल में ही करोड़ों के इलेक्टोरल बांड कैश हुए हैं। जब से चुनावी बांड योजना शुरू हुई है तब से 9,836 करोड़ रुपये के बांड को भुनाया जा चुका है।

भारतीय स्टेट बैंक के आंकड़ों के अनुसार, राजनीतिक दलों को गैर-चुनाव अवधि के दौरान भी डोनेशन से धन प्राप्त हो रहा है। अप्रैल में 648.48 करोड़ रुपये के चुनावी बांड प्राप्त हुए हैं। एसबीआई एकमात्र ऐसा बैंक है जो ऐसे चुनावी बांड जारी करता है। एक आरटीआई के जवाब में कहा गया है कि 640 करोड़ रुपये के बांड, प्रत्येक 1 करोड़ रुपये के अंकित मूल्य के थे और 7.90 करोड़ रुपये के बांड 10 लाख रुपये के अंकित मूल्य के थे।

कमांडर लोकेश के बत्रा (सेवानिवृत्त) द्वारा दायर आरटीआई से ये जानकारी सामने आई है। 1 से 10 अप्रैल के बीच एसबीआई ने कुल 811 बांड बेचे, जिनमें से 640 बांड प्रत्येक 1 करोड़ रुपये के मूल्य के थे। ये सभी बांड राजनीतिक दलों द्वारा भुनाए गए। एसबीआई के आंकड़ों से पता चलता है कि एसबीआई की हैदराबाद मुख्य शाखा में 420.98 करोड़ रुपये के बांड, नई दिल्ली की मुख्य शाखा में 106.50 करोड़ रुपये, चेन्नई की मुख्य शाखा में 100 करोड़ रुपये और राज्य की कोलकाता मुख्य शाखा में 18 करोड़ रुपये का बांड भुनाया गया है।

ईबी योजना के प्रावधानों के अनुसार, वो राजनीतिक दल जो जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (1951 का 43) की धारा 29ए के तहत पंजीकृत हैं और पिछले आम चुनाव या विधानसभा चुनावों में कम से कम एक प्रतिशत मत हासिल किए हैं। चुनावी बांड प्राप्त करने के पात्र हैं।

चुनावी बांड डोनरों द्वारा गुमनाम रूप से खरीदे जाते हैं और जारी होने की तारीख से 15 दिनों के लिए वैध होते हैं। इन्हें केवल एक पात्र पार्टी द्वारा बैंक के साथ बनाए गए अपने नामित खाते में जमा करके भुनाया जा सकता है। ये बांड एसबीआई द्वारा 1,000 रुपये, 10,000 रुपये, 1 लाख रुपये, 10 लाख रुपये और 1 करोड़ रुपये के मूल्यवर्ग में जारी किए जाते हैं।

बता दें कि इस चुनावी बांड को लेकर काफी विवाद भी रहा है। मामला अदालत में भी लंबित है। कई हस्तियों और एनजीओ ने इसकी पारदर्शिता पर सवाल भी उठाया है।

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