तेलंगाना में सत्ताधारी कांग्रेस और दो प्रमुख विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया। राज्य की वित्तीय स्थिति और कथित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर एक-दूसरे खुली बहस की चुनौती दी जा रही है।

आरोपों और प्रत्यारोपों से भरी तीखी राजनीतिक खींचतान का मौजूदा दौर हाल ही में तब शुरू हुआ जब के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) के नेतृत्व वाली बीआरएस ने कांग्रेस सरकार पर गुरुकुल स्कूलों की टेंडर प्रक्रिया में कुछ कंपनियों को कथित तौर पर पक्षपात करके सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। तेलंगाना सरकार अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के छात्रों के लिए गुरुकुल स्कूल चलाती है।

कांग्रेस ने बीआरएस के आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया। मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने बीआरएस पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि केसीआर के नेतृत्व वाली पिछली बीआरएस सरकार ने राज्य को वित्तीय संकट में छोड़ दिया था।

इसके बाद भाजपा ने कांग्रेस और बीआरएस दोनों पर निशाना साधा। भाजपा ने इन दोनों पर राज्य के विकास के लिए केंद्रीय निधि का उचित उपयोग न करने का आरोप लगाया।

तीखी बहस

2 जुलाई को उस समय विवाद खड़ा हो गया जब चार राज्य मंत्री पोन्नम प्रभाकर, अदलुरी लक्ष्मण, मोहम्मद अजहरुद्दीन और जुपल्ली कृष्णा राव बीआरएस नेतृत्व के साथ बहस करने के लिए हैदराबाद के गन पार्क स्थित तेलंगाना शहीद स्मारक पहुंचे।

वहीं दूसरी ओर, बीआरएस नेता टी हरीश राव और आरएस प्रवीण कुमार को हैदराबाद पुलिस ने उस समय रोक दिया जब वे कांग्रेस नेताओं के साथ बहस के लिए गन पार्क पहुंचने के लिए अपने पार्टी मुख्यालय तेलंगाना भवन से बाहर निकले। इसके बाद 3 जुलाई को भाजपा ने कहा कि वह सार्वजनिक मुद्दों पर होने वाली बहस में कांग्रेस और बीआरएस दोनों को हरा देगी।

कांग्रेस का प्रस्ताव

आबकारी मंत्री और कांग्रेस नेता जुपल्ली कृष्णा राव ने बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव (​​केटीआर) को चुनौती देते हुए कहा कि वह अपने पिता और बीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव से साबित करने के लिए कहें कि तेलंगाना को पिछली बीआरएस सरकार से 8.2 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ विरासत में नहीं मिला था।

जुपल्ली कृष्णा राव ने कहा ने कहा कि बीआरएस 2014 से (जब तेलंगाना आंध्र प्रदेश से अलग होकर एक स्वतंत्र राज्य बना) 2023 तक सत्ता में थी। जुपल्ली ने कहा कि अगर उनका यह दावा गलत साबित होता है तो वे इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने कहा कि मैं केटीआर को चुनौती देता हूं कि वे केसीआर से इस वित्तीय रिकॉर्ड को गलत साबित करने के लिए कहें। अगर वे यह साबित कर देते हैं कि मेरी गणना गलत है, तो मैं इस्तीफा दे दूंगा।

जुपल्ली ने कहा कि दिसंबर 2023 में केसीआर सरकार का कार्यकाल समाप्त होने पर तेलंगाना पर कुल वित्तीय बोझ 8,21,651 करोड़ रुपये (बकाया ऋण और अदा न की गई देनदारियों सहित) था। उन्होंने बताया कि प्रत्यक्ष सरकारी ऋण 2014 में 84,268 करोड़ रुपये से बढ़कर दिसंबर 2023 तक 5,16,881 करोड़ रुपये हो गया, जिसका मुख्य कारण एफआरबीएम उधार और विशेष प्रयोजन वाहनों (एसपीवी) के माध्यम से लिए गए ऋण थे। अदा न की गई देनदारियों में 40,154 करोड़ रुपये के लंबित बिल और वितरण कंपनियों, बिजली आपूर्तिकर्ताओं, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति उप-योजना प्रतिबद्धताओं और अन्य बकाया राशि के रूप में 1,09,740 करोड़ रुपये शामिल थे। तेलंगाना के राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने भी इन आंकड़ों का समर्थन किया।

जब तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के अध्यक्ष और एमएलसी महेश कुमार गौड़ से पूछा गया कि कांग्रेस विपक्ष के साथ इन मुद्दों पर बहस क्यों चाहती है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि बीआरएस ने राज्य को लूटा और करोड़ों के कर्ज में डुबो दिया। जनता को इस बारे में जागरूक होने की जरूरत है।

बीआरएस ने क्या कहा?

कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए केटीआर और हरीश राव सहित बीआरएस नेताओं ने कहा है कि 2023 में जब केसीआर सरकार ने सत्ता छोड़ी थी, तब राज्य की वित्तीय स्थिति खराब नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि सीएजी (कैग) की एक रिपोर्ट में राज्य के तत्कालीन बकाया ऋण को 2.8 लाख करोड़ रुपये बताया गया था।

केटीआर ने गुरुवार को मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को चुनौती दी कि यदि सरकार में तथ्यों का सामना करने का साहस है तो वे इस मुद्दे पर बहस के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री मल्लु भट्टी विक्रमार्क विरोधाभासी और मनगढ़ंत वित्तीय आंकड़ों से लोगों को गुमराह कर रहे हैं।

भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने इस साल गुरुकुल शैक्षणिक संस्थानों के लिए किराना सामान, यूनिफॉर्म, जूते, नोटबुक और अन्य जरूरी सामान की खरीद के टेंडरों में अनियमितताओं का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि इन खरीद प्रक्रियाओं में बड़ा घोटाला हुआ है।

बीआरएस ने यह भी मांग की है कि राज्य के किसानों, महिलाओं और दलितों से किए गए कांग्रेस के अधूरे और विफल वादों पर सार्वजनिक बहस कराई जाए।

जब बीआरएस नेता प्रवीण कुमार से पूछा गया कि कांग्रेस के साथ सार्वजनिक बहस क्यों जरूरी है तो उन्होंने कहा कि लोगों को पता होना चाहिए कि कांग्रेस सरकार किस तरह जनता को गुमराह कर रही है और राज्य को लूट रही है।

भाजपा का रुख

तेलंगाना में सत्तारूढ़ कांग्रेस और बीआरएस के बीच चल रहे विवाद में भाजपा की भी एंट्री हो गई। भाजपा ने शुक्रवार को दावा किया कि वह सार्वजनिक बहस में कांग्रेस और बीआरएस दोनों को हरा सकती है।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने कहा कि भाजपा मंच तैयार करने और तेलंगाना की जनता के सामने कांग्रेस और बीआरएस दोनों की सच्चाई उजागर करने के लिए तैयार है।

उन्होंने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने गुरुवार को कांग्रेस और बीआरएस को तेलंगाना के बढ़ते कर्ज और गुरुकुल संस्थानों की टेंडर प्रक्रिया पर खुली बहस की चुनौती दी थी।

बंडी संजय कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भाजपा जनता के सामने कांग्रेस और बीआरएस दोनों की विफलताओं और अनियमितताओं को उजागर करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि राज्य भाजपा जल्द ही इस सार्वजनिक बहस की तारीख, समय और स्थान की घोषणा करेगी और दोनों दलों के नेताओं को इसमें शामिल होने की चुनौती देगी।

उन्होंने यह भी कहा कि बहस में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा तेलंगाना को दिए गए फंड, राज्य में लागू की गई केंद्रीय कल्याणकारी योजनाओं और इन फंडों के उपयोग पर भी चर्चा होनी चाहिए। बंडी संजय कुमार ने दावा किया कि तेलंगाना की जनता ने कांग्रेस और बीआरएस दोनों को सत्ता से बाहर करने का मन बना लिया है और अब राज्य में डबल इंजन सरकार चाहती है।

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