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बाबा रामपाल गिरफ्तार, कोर्ट में पेशी आज

‘स्वयंभू संत’ रामपाल को बुधवार रात उसके आश्रम से गिरफ्तार कर लिया गया और इस तरह दो हफ्ते से पुलिस और रामपाल समर्थकों के बीच चल रहा तनावपूर्ण गतिरोध खत्म हो गया। इससे पहले आश्रम से करीब 15000 समर्थकों को बाहर निकाला गया। रामपाल (63) को गुरुवार को हिसार की एक अदालत में पेश किया […]

Author November 20, 2014 10:15 AM
‘स्वयंभू संत’ रामपाल को उसके आश्रम से गिरफ्तार कर लिया गया (एक्सप्रेस फोटो: जयपाल सिंह)

‘स्वयंभू संत’ रामपाल को बुधवार रात उसके आश्रम से गिरफ्तार कर लिया गया और इस तरह दो हफ्ते से पुलिस और रामपाल समर्थकों के बीच चल रहा तनावपूर्ण गतिरोध खत्म हो गया। इससे पहले आश्रम से करीब 15000 समर्थकों को बाहर निकाला गया। रामपाल (63) को गुरुवार को हिसार की एक अदालत में पेश किया जाएगा।

पुलिस महानिदेशक एसएन वशिष्ठ ने कहा कि विवादास्पद ‘स्वयंभू संत’ को एक अभियान के बाद हिरासत में ले लिया गया है। अभियान ‘बहुत मुश्किल’ था क्योंकि सुरक्षा बलों को रामपाल के कमांडो के विरोध का सामना करना पड़ा। पानीपत के पुलिस अधीक्षक सतीश बालन ने कहा कि रामपाल ने समर्पण नहीं किया बल्कि उसे सतलोक आश्रम से गिरफ्तार किया गया। उधर आश्रम में चार महिलाओं की रहस्यमय हालात में मृत्यु हो गई और दो अन्य लोगों की अस्पताल में मौत हो गई।


बालन ने कहा-रामपाल को उसके सतलोक आश्रम से गिरफ्तार कर लिया गया है। उसे मेडिकल जांच के लिए ले जाया जा रहा है जिसके बाद गुरुवार सुबह उसे हिसार में एक अदालत में पेश किया जाएगा। आश्रम में बड़ी संख्या में फंसे लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए पूरे अभियान को बड़ी सावधानी से संचालित किया गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हमें खुशी है कि पूरा अभियान शांतिपूर्ण रहा’।

रामपाल की गिरफ्तारी रात को महिलाओं, बच्चों और बूढ़ों सहित 15 हजार से ज्यादा अनुयाइयों को बाहर निकालने के बाद हुई। इन लोगों को 12 एकड़ के भूभाग में फैले आश्रम के अंदर जबरन रखा गया था ताकि वे रामपाल के लिए मानव कवच का काम कर सकें। सुरक्षाकर्मियों ने मंगलवार शाम अभियान को रोक दिया था ताकि अनुयायी बाहर निकल सकें। रामपाल के कुछ अनुयायी अब भी आश्रम के अंदर बताए जाते हैं जिसे स्वयंभू ‘संत’ ने किले में तब्दील कर रखा था। उनकी गिरफ्तारी के बाद बरवाला और आसपास के इलाकों में स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए।

पुलिस ने कहा कि रामपाल को करीब नौ बजकर 20 मिनट पर पकड़ा गया और उसे एक एंबुलेंस से ले जाया गया। पुलिस के मुताबिक, बड़ी संख्या में मौजूद मीडियाकर्मियों से कहा गया कि आश्रम में एंबुलेंस जाने के लिए वे रास्ता छोड़ दें। बुधवार का दिन नाटकीय घटनाक्रमों से भरा रहा और रामपाल आत्मसमर्पण नहीं करने के अपने रुख पर अड़ा रहा जबकि पुलिस ने उससे आत्मसमर्पण के लिए बार-बार अपील की। साथ ही अंदर फंसी कई महिलाएं और बच्चे भी बाहर निकल आए और उनमें से कई ने शिकायत की कि उन्हें आश्रम के अंदर जबरन रखा गया था और आश्रम के दरवाजे बंद कर दिए गए थे।

हरियाणा पुलिस ने रामपाल के खिलाफ नए मामले दर्ज किए हैं जिनमें देशद्रोह का मामला भी शामिल है। उसे शुक्रवार को पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस ने कहा कि रामपाल के 70 समर्थकों को गिरफ्तार किया गया है जिनमें से अधिकतर उसके ‘निजी कमांडो’ हैं और इन्हें स्थानीय अदालत में पेश किया गया जहां से उन्हें तीन दिसंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है उनमें रामपाल का बेटा और मुख्य स्वयंसेवक पुरुषोतम दास शामिल है जो उसका रिश्तेदार है।

बुधवार को स्थिति थोड़ी शांतिपूर्ण थी जबकि मंगलवार को आश्रम के आसपास के इलाकों में तनाव बना रहा जब पुलिस और रामपाल के समर्थकों के बीच झड़प हुई थी। आश्रम में फंसे महिलाओं, बच्चों और बूढ़ों सहित दस हजार से ज्यादा समर्थक अपने हाथ उठाए हुए बाहर निकले जो शांति का संकेत था। देर रात तक लोग आश्रम से बाहर निकलते रहे।

देर शाम काफी संख्या में सीआरपीएफ के कर्मियों को आश्रम के आसपास तैनात किया गया। अभियान में सहयोग के लिए केंद्र सरकार ने भी सीआरपीएफ के 500 जवानों को रवाना किया था। इस मुद्दे से निपटने के तरीके को लेकर केंद्र ने पहले नाखुशी जताई थी। समझा जाता है कि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से कहा कि गतिरोध जल्द खत्म किया जाए। खट्टर ने कहा था कि राज्य सरकार संत रामपाल को गिरफ्तार करने के लिए सावधानीपूर्वक आगे बढ़ रही है।

मंगलवार को हुए संघर्ष में 200 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए थे। वहीं पुलिस ने गुरुवार को घोषणा की कि आश्रम के कर्मचारियों ने उन्हें चार महिलाओं के शव सौंपे हैं। एक अन्य महिला और डेढ़ वर्ष के बच्चे को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी मौत हो गई। यह पता नहीं चल पाया कि उनकी मौत का कारण क्या है। राज्य पुलिस के प्रमुख एसएन वशिष्ठ ने कहा कि कोई बाहरी चोट नहीं है और मौत के कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही चलेगा।

इससे पहले शाम को, आश्रम की तरफ कूच कर रहे प्रदर्शनकारियों को सुरक्षाकर्मियों ने रोक दिया। बंबोरी गांव में अज्ञात लोगों ने कुछ वाहनों में आग लगा दी। ये वाहन मंगलवार को वहां पुलिस आश्रम परिसर से ले कर आई थी। बाद में पुलिस ने बताया कि रामपाल के 400 से ज्यादा समर्थकों को गिरफ्तार किया गया है जो मंगलवार को हिंसा में संलिप्त थे और उन्हें स्थानीय अदालत में पेश किया जहां से उन्हें तीन दिसंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

दिन के समय उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश और अन्य हिस्से के रहने वाले रामपाल के अनुयाइयों ने आश्रम छोड़ दिया। उनमें से कई ने बताया कि कैसे उन्हें ‘रामपाल की निजी सेना’ ने रोक रखा था। उनमें से कुछ ने बताया कि आश्रम के अंदर उन्होंने सुना कि रामपाल परिसर के अंदर किसी बंकर में छिपा हुआ है।

पुलिस ने मंगलवार रात रामपाल, आश्रम के प्रवक्ता राज कपूर, एक अन्य मुख्य कार्यकर्ता पुरुषोतम दास और कई अन्य समर्थकों के खिलाफ नए मामले दर्ज किए। डीजीपी ने कहा कि नए साक्ष्य आने पर कुछ और धाराएं जोड़ी जाएंगी। डीजीपी ने बताया कि धारा 121 (भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने या युद्ध छेड़ने का प्रयास करने), 121 ए (राज्य के खिलाफ अपराध करने का षड्यंत्र करने) और 122 (भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की नीयत से हथियार आदि इकट्ठा करने) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने बताया कि ये गंभीर धाराएं हैं। पुलिस ने कहा कि इसके अलावा धारा 123 (युद्ध छेड़ने की नीयत से छिपना) व अन्य आरोप जिसमें हत्या के प्रयास, हमला एवं आर्म्स एक्ट की अन्य कई धाराएं शामिल हैं के तहत भी मामले दर्ज किए गए हैं।

पुलिस और रामपाल समर्थकों के बीच झड़प होने के बाद नए मामले दर्ज किए गए। रामपाल समर्थकों ने कथित तौर पर गोलियां चलार्इं और पेट्रोल बम फेंके। इस हफ्ते के शुरू में पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट ने अदालत की अवमानना के मामले में शुक्रवार तक रामपाल को पेश करने के आदेश दिए जिसके बाद अधिकारियों ने सतलोक आश्रम के आसपास श्रद्धालुओं से तितर-बितर हो जाने और अदालत के आदेश का अनुपालन करने में सहयोग करने की अपील की।

डीजीपी ने बताया कि जिन महिलाओं के शव सौंपे गए हैं उनकी पहचान दिल्ली की 31 वर्षीय सविता, रोहतक की 45 वर्षीय संतोष, बिजनौर की 70 वर्षीय राजबाला और पंजाब के संगरूर की 50 वर्षीय मलकीत कौर के रूप में हुई है। इसके अलावा दिल की बीमारी से ग्रस्त 20 वर्षीय रजनी को गंभीर हालत में हिसार अस्पताल सुबह चार बजे पहुंचाया गया लेकिन चार घंटे बाद उसकी मौत हो गई। उन्होंने कहा कि डेढ़ वर्ष के बच्चे को भी अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया जिसके पिता का नाम विपिन प्रताप सिंह है। वह जन्म से ही पीलिया से ग्रस्त था। बच्चा मध्यप्रदेश के रीवा जिले का रहने वाला था।

 

 

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