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आज़ादी के मायने यह नहीं होते… कुमार विश्वास ने भगत सिंह को किया कोट तो शुरू हुआ तर्क-वितर्क

बुधवार सुबह कुमार विश्वास ने शहीद-ए-आजम भगत सिंह के विचार को ट्वीट किया। कुमार विश्वास ने ट्वीट किया ही था कि रिप्लाई करने वालों की झड़ी लग गई।

Kumar Vishwas,डॉ. कुमार विश्वास

कवि कुमार विश्वास न सिर्फ अपनी कविताओं के लिए बल्कि सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने के लिए भी जाने जाते हैं। उनके ट्वीट अक्सर वायरल होते हैं और सोशल मीडिया पर यूजर्स के बीच चर्चा का विषय भी बनते हैं। आज फिर ट्विटर पर कुमार विश्वास के एक और ट्वीट को लेकर चर्चा गर्म हो गई। बुधवार सुबह कुमार विश्वास ने शहीद-ए-आजम भगत सिंह के विचार को ट्वीट किया।

उन्होंने लिखा, “आजादी के मायने यह नहीं होते कि सत्ता गोरे हाथों से काले हाथों में आ जाए,यह तो सत्ता का हस्तांतरण हुआ।असली आजादी तो तब आएगी जब वह आदमी, जो खेतों में अन्न उपजाता है, भूखा नहीं सोए। वह आदमी, जो कपड़े बुनता है, नंगा नहीं रहे। वह आदमी, जो मकान बनाता है, स्वयं बेघर नहीं रहे! (सरदार भगत सिंह)”

कुमार विश्वास ने ट्वीट किया ही था कि रिप्लाई करने वालों की झड़ी लग गई। एक यूजर ने लिखा, ”जिस राम को हम आदर्श मानते है उन्होंने विशाल समुद्र पर पुल बनाने का ठेका किसी अडानी अम्बानी को नहीं दिया था छोटे छोटे वानरों के सहयोग और सहकारिता से समुद्र पर पुल बना दिया। यही है सहकारिता। लाल बहादुर शास्त्री ने इसी सहकारिता के बल पर हरित और दुग्ध क्रांति का श्री गणेश किया। जागो”

एक दूसरे यूजर ने लिखा, ”आज सबके पास रोटी, कपड़ा व मकान है, पर दिक्कत ये है कि लोगों को रोटी पर घी, मकान वैभव शाली, और कपड़ा बढ़िया क्वालिटी का चाहिए ‘ जो सिंघू बॉर्डर पर किसान हैं वो कहीं से भी गरीब नहीं लगते। आज भी गरीब कमजोर ही है । सब उस के नाम का खाते हैं चाहे रोटी हो या पैसा। ‘

ट्वीट का जवाब देते हुए एक यूजर ने लिखा, ”मैं राजस्थान से हूं कुमार साहब और मेरे गांव में 99% लोग खेती करते हैं। सब के पास खाने को, सोने को ,पहनने को,रहने को है और हमें कृषि बिल से कोई समस्या नहीं है।
पता नहीं जिन लोगों का खेती से कोई संबंध नहीं है उन्हें क्यों उल्टी हो रही है.”

जबकि एक ने लिखा, ”मैं कृषि प्रधान हूँ देखो ये चिथड़े पहने हुए मैं ही हिंदुस्तान हूँ जाति – कर्म और धर्म से बस में किसान हूँ। हर नुमाइश में मिलूंगा अब मैं चीथड़े पहने हुए कल भले ही शान था पर आज अब परेशान हूँ मुझे वो भले कहते रहे, मैं कृषि प्रधान हूँ चीथड़ों में लिपटा हुआ मैं आज का हिंदुस्तान हूँ।”

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