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PMO को पता नहीं लाल बहादुर शास्त्री का जन्म कब हुआ, वेबसाइट पर दी है गलत जानकारी

शास्त्री का जन्म दो अक्टूबर 1904 को वाराणसी के मुगलसराय में हुआ था। प्रधानमंत्री रहने के दौरान ही 11 जनवरी 1966 को रूस के ताशकंद में उनका निधन हो गया।

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री। (Photo source: Indian express Archive)

आज (2 अक्टूबर) भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती मनाई जा रही है। शास्त्री का जन्म दो अक्टूबर 1904 को वाराणसी के मुगलसराय में हुआ था। प्रधानमंत्री रहने के दौरान ही 11 जनवरी 1966 को रूस के ताशकंद में उनका निधन हो गया। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी की पीएमओ की वेबसाइट पर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के जन्म का साल ही गलत लिखा हुआ है। पीएमओ की वेबसाइट https://www.pmindia.gov.in पर दिया गया है कि लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1901 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से सात मील दूर एक छोटे से रेलवे टाउन, मुगलसराय में हुआ था। लेकिन यह जानकारी गलत है।

लाल बहादुर शास्त्री के बेटे सुनील शास्त्री ने फोन पर जनसत्ता.कॉम से बात करते बताया कि लाल बहादुर शास्त्री का जन्म वर्ष 1901 नहीं बल्कि 1904 है। बता दें, उत्तर प्रदेश सरकार ने लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर 2 अक्टूबर को देश के अखबारों में विज्ञापन भी दिया है। इस विज्ञापन में भी लाल बहादुर शास्त्री का जन्म वर्ष साल 1904 बताया गया है।

पीएमओ की वेबसाइट से लिया गया स्क्रीनशॉट।

लाल बहादुर शास्त्री की शादी मिर्जापुर की ललिता देवी से हुई थी। उनकी शादी सभी तरह से पारंपरिक थी। दहेज के नाम पर एक चरखा एवं हाथ से बुने हुए कुछ मीटर कपड़े थे। वे दहेज के रूप में इससे ज्यादा कुछ और नहीं चाहते थे। 1930 में महात्मा गांधी ने नमक कानून को तोड़ते हुए दांडी यात्रा की। इस प्रतीकात्मक सन्देश ने पूरे देश में एक तरह की क्रांति ला दी। लाल बहादुर शास्त्री विह्वल ऊर्जा के साथ स्वतंत्रता के इस संघर्ष में शामिल हो गए। उन्होंने कई विद्रोही अभियानों का नेतृत्व किया एवं कुल सात वर्षों तक ब्रिटिश जेलों में रहे। आजादी के इस संघर्ष ने उन्हें पूर्णतः परिपक्व बना दिया।

यूपी सरकार द्वारा लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर दिया गया विज्ञापन।

आजादी के बाद जब कांग्रेस सत्ता में आई, उससे पहले ही राष्ट्रीय संग्राम के नेता विनीत एवं नम्र लाल बहादुर शास्त्री के महत्व को समझ चुके थे। 1946 में जब कांग्रेस सरकार का गठन हुआ तो उन्हें को देश के शासन में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए कहा गया। उन्हें अपने गृह राज्य उत्तर प्रदेश का संसदीय सचिव नियुक्त किया गया और जल्द ही वे गृह मंत्री के पद पर भी आसीन हुए। कड़ी मेहनत करने की उनकी क्षमता एवं उनकी दक्षता उत्तर प्रदेश में एक लोकोक्ति बन गई। वे 1951 में नई दिल्ली आ गए एवं केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई विभागों का प्रभार संभाला – रेल मंत्री; परिवहन एवं संचार मंत्री; वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री; गृह मंत्री एवं नेहरू जी की बीमारी के दौरान बिना विभाग के मंत्री रहे।

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