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शास्‍त्री की पोस्‍टमॉर्टम रिपोर्ट तक भारत सरकार के पास नहीं, आरटीआई में चौंकाने वाला खुलासा

'शास्त्री की मौत के बाद उनके रसोइए जान मुहम्मद को रूस की जांच एजेंसी केजीबी ने खाने में जहर देने के शक में गिरफ्तार किया था। लेकिन कुछ समय बाद अचानक जांच बंद हो गई'।

लाल बहादुर शास्त्री। (फाइल फोटो)

भारत सरकार के पास देश के प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री की पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं है। सूचना के अधिकार के तहत यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एक आरटीआई पर प्रधानमंत्री कार्यालय से यह जानकारी दी गई है। दरअसल, उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के निवासी संतोष पाठक ने शास्त्री की मौत की वजहों को जानने की खातिर पोस्टमार्टम रिपोर्ट मांगी थी। इसी के जवाब में पीएमओ की तहफ से यह चौंकाने वाला खुलासा किया गया।

एनबीटी की खबर के मुताबिक, संतोष पाठक द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय से शास्त्री की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मांगने का मकसद शास्त्री की मौत से पर्दा उठाना था। संतोष ने बताया कि, उनकी तरफ से दाखिल की गई आरटीआई मामले में पीएमओ की ओर से मिली सूचना निराशाजनक है। चंदौली निवासी पाठक ने किताबों के हवाले से कहा, ‘हमने तो पढ़ा था कि लाल बहादुर शास्त्री को उस रात रूस में भारत के राजदूत व नेहरू परिवार के काफी करीबी रहे टीएन कौल ने खाना खिलाया था, जबकि रूस में ही उनके साथ घरेलू नौकर और रसोइया भी मौजूद था।

पाठक ने कहा, ‘शास्त्री की मौत के बाद उनके रसोइए जान मुहम्मद को रूस की जांच एजेंसी केजीबी ने खाने में जहर देने के शक में गिरफ्तार किया था। लेकिन कुछ समय बाद अचानक जांच बंद हो गई। पाठक ने आगे कहा कि, अब मुझे शास्त्री जी की मौत के पीछे राजनीतिक साजिश लगती है, क्योंकि भारत सरकार के पास शास्त्री की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तक मौजूद नहीं है।

गौरतलब है कि, रूस के ताशकंद में दोनों देशों के प्रधानमंत्री समझौते के लिए पहुंचे, तब समझौते के बाद 11 जनवरी की रात 1:30 बजे ताशकंद में ही शास्त्री जी की मौत हो गई थी। इसकी वजह हार्ट अटैक को बताया गया। उनका शव भारत लाया गया, जो नीला पड़ चुका था। बताया जाता है कि जिस रात उनकी मौत हुई उस रात खाना खाने के दौरान तक वह एकदम ठीक थे। ऐसे में आशंका हुई कि उन्हें जहर देकर मारा गया, लेकिन बताया जाता है कि भारत और रूस दोनों ही देशों ने उनका पोस्टमॉर्टम नहीं कराया। इंडियन एक्सप्रेस के एक लेख के मुताबिक, इस मामले में एक आरटीआई भी दाखिल की गई। सरकार ने जवाब दिया कि शास्त्री जी की मौत से संबंधित सिर्फ एक दस्तावेज उपलब्ध है, जिसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

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