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PM मोदी के लिए 5 सालों में कितनी गाड़ियां खरीदी गईं? PMO ने जानकारी देने से किया इनकार

जिनेन्द्र सुराना ने कहा, 'पीएम के सुरक्षा की जिम्मेदारी एसपीजी की है, लेकिन उनके द्वारा उपयोग और खरीदी जाने वाली गाड़ियों का निर्णय प्रधानमंत्री कार्यालय ही लेता है। एसपीजी गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत है और नियमों के मुताबिक यह आवेदन गृह मंत्रालय को भेजा जाना चाहिए था'।

नई दिल्ली में अपनी गाड़ी में बैठकर किसी कार्यक्रम में जाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः विशाल श्रीवास्तव)

प्रभात उपाध्याय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गणना दुनिया के ताकतवर नेताओं में होती है। जब भी वे कहीं जाते हैं, उनके साथ कई लेयर की सिक्योरिटी तो होती ही है, साथ ही पीएम के काफिले में कई स्पेशल गाड़ियां भी शामिल होती हैं, जिन्हें खास तौर पर डिजाइन किया गया है। ये गाड़ियां किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार होती हैं।

यूं तो प्रधानमंत्री के काफिले में शामिल गाड़ियों को लेकर अक्सर तमाम तरह की खबरें सामने आती रहती हैं, लेकिन PMO से जब पीएम के काफिले में शामिल गाड़ियों की जानकारी मांगी गई तो, प्रधानमंत्री कार्यालय ने जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया। पीएमओ ने कहा कि PM के लिए सरकारी वाहन एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) द्वारा उपलब्ध कराया जाता है। इसे सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI) की धारा 24 के तहत छूट प्राप्त है।

क्या सूचनाएं मांगी गई थीं?: मध्य प्रदेश के रहने वाले आरटीआई कार्यकर्ता जिनेन्द्र सुराना ने पीएमओ से पूछा था कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के 10 वर्षों के कार्यकाल के दौरान पीएम के लिए कितनी कारें खरीदी गईं और इसका मूल्य क्या है? उन्होंने पीएम मोदी के पिछले 5 वर्षों के कार्यकाल के दौरान खरीदी गई गाड़ियां और इसके मूल्य आदि का ब्यौरा भी मांगा था। साथ ही पीएम के काफिले में शामिल सबसे पुरानी कार और दूसरे देशों से मंगाई गई कारों की जानकारी भी मांगी थी। हालांकि पीएमओ ने जानकारी देने से इनकार कर दिया और कहा कि इसे आरटीआई में छूट प्राप्त है।

जिनेन्द्र सुराना ने Jansatta.com से खास बातचीत में कहा, ‘पीएम के सुरक्षा की जिम्मेदारी एसपीजी की है, लेकिन उनके द्वारा उपयोग और खरीदी जाने वाली गाड़ियों का निर्णय प्रधानमंत्री कार्यालय ही लेता है। एसपीजी गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत है और नियमों के मुताबिक यह आवेदन गृह मंत्रालय को भेजा जाना चाहिए था’। सुराना ने आगे कहा, ”मैं इस मामले में प्रथम अपील (फर्स्ट अपील) करने जा रहा हूं”।

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