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मेनका गांधी को नजरअंदाज कर पीएमओ ने खत्‍म किया साल भर से चल रहा झगड़ा

विभाग की मंत्री मेनका गांधी, गर्म भोजन परोसने के भी खिलाफ थीं। वह चाहती थीं कि रेडी टू ईट पैकेटबंद खाना लाभार्थी बच्चों को बांट दिया जाए। जबकि विभाग के अधिकारी इस पक्ष में थे कि बच्चों को दिए जाने वाले खाद्य पदार्थ सिर्फ स्वयं सहायता समूह द्वारा स्थानीय तौर पर उपलब्ध सामग्रियों से निर्मित किया जाए।

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी

नीति आयोग ने महिला और बाल विकास मंत्रालय की बनाई हुई पोषाहार नीति को मंजूरी दे दी है। लेकिन ये मंजूरी विभाग की मंत्री मेनका गांधी को दरकिनार करके दी गई है। मामले के एक जानकार के मुताबिक ये मंजूरी प्रधानमंत्री कार्यालय के दखल के बाद दी गई है। पीएमओ को इस मामले में दखल इसलिए देना पड़ा क्योंकि ये मामला मंत्रालय के अधिकारियों और मंत्री मेनका गांधी के बीच साल भर से अधिक समय से लटका हुआ था। दोनों के बीच में इस मसले पर तीखे मतभेद थे।

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, ये असहमति प्रथमदृष्टया खाने के आसपास केंद्रित थी। एकीकृत बाल विकास योजना के तहत 14 लाख आंगनवाड़ियों से 10 करोड़ बच्चों को गर्म पका हुआ भोजन और घर ले जाने के लिए राशन देने की योजना थी। हालांकि मेनका गांधी का सुझाव था कि घर ले जाने वाला भोजन उन स्वयं सहायता समूह से प्राप्त किया जाए जिनके पास पर्याप्त संख्या में निर्माण की सुविधा हो या फिर सरकारी या निजी संस्थाओं से इसे लिया जाए।

रिपोर्ट के मुताबिक, विभाग की मंत्री मेनका गांधी, गर्म भोजन परोसने के भी खिलाफ थीं। वह चाहती थीं कि रेडी टू ईट पैकेटबंद खाना लाभार्थी बच्चों को बांट दिया जाए। जबकि विभाग के अधिकारी इस पक्ष में थे कि बच्चों को दिए जाने वाले खाद्य पदार्थ सिर्फ स्वयं सहायता समूह द्वारा स्थानीय तौर पर उपलब्ध सामग्रियों से निर्मित किया जाए।

रिपोर्ट के मुताबिक, जून में महिला और बाल विकास विभाग के सचिव आरके श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री कार्यालय को नियम तय करने में हो रही देरी पर पत्र लिखा। उन्होंने इस मामले में पीएमओ से दखल की मांग करते हुए शीघ्र निर्णय लेने और अधिकारियों की स्थिति को वापस लाने के लिए कहा। पीएमओ ने इसके बाद सुझाव दिया कि ये मामला कैबिनेट सचिवालय और नीति आयोग से ही निस्तारित होगा। इसके बाद नीति आयोग के उप चेयरमैन राजीव कुमार ने 16 अगस्त को दिशा निर्देशों को मंजूर कर दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्रालय में जारी इस बहस में वह मुद्दा भी शामिल था जिसमें ये कहा गया था कि आंगनवाड़ी में अनुपूरक पुष्टाहार कैसे दिया जाए? मेनका गांधी ने नीति निर्माताओं से बार-बार कहने की कोशिश की कि हमें सिर्फ खाना देने के बारे में सोचने की जगह पोषण देने के बारे में सोचना चाहिए। जबकि अधिकारियों ने अपने दर्ज संवाद में नीति आयोग से कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत खाद्य सुरक्षा का अर्थ जरूरतमंद तक तय मात्रा में खाद्य अनाज और भोजन पहुंचाना है।

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