Delhi News: दिल्ली के अनधिकृत कालोनियों में वर्षों से अपने मकानों को नियमित कराने की राह देख रहे लोगों की माने तो कानूनी प्रक्रिया इतनी पेचीदा है कि सरकार की ओर से लाई गई पीएम-उदय (प्रधानमंत्री-अनधिकृत कालोनी आवास अधिकार योजना) योजना को लेकर उनके बीच दिलचस्पी नहीं दिखा रही है।
वहीं, स्थायी समिति की अध्यक्षा सत्या शर्मा ने सोमवार को बताया कि पीएम-उदय योजना के तहत आवासीय क्षेत्रों के नियमितीकरण कर पर 75 फीसद तक की भारी छूट देने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। हालांकि, यह विशेष छूट 31 अक्टूबर 2026 तक आवेदन करने वाले निवासियों को ही मिलेगी।
लोग लगा रहे कई दफ्तरों के चक्कर
जानकारों की मानें तो कानूनी प्रक्रिया अधिक पेचीदा होने के कारण अब तक महज 40 हजार संपत्तियों के लिए कंवेयंस डीड या आथराइजेशन स्लिप ही जारी हो सके हैं। नरेला फेडरेशन आफ सब सिटी के अध्यक्ष जोगिंदर दहिया ने बताया कि मालिकाना हक पाने के लिए लोगों को एक-दो नहीं, बल्कि कई दफ्तरों का चक्कर लगाना पड़ता है।
पहले उन्हें एक दफ्तर में संपत्ति से संबंधित कागजात जमा करवाने होते हैं। उसके बाद संबंधित तहसील, जो कि अलीपुर में स्थित है। वहां जाकर सभी दस्तावेज जमा करने होते हैं। उसके बाद भी कितना समय लगेगा। इसको लेकर कोई अधिकारी या फिर कर्मचारी बताने वाला नहीं होता। उन्होंने दिल्ली सरकार से मांग की कि इसके लिए शिविर लगानी चाहिए, कानूनी प्रक्रिया जटिल होने की बजाय सरल चाहिए।
रजिस्ट्री के खर्च से बचने की कोशिश
दहिया ने कहा कि इन्हीं सब कारणों से लोग इस योजना के तहत अपनी संपत्ति का रजिस्ट्री करवाने के लिए पंजीकरण नहीं करवाना चाहते, अभी भी अधिकतर लोग संपत्ति का जरनल पावर आफ अर्टनी (जीपीए) ही करना पसंद कर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रजिस्ट्री करवाने में अधिक शुल्क व्यय करना पड़ता है, जबकि जीपीए में खर्चा कम आता है।
उन्होंने आरोप आरोप लगाया कि योजना के तहत गया है कि बैंक से ऋण दिया जाएगा। पर नरेला जैसे अनधिकृत कालोनियों में निवासियों को बैंक ऋण नहीं देता, जो इस योजना के तहत पंजीकृत करवा चुके हैं।
अब निगम को जिम्मेदारी
एमसीडी निर्माण समिति के पूर्व अध्यक्ष जगदीश मामगांई ने बताया कि दरअसल, योजना की शुरुआत में संपत्ति का पंजीकरण के बाद रजिस्ट्री करवाने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण को जिम्मा सौंपा गया था। इसके लिए एक निजी कंपनी का सहयोग लिया गया। पर लोगों ने जब दिलचस्पी नहीं दिखाई तो अब दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को यह जिम्मेदारी दी गई।
पंजीकरण नहीं होने की समस्या
गौतम कालोनी नरेला, निवासी एडवोकेट मुकेश गुप्ता ने बताया कि दरअसल, लोगों के कम दिलचस्पी लेने का मुख्य कारण है कानूनी प्रक्रिया कहीं अधिक पेचीदा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 के बाद वाले मकान व संपत्ति का प्रधानमंत्री-उदय योजना के तहत रजिस्ट्री के लिए पंजीकरण नहीं होता है। वहीं, वर्ष 2015 की संपत्ति का कोई इस योजना के तहत रजिस्ट्री करवाना चाहता है तो उसे बिजली और पानी के कनेक्शन से संबंधित दस्तावेज मांगा जाता है।
यही नहीं, यदि किसी के पास 120 गज की जमीन है और उसने घर के आगे खाली (आंगन) के तौर पर 20 गज छोड़ दी है तो केवल 100 गज का ही रजिस्ट्री किए जाने की बात कही जा रही है। दिल्ली देहात के दयानंद कालोनी समेत कई कालोनियों हैं, जहां के लोग इस योजना का लाभ नहीं उठा सकते। यह कुछ ऐसे कारण हैं, जिसके कारण संपत्ति मालिक की दिलचस्पी पीए-एम उदय योजना को लेकर कम होती जा रही है।
कानून के दायरे में 1511 अनधिकृत कालोनियां
स्थायी समिति की अध्यक्षा सत्या शर्मा ने सोमवार को जनसत्ता को बताया कि पीएम-उदय योजना के तहत आवासीय क्षेत्रों के नियमितीकरण कर पर 75 फीसद तक की भारी छूट देने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। हालांकि, यह विशेष छूट 31 अक्तूबर 2026 तक आवेदन करने वाले निवासियों को ही मिलेगी। योजना की जानकारी घर-घर तक पहुंचाने के लिए दिल्ली सरकार और एमसीडी की ओर से विशेष शिविरों, एसएमएस और व्यापक प्रचार अभियानों का सहारा लेगी।
पीएम-उदय कानून के दायरे में दिल्ली की 1,511 अनधिकृत कालोनियां आती हैं। इनमें करीब 44.75 लाख लोग रहते हैं। अब तक लगभग 40 हजार संपत्तियों के लिए कंवेयंस डीड या आथराइजेशन स्लिप जारी की जा चुकी हैं।
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