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कोरोना में कुंभ: उत्तराखंड सरकार जारी रखने पर अड़ी, नरेंद्र मोदी कर रहे खत्म करने की प्रार्थना

उत्तराखंड सरकार ने हाल ही में कोरोना महामारी को रोकने के लिए नई गाइडलाइंस जारी कीं, इनमें 200 से ज्यादा व्यक्तियों के शामिल होने पर रोक जैसे कई उपाय लागू किए, लेकिन कुंभ को इसमें छूट दी गई थी।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र हरिद्वार | Updated: April 17, 2021 10:08 AM
Kumbh Mela, Haridwar, Uttarakhandहरिद्वार में चल रहे कुंभ मेले में शाही स्नानों के दिन कुल 28 लाख लोग तक जुट चुके हैं। (फोटो- एजेंसी)

भारत में बढ़ते कोरोना केसों के बीच जहां अलग-अलग राज्य सरकारें लगातार कर्फ्यू से लेकर लॉकडाउन लगाने का ऐलान कर रही हैं, वहीं उत्तराखंड सरकार ने हाल ही में कुंभ मेले को अतिरिक्त छूट देकर हलचल मचा दी। वह भी तब जब खुद सरकारी आंकड़ों में कहा गया था कि कुंभ मेले में 11 से 13 अप्रैल के बीच 1300 श्रद्धालु कोरोना पॉजिटिव पाए गए। अब राज्य सरकार की इस गलती को सुधारते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी से कुंभ को प्रतीकात्मक रखने की अपील की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दो ट्वीट किए। इसमें उन्होंने कहा, “आचार्य महामंडलेश्वर पूज्य स्वामी अवधेशानंद गिरि जी से आज फोन पर बात की। सभी संतों के स्वास्थ्य का हाल जाना। सभी संतगण प्रशासन को हर प्रकार का सहयोग कर रहे हैं। मैंने इसके लिए संत जगत का आभार व्यक्त किया।” अगले ही ट्वीट में पीएम ने लिखा, “मैंने प्रार्थना की है कि दो शाही स्नान हो चुके हैं और अब कुंभ को कोरोना के संकट के चलते प्रतीकात्मक ही रखा जाए। इससे इस संकट से लड़ाई को एक ताकत मिलेगी।”

इसके कुछ ही मिनट बाद स्वामी अवधेशानंद गिरी जी के ट्विटर अकाउंट से पीएम मोदी के ट्वीट पर रिप्लाई भी आया। इसमें उन्होंने कहा, “माननीय प्रधानमंत्री जी के आह्वान का हम सम्मान करते हैं ! जीवन की रक्षा महत पुण्य है। मेरा धर्म परायण जनता से आग्रह है कि कोविड की परिस्थितियों को देखते हुए भारी संख्या में स्नान के लिए न आएं एवं नियमों का निर्वहन करें!” इस ट्वीट में जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को भी टैग किया।

कुंभ जारी रखने का मन बना चुकी थी तीरथ सरकार: बता दें कि इससे पहले कोरोना के बढ़ते मामलों के बावजूद उत्तराखंड सरकार ने हरिद्वार कुंभ मेले की अवधि को घटाने से इनकार कर दिया था। सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि मेला अवधि घटाने पर अभी कोई विचार नहीं है, न ही ऐसा कोई प्रस्ताव राज्य सरकार ने केंद्र को भेजा है, कुंभ 30 अप्रैल अपनी समय सीमा पर ही समाप्त होगा।

इतना ही नहीं उत्तराखंड सरकार ने हाल ही में कोरोना महामारी को रोकने के लिए नई गाइडलाइंस जारी की थीं। इसमें सरकार ने कोचिंग संस्थान और स्पा को खोलने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हुए विवाह तथा अन्य समारोहों में 200 से ज्यादा व्यक्तियों के शामिल होने पर रोक जैसे कई उपाय लागू किए। हालांकि, हरिद्वार महाकुंभ क्षेत्र में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा पूर्व में जारी दिशानिर्देश लागू रखने की बात कही गई थी।

कोरोना के चलते निरंजनी अखाड़ा हो चुका है कुंभ से बाहर, महामंडलेश्वर की गई है जान: बता दें कि कुंभ मेले में कोरोनावायरस का जमकर कहर टूट रहा है। यहां 11 से 13 अप्रैल के बीच 1300 लोग संक्रमित पाए गए थे। इनमें 30 साधु भी शामिल थे। वहीं, निर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर कपिल देव का बुधवार को कोरोना से निधन हो गया था। इसे देखते हुए निरंजनी अखाड़े ने कुंभ से हटने का फैसला कर लिया था। इसके बावजूद उत्तराखंड सरकार ने कुंभ का समय घटाने से इनकार कर दिया था।

कुंभ में फैला कोरोना तो अखाड़ों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर: हरिद्वार में कुंभ के दौरान कई साधु-संतों के कोरोना संक्रमित निकलने के बाद अखाड़ों में ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। जहां कुछ अखाड़ों ने पहले ही कुंभ को खत्म करने पर हामी भरी थी, वहीं कुछ अन्य ने इससे असहमति जताई। इस बीच बैरागी अखाड़े ने आरोप लगाया था कि कुंभ में कोरोना संन्यासी अखाड़े के कारण फैला और इसमें उसका हाथ नहीं था। बैरागी अखाड़े ने कहा था कि कुछ अखाड़े मिलकर कुंभ खत्म करने का फैसला नहीं कर सकते। इतना ही नहीं निर्मोही अखाड़े के महंत राजेंद्र दास ने कुंभ में बढ़ते संक्रमण के लिए अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी को जिम्मेदार बता दिया था।

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