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द इकोनॉमिस्ट ने लिखा- महात्मा गांधी के सिद्धांतों की धज्जियां उड़ा रहे नरेंद्र मोदी, डरे हैं 20 करोड़ मुसलमान

लेख के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोशिश है कि सहिष्णु, सर्व-धर्म समभाव के बजाय भारत को हिंदू राष्ट्र बनाया जाए।

लेख में भाजपा सरकार पर सीएए के जरिए देश में अलगाव पैदा करने का आरोप लगाया गया है। (इमेज सोर्स- द इकोनॉमिस्ट)

संशोधित नागरिकता कानून के मुद्दे पर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग सरकार से इस कानून को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। इसी बीच द इकॉनोमिस्ट मैग्जीन ने अपने ताजा अंक में एक कवर स्टोरी की है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी नीतियों की आलोचना की गई है।

मैग्जीन ने अपनी कवर स्टोरी ‘Narendra Modi stokes division in the world’s biggest democracy’ में संशोधित नागरिकता कानून समेत कई अन्य मुद्दों पर केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर देश में अलगाव पैदा करने का आरोप लगाया गया है।

लेख में लिखा गया है कि बीते माह भारत ने कानून में बदलाव कर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से प्रताड़ित होकर आने वाले नागरिकों को नागरिकता देने का ऐलान किया है, लेकिन इस कानून में मुस्लिमों को शामिल नहीं किया गया है।

इसके अलावा भाजपा सरकार सभी भारतीयों के लिए एक रजिस्टर बनाना चाहती है, जिसमें 1.3 अरब भारतीयों के डाटा को शामिल किया जाएगा और अवैध शरणार्थियों की पहचान की जाएगी। लेख के अनुसार, देश के 20 करोड़ मुसलमानों में से कई के पास अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कागजात ही नहीं है, ऐसे में वो डरे हुए हैं कि उन्हें देश से निकाला जा सकता है। द इकॉनोमिस्ट के लेख में बताया गया है कि सरकार ने डिटेंशन कैंप बनाने के आदेश दिए हैं।

बता दें कि द इकोनॉमिस्ट मैग्जीन के ताजा अंक में छपी स्टोरी से पहले प्रतिष्ठित टाइम मैग्जीन में भी बीते साल पीएम मोदी की आलोचना करते हुए एक आर्टिकल लिखा गया था। इस आर्टिकल को आतिश तासीर ने लिखा था और पीएम मोदी को ‘ इंडियाज डिवाइडर इन चीफ’ बताया था। इस आर्टिकल में भी पीएम मोदी की नीतियों की आलोचना की थी।

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द इकोनॉमिस्ट के लेख के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोशिश है कि सहिष्णु, सर्व-धर्म समभाव के बजाय भारत को हिंदू राष्ट्र बनाया जाए। इसके अलावा लेख में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और 2002 में हुए गुजरात दंगों के लिए भी भाजपा सरकार पर आरोप लगाए गए हैं।

लिखा गया है कि मोदी सरकार देश के संविधान के सिद्धांतों को कमजोर कर रही है और उनके ताजा कदम से देश के लोकतंत्र को दशकों तक नुकसान झेलना पड़ेगा। द इकोनॉमिस्ट का कहना है कि सरकार के कदम से हिंसा भी भड़क सकती है लेकिन धर्म और राष्ट्रीय पहचान के आधार पर अलगाव पैदा करने से भाजपा सरकार को फायदा मिल सकता है।

दरअसल इसका असर ये होगा कि इससे भाजपा के कार्यकर्ताओं और सहयोगी पार्टियों को ऊर्जा मिलती रहेगी और वह देश के लोगों का अन्य मुद्दों जैसे अर्थव्यवस्था आदि से ध्यान भी हटा सकेंगे।

द इकोनॉमिस्ट के लेख में आरोप लगाया गया है कि, पीएम मोदी लोगों में डर फैलाकर सत्ता में बने रहना चाहते हैं। लेख में जम्मू कश्मीर और दलितों का भी मुद्दा उठाया गया है और सरकार की आलोचना की गई है।

लेख में पीएम मोदी पर आरोप है कि वह महात्मा गांधी की यादों को धूमिल कर रहे हैं। जिसके चलते मॉब लिंचिंग की घटनाएं सामने आ रही हैं। पीएम मोदी को लगता है कि वह सांप्रदायिक हिंसा को नियंत्रण में रख सकते हैं, लेकिन ऐसा करना उनके लिए आसान नहीं होगा।

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