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कांग्रेस पर पीएम मोदी का वार: मुझे अपशब्द कह लें, लेकिन सरदार पटेल को नहीं

पीएम मोदी ने अपने बयान में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के उस बयान पर निशाना साधा जिसमें उन्होंने कहा था कि सरदार पटेल का स्टेच्यू आॅफ युनिटी, जिसका उदघाटन 31 अक्टूबर को होना है, वह 'मेड इन चाइना' है।

राजकोट के महात्मा गांधी संग्रहालय में पीएम नरेंद्र मोदी। फोटो- पीटीआई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर रविवार (30 सितंबर) को परोक्ष हमला किया। पीएम मोदी ने कहा ​कि आप चाहें तो मोदी को अपशब्द कहते रहिए लेकिन सरदार पटेल जैसी शख्सियतों के कद को छोटा मत कीजिए। पीएम मोदी ने शनिवार (29 सितंबर) को भी इस मामले में बयान दिया था। शनिवार को दिए अपने बयान में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के उस बयान पर निशाना साधा था जिसमें उन्होंने कहा था कि सरदार पटेल का स्टेच्यू आॅफ युनिटी, जिसका उदघाटन 31 अक्टूबर को होना है, वह ‘मेड इन चाइना’ है।

मोदी गुजरात में कई विकास योजनाओं के उदघाटन के मौके पर बोल रहे थे। ये विकास प्रोजेक्ट आनंद, खतराज, और कच्छ जिले के अंजार में स्थित है। पीएम ने अंजार में एलएनजी टर्मिनल, अंजार-मुंदड़ा पाइपलाइन परियोजना तथा पालनपुर-पाली-बाड़मेर पाइपलाइन परियोजना का उद्घाटन भी किया।

वहीं आणंद जिले में मोदी ने अमूल के 533 करोड़ रूपये के प्रीमियम चॉकलेट संयंत्र, एक पौष्टिक खाद्य संयंत्र, आणंद कृषि विश्वविद्यालय का आठ करोड़ रूपये वाला खाद्य प्रसंस्करण केंद्र और विद्या डेयरी का 20 करोड़ रूपये के आइसक्रिम संयंत्र का उद्घाटन रिमोट कंट्रोल से किया। अमूल के इस चॉकलेट संयंत्र की क्षमता 1,000 टन चॉकलेट हर महीने उत्पादन करने की है।

मोदी ने भारत के प्रथम गृह मंत्री वल्लभभाई पटेल की प्रशंसा की जो कि गुजरात में अमूल डेयरी सहकारी आंदोलन के संस्थापक भी थे। उन्होंने कहा कि पटेल ऐसे नेता थे जिन्होंने लोगों को एक आर्थिक मॉडल के रूप में सहकारी आंदोलन का महत्व बताया।

पीएम मोदी ने कहा, ‘यह मुझे गर्व से भर देता है कि यह किसानों के सात दशक से अधिक समय के सहकारी आंदोलन का परिणाम था कि अमूल देश की एक पहचान, प्रेरणा और जरूरत बन गया।’ उन्होंने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह केवल एक उद्योग या दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र नहीं बल्कि एक ‘‘वैकल्पिक आर्थिक मॉडल’’ भी है। उन्होंने कहा कि एक ओर साम्यवादी आर्थिक मॉडल है दूसरी ओर पूंजीवादी मॉडल है। विश्व इन दो मॉडल से प्रेरित है।

उन्होंने कहा, ‘सरदार साहेब ने एक तीसरे आर्थिक माडल की नींव रखी, जो कि न तो सरकार और न ही पूंजीवादियों द्वारा नियंत्रित था। इसके बजाय उसका निर्माण किसानों और लोगों के सहयोग से किया गया था और सभी उसका हिस्सा थे। यह साम्यवादी और पूंजीवादी मॉडल का एक व्यवहारिक विकल्प है।’

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