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पीएम नरेंद्र मोदी ने आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को आरक्षण देने वाला बिल पास होने पर कही यह बात

आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने का विधेयक मंगलवार (8 जनवरी) को लोकसभा में पारित हो गया। अब यह राज्यसभा में पेश किया जाना है। लोकसभा में विधेयक पास होने को पीएम नरेंद्र मोदी ने एतिहासिक पल करारा दिया है।

Author Published on: January 9, 2019 1:34 AM
पीएम नरेन्द्र मोदी, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने का विधेयक मंगलवार (8 जनवरी) को लोकसभा में पारित हो गया। अब यह राज्यसभा में पेश किया जाना है। लोकसभा में विधेयक पास होने को पीएम नरेंद्र मोदी ने एतिहासिक पल करारा दिया है। उन्होंने कहा, “मैं उन सभी पार्टियों के सांसदों को धन्यवाद कहना चाहूंगा जिन्होंने इस विधेयक का समर्थन किया। हम ‘सबका साथ, सबका विकास…’ के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारा प्रयास है कि जाति-समुदाय से ऊपर उठकर हर गरीब को सम्माननीय जीवन जीने और हर संभावित मौका मिले।” मंगलवार शाम इस विधेयक को लोकसभा में पेश किया गया और रात लगभग 10 बजे इस पर वोटिंग कराई गई। लोकसभा में विधेयक 3 के मुकाबले 323 वोटों से पारित कर दिया गया। अब इस विधेयक को राज्‍यसभा में पेश किया जाएगा। संविधान संशोधन विधेयक होने के कारण विधेयक का सदन में उपस्थित सदस्यों के दो तिहाई मतों से पास होना जरूरी है।

सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित करने वाला संविधान 124वां संशोधन विधेयक मंगलवार को लोकसभा में पेश किया गया। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने संविधान (124 वां संशोधन) विधेयक, 2019 पेश किया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सोमवार को ही इसे मंजूरी प्रदान की है। आरक्षण आर्थिक रूप से पिछड़े उन गरीब लोगों को दिया जाएगा, जिनकी सालाना आय 8 लाख रूपये से कम होगी और जिनके पास 5 एकड़ तक जमीन होगी। 10 फीसदी आरक्षण आर्थिक रूप से कमज़ोर तबके को दिया जाएगा जिसमें हिन्दू सवर्ण, मुसलमान, ईसाई और अन्य धर्मों के लोग भी शामिल हैं।

वहीं लोकसभा में एनडीए के घटक दल लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के नेता और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने विधेयक पर चर्चा के दौरान कहा कि कुल 60 फीसद के आरक्षण के प्रावधान को निजी क्षेत्र में भी लागू किया जाए, ताकि दलित, आदिवासी, अन्‍य पिछड़ी जाति और आर्थिक तौर पर पिछड़े सवर्णों को निजी क्षेत्र में उचित मौका मिल सके। रामविलास पासवान ने न्‍यायिक सेवा में भी हर जाति और धर्म को बराबर स्‍थान देने की वकालत की।

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