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पीएम मोदी ने बताया कैसे सीखी हिंदी, घर कैसा था और हिमालय में कैसे गुजारे दो साल

पीएम मोदी ने अपने पिता के स्थानीय रेलवे स्टेशन पर लगने वाले टी स्टॉल की भी चर्चा की और बताया कि वहां काम करना और देशभर के लोगों से मिलना उन्हें काफी अच्छा लगता था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साझा की कई अहम बातें। (image source-PTI)

प्रधानमंत्री ने अपनी युवावस्था में 2 साल हिमालय पर गुजारे हैं, जिसे लेकर काफी कुछ कहा जाता है। लेकिन एक हालिया बातचीत में पीएम मोदी ने अपने उन 2 सालों को लेकर अनुभव साझा किया और ये भी बताया कि उन्होंने हिंदी कैसे सीखी। दरअसल मशहूर फेसबुक पेज “Humans of Bombay” ने पीएम मोदी से हुई कथित बातचीत के अंश अपने पेज पर पोस्ट किए हैं। इस पोस्ट में पीएम मोदी ने अपने बचपन, शुरुआती जीवन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ उनके जुड़ाव को लेकर खुलकर अपने विचार साझा किए। अपनी बातचीत में पीएम मोदी ने अपने बचपन की यादें साझा करते हुए कहा कि वह और उनके परिवार के 8 सदस्य एक छोटे से घर में रहते थे और उनकी मां नवजात और छोटे बच्चों का प्राकृतिक उपचार करती थीं।

पीएम मोदी ने बताया कि ‘उनकी मां को शिक्षा पाने का सौभाग्य नहीं मिला, लेकिन भगवान उनके प्रति दयालु रहे और बीमार बच्चों के इलाज की उनके पास विशेष क्षमता थी। प्रधानमंत्री ने बताया कि हर रोज उनके घर के सामने माताएं लंबी लाइन लगातीं थी, क्योंकि उनकी मां हीलिंग टच के लिए जानी जातीं थी।’ पीएम मोदी ने अपने पिता के स्थानीय रेलवे स्टेशन पर लगने वाले टी स्टॉल की भी चर्चा की और बताया कि वहां काम करना और देशभर के लोगों से मिलना उन्हें काफी अच्छा लगता था। पीएम मोदी ने बताया कि ‘मैं रेलवे स्टेशन पर अपने पिता की टी स्टॉल को खोलता था और फिर सफाई करके स्कूल जाता था। जैसे ही स्कूल खत्म होता, मैं फिर से उनकी मदद के लिए पहुंच जाता था। लेकिन मुझे जिस चीज में सबसे ज्यादा दिलचस्पी थी, वो थी देशभर के लोगों से मिलने में।’

पीएम मोदी ने बताया कि वह स्टेशन पर लोगों को चाय पिलाते और उनकी कहानियां सुनते थे। इस तरह ही उन्होंने हिंदी बोलना सीखा। प्रधानमंत्री के अनुसार, वह बचपन से ही किताबें पढ़ने के शौकीन थे। वह लाइब्रेरी जाते और वहां जो भी उनके हाथ लगता वह उसे पढ़ना शुरु कर देते थे। आरएसएस के साथ अपने जुड़ाव पर पीएम बोले कि ‘जब वह 8 साल के थे, तब उन्होंने पहली बार आरएसएस की मीटिंग में हिस्सा लिया। जब वह 9 साल के थे तो वह दूसरे लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने के एक काम का हिस्सा था। हमने गुजरात के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ से पीड़ित लोगों की सहायता के लिए अपने दोस्तों के साथ एक फूड स्टॉल लगाया था। मैं लोगों की सहायता के लिए कुछ और करना चाहता था, लेकिन हमारे पास काफी कम साधन थे।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब 17 साल के थे, तो वह हिमालय चले गए थे। अपने उस दौर को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ‘मैं उस समय बड़ा ही अस्पष्ट था और मेरे पास कोई लक्ष्य नहीं था। मैं नहीं जानता था कि मैं कहां जाना चाहता हूं और जो मैं करना चाहता था, वह क्यों करना चाहता हूं। इसलिए मैंने खुद को भगवान के प्रति समर्पित कर दिया और 17 साल की उम्र में हिमालय चला गया। मैं वहां गया, जहां भगवान मुझे ले जाना चाहते थे। ये मेरे जीवन का बड़ा ही अस्पष्ट समय था, लेकिन फिर भी मुझे इससे बहुत कुछ सीखने को मिला। इस दौरान मैंने दुनिया को समझा, खुद को समझा। मैंने खूब यात्रा की और रामकृष्ण मिशन में समय बिताया। साधुओं और संतों से मिला, उनके साथ रहा और खुद को तलाशना शुरु किया। मेरे सिर पर छत नहीं थी, लेकिन फिर भी घर की कमी महसूस नहीं हुई। इससे सबकुछ बदल गया और मैं दो साल बाद साफ दृष्टिकोण के साथ घर लौटा।’

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