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नरेन्द्र मोदी ने नानाजी देशमुख, जयप्रकाश नारायण को कि‍या याद, कहा- इन्होंने जीवन को मातृभूमि के लिए किया समर्पित

प्रधानमंत्री ने कहा कि इन दोनों महापुरुषों ने अपने जीवनकाल में देश के संकल्प के लिए स्वयं को सौंप दिया। इन दोनों के जीवन का पल-पल मातृभूमि के लिए, देशवासियों के कल्याण के लिए था और आजीवन इसमें जुटे रहे।

Author नई दिल्ली | October 11, 2017 2:30 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि लोकनायक जय प्रकाश नारायण और नानाजी देशमुख जैसे नेता युवाओं के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं, जिन्होंने अपना जीवन देश के नाम सर्मिपत कर दिया लेकिन राजनीतिक पदों से हमेशा दूर रहे। जयप्रकाश नारायण और नानाजी देशमुख को उनकी जयंती पर स्मरण करते हुए मोदी ने कहा कि जब भ्रष्टाचार के खिलाफ जयप्रकाश जी जंग लड़ रहे थे तो दिल्ली की सल्तनत में खलबली मच गई। उन्हें रोकने के लिए षड्यंत्र होते थे। पटना के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में जेपी पर हमला हुआ। उनके बगल में नानाजी देशमुख खड़े थे। नानाजी ने अपने हाथों पर मृत्यु के रूप में आए प्रहार को झेल लिया। हाथ की हड्डियां टूट गई। वो ऐसी घटना थी कि देश का ध्यान नानाजी देशमुख की तरफ गया।

उन्होंने कहा कि इन दोनों महापुरुषों ने अपने जीवनकाल में देश के संकल्प के लिए स्वयं को सौंप दिया। इन दोनों के जीवन का पल-पल मातृभूमि के लिए, देशवासियों के कल्याण के लिए था और आजीवन इसमें जुटे रहे। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन तीव्रता पर पहुंचा ऐसे समय में जयप्रकाश जी, लोहिया जी जैसे युवाओं ने आगे आकर आंदोलन की डोर संभाली। उस कालखंड में वे लोगों की प्रेरणा का स्रोत बन गए। जेपी और नानाजी देशमुख के सामाजिक जीवन से जुड़े कार्यों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, ”आजादी के बाद सत्ता के गलियारों में लोग जगह ढूंढ़ते थे, जयप्रकाश जी ने सत्ता से खुद को दूर रखा। उन्होंने और उनकी पत्नी प्रभादेवी ने ग्रामोत्थान के मार्ग को चुना।’’

उन्होंने कहा कि नानाजी देशमुख को देश ज्यादा जानता नहीं था, उन्होंने अपना जीवन दे दिया था। नानाजी ने संसाधनों को ग्राम विकास के काम में लगाया। नानाजी देशमुख को मंत्री पद के लिए मोराराजी की सरकार में आमंत्रित किया गया, लेकिन उन्होंने विनम्रतापूर्वक इनकार कर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने नानाजी को ग्राम सेवा में लगे रहने वाला कार्यकर्ता बताया। उन्होंने कहा कि नानाजी देशमुख ने स्वयं को राजनीतिक जीवन से निवृत कर करीब साढे 3 दशक तक चित्रकूट को केंद्र बनाकर अपने जीवन को ग्रामीण विकास के लिए खपा दिया। भारत सरकार इन महापुरुषों के सपनों के आधार पर उस दिशा में आगे बढ़ रही है। गांव आगे कैसे बढ़ें, गरीबी से मुक्त कैसे बनें, बीमारी से मुक्त कैसे बनें, जातिवाद से मुक्त हो …उस दिशा में प्रयास कर रहे हैं।

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