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जेनरेटर रूम से BJP महासचिव ने मोदी को किया फोन और कट गया नितिन पटेल का पत्ता

प्रधानमंत्री कार्यालय विजय रुपानी के चयन को लेकर संतुष्ट लेकिन राज्य में सत्ता परिवर्तन जिस तरह हुआ उसे लेकर वो खुश नहीं है।

Author August 14, 2016 9:37 AM
भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (Photo: PTI)

गुजरात में पिछले दिनों नेतृत्‍व में बदलाव हुआ और आनंदी बेन पटेल के इस्‍तीफा देने के बाद विजय रुपाणी को नया मुख्‍यमंत्री चुना गया। इस दौरान आखिरी क्षणों तक आनंदी बेन को विश्‍वास था कि नितिन पटेल उनके उत्‍तराधिकारी बनेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने भी कुछ पत्रकारों को उनके नाम को लेकर पुष्टि कर दी थी। रुपाणी के नाम के एलान के चार घंटे पहले से ही नितिन पटेल के नए सीएम का खबर चारों ओर फैल गई थी। पटेल ने टीवी चैनलों को इंटरव्यू देना भी शुरू कर दिया था। लेकिन पर्दे के पीछे भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह विजय रुपाणी की पैरवी कर रहे थे। गांधीनगर के पास भाजपा मुख्‍यालय में कशमकश चलती रही। बात जब नहीं बनी तो भाजपा के महासचिव वी सतीश ने पार्टी दफ्तर के जनरेटर रूम से पीएम नरेंद्र मोदी को फोन किया।

प्रधानमंत्री ने तटस्‍थ रहने की बात कही। साथ ही कहा कि फैसला राज्‍य के पार्टी विधायकों और संसदीय बोर्ड को करना है। संसदीय बोर्ड पहले ही अमित शाह को नया सीएम चुनने का अधिकार दे चुका था। वहीं पार्टी के सभी गैर पटेल विधायकों ने पटेल उम्‍मीदवार के बजाय रुपाणी को चुना। मोदी ने मामले से अपने हाथ पीछे खींचते हुए गुजरात की पूरी जिम्‍मेदारी अमित शाह पर डाल दी। गुजरात में वर्तमान में भाजपा के लिए हालात ठीक नहीं है लेकिन वहां पर फिर से कमल खिलाने की जिम्‍मेदारी अब अमित शाह पर होगी। नाराज आनंदीबेन का मानना है कि अमित शाह के दबाव के आगे नरेंद्र मोदी झुक गए।

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वहीं सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री कार्यालय विजय रुपानी के चयन को लेकर संतुष्ट लेकिन राज्य में सत्ता परिवर्तन जिस तरह हुआ उसे लेकर वो खुश नहीं है। इसकी एक वजह ये है कि हालिया घटनाक्रम से राज्य में पटेल समुदाय के बीजेपी से दूर होने की आशंका। ये आशंका उस समय भी दिखी जब नितिन गडकरी ने दिल्ली में रुपानी के नाम की आधिकारिक घोषणा की। उनकी घोषणा के बाद पार्टी के नेताओं पर कोई खास खुशी या उत्साह नहीं दिखा। जिस तरह से शाह ने अपने करीबी रुपानी को सीएम बनवाया उससे पार्टी के कार्यकर्ता और विधायक थोड़े चकित हैं। एक पूर्व मंत्री और बीजेपी सांसद कहते हैं, “रुपानी की वही भूमिका होगी जो रामायण में भरत की थी। वो कुर्सी पर पादुका रखकर शाह के नाम पर शासन करेंगे।” जब शाह 2010 में सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में दिल्ली में दर-ब-दर थे तो वो अक्सर रुपानी के आवास पर ही रुकते थे। उस समय रुपानी राज्य सभा सांसद थे।

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