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डिजिटल कृषि विपणन मंच की शुरुआत आंबेडकर जयंती पर

मोदी ने कहा कि पूर्व में किसानों को तभी मुआवजा मिलता था जबकि प्राकृतिक आपदा की वजह से 50 प्रतिशत फसल बर्बाद हो जाती थी। अब इन नियमों में ढील दी गई है

Author सीहोर (मध्य प्रदेश) | February 19, 2016 12:38 AM
मध्यप्रदेश के सिहोर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

किसानों को अपनी उपज देशभर में कहीं भी बेहतर मूल्य पर बेचने की सुविधा प्रदान करने के लिए आगामी 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती पर डिजिटल कृषि विपणन प्लेटफार्म शुरू किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीहोर में किसान महासम्मेलन के दौरान गुरुवार को कहा कि वह 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुना करने को प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री ने हाल में पेश प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दिशानिर्देश भी पेश किए।

मोदी ने कहा कि हम बीआर अंबेडकर की जयंती पर राष्ट्रीय कृषि बाजार, वर्चुअल और डिजिटल प्लेटफार्म की शुरुआत करेंगे। हम ऑनलाइन प्लेटफार्म शुरू करेंगे। इस प्लेटफार्म के जरिये किसान अपने मोबाइल फोन के जरिये अपनी उपज को देश में कहीं भी उस स्थान पर बेच सकेंगे जहां उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। किसानों को काफी मेहनत करने के बावजूद उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलता है, क्योंकि उसे अपनी फसल आसपास की मंडियों में बेचनी पड़ती है। लिहाजा सरकार ने इस समस्या को डिजिटल व्यवस्था के जरिये दूर करने का फैसला किया है।

मोदी ने कहा, ‘देश में पहली दफा किसानों के फसल की ऐसी बीमा योजना पेश की गई है जिसमें विभिन्न आपदाओं के कारण एक अकेले प्रभावित किसान को भी फसल का मुआवजा देने का प्रावधान है। यहां तक की फसल कटने के बाद खेत में खराब होने की स्थिति में भी इस योजना के तहत किसान को मुआवजा दिया जाएगा।’ मोदी ने कहा, ‘फसल बीमा का पहला प्रयास अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने किया था। उसके बाद सरकार बदली और योजना में कुछ बदलाव किया गया। इससे यूपीए सरकार को फायदा हुआ, लेकिन किसानों के बीच विश्वास की कमी हुई। उन्होंने कहा, ‘इसका नतीजा यह हुआ कि किसान इस योजना से दूर भागने लगे। प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद वे बीमा पालिसी नहीं लेना चाहते थे। 20 प्रतिशत से अधिक किसान भी इससे जुड़े नहीं थे।’ इस योजना के दायरे में कम से कम 50 प्रतिशत किसानों को लाने का लक्ष्य रखते हुए मोदी ने कहा कि नया कार्यक्रम किसानों की सभी आशंकाओं को दूर करता है, इसमें दावे की कोई सीमा नहीं है और प्रीमियम पर दो प्रतिशत की सीमा है, पूर्व की योजनाओं में 14 प्रतिशत तक प्रीमियम था। मोदी ने कहा, ‘मुझे आपसे (किसानों) से कुछ उम्मीद है। कम से कम एक बार इस योजना को आजमाएं। नई योजना में भरोसा जताएं। जितने अधिक किसान इस पालिसी को लेंगे सरकार पर उतना ही अधिक वित्तीय बोझ पड़ेगा। इसके बावजूद मैं आपसे कहूंगा कि आप इस पालिसी से जुड़ें।’

मोदी ने कहा कि पूर्व में किसानों को तभी मुआवजा मिलता था जबकि प्राकृतिक आपदा की वजह से 50 प्रतिशत फसल बर्बाद हो जाती थी। अब इन नियमों में ढील दी गई है। एक-तिहाई फसल क्षेत्र को नुकसान होने पर भी उन्हें मुआवजा मिलेगा। उन्होंने इस योजना की कुछ विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें यह प्रावधान है कि 25 प्रतिशत दावे का भुगतान तत्काल कर दिया जाएगा, जबकि शेष का निपटान भी जल्द से जल्द किया जाएगा। एक अन्य प्रावधान है कि यदि कटाई के 14 दिन तक भी फसल नष्ट होती है तो भी किसानों को बीमा दावा मिलेगा। इसके अलावा यदि कोई किसान कमजोर बारिश की वजह से बुवाई नहीं करता है, तो भी वह कुछ बीमा दावे का हकदार होगा। मोदी ने कहा, ‘यदि किसान इस योजना से जुड़ते हैं तो प्राकृतिक आपदाएं उनको नुकसान नहीं पहुंचा पाएंगी। सरकार भी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी होगी। इस योजना के साथ मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों को सुरक्षा प्रदान करेगा।’

शेरपुर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर में है तथा यह सुषमा स्वराज के संसदीय क्षेत्र विदिशा का हिस्सा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, प्रधानमंत्री सिंचाई योजना, जैविक खेती के अलावा यूरिया की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता सुनिश्चित करना, गन्ना किसानों की मदद के लिए एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के अलावा कृषि क्षेत्र में स्टार्ट अप पहल का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के बारे मेंं कहा, ‘अब हम खाड़ी से तेल नहीं झाड़ी से तेल निकाल रहे हैं।’ यह तेल पेट्रोल में मिला कर उपयोग किया जाएगा। इससे पर्यावरण सुधरेगा, साथ ही गन्ना उत्पादकों की आय भी सुनिश्चित होगी। मोदी ने कहा, ‘हम कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी का एकीकरण करना चाहते हैं। प्रगतिशील खेती तथा परंपरागत तरीके का मिश्रण होना चाहिए।’

ई-कृषि प्लेटफार्म के तहत सरकार देश की सभी 585 थोक मंडियों का 2018 तक चरणबद्ध तरीके से एकीकरण करने की दिशा में काम कर रही है। अभी तक इसके लिए 200 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। पहले चरण में इस साल मार्च अंत तक 200 मंडियों का एकीकरण किया जाएगा जबकि 200 और मंडियों को 2017 में आनलाइन प्लेटफार्म से जोड़ा जाएगा। 2018 तक शेष मंडियों का एकीकरण किया जाएगा। केंद्र को थोक बाजारों में आवश्यक ढांचे के विकास के लिए कर्नाटक, गुजरात, तेलंगाना और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से प्रस्ताव मिले हैं। राष्ट्रीय कृषि ई-बाजार के क्रियान्वयन के लिए एक रणनीतिक भागीदार की भी पहचान की गई है। इसके पहले रैली को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री चौहान ने प्रधानमंत्री के दुनिया में सभी देशों में सम्मान हासिल करने का जिक्र किया। रैली में केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज, राधा मोहन सिंह, नरेंद्र सिंह तोमर, थावरचंद गेहलोत आदि भी मौजूद थे।

* 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुना करने का वादा, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दिशानिर्देश पेश।
* फसल बीमा योजना के तहत 20 फीसद से अधिक किसान जुड़े नहीं हैं, यह लक्ष्य 50 फीसद रखा गया है।
* पहली दफा ऐसी फसल बीमा योजना पेश की गई है जिसमें आपदा प्रभावित एक किसान को भी मुआवजा मिलेगा : मोदी।

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