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रिपोर्ट: PM नरेंद्र मोदी का वादा 2022 तक हर नागरिक को घर, पर तय वक्त से काफी पीछे है निर्माण कार्य

सरकार ने इन घरों के निर्माण के लिए लगभग 1.1 लाख करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता राशि सैंक्शन की है, जिसमें लगभग 31 फीसदी दी जा चुकी है।

तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वादा है कि 2022 तक देश के हर नागरिक के पास अपना घर होगा। पर जमीनी हकीकत और सरकारी आंकड़े बताते हैं कि प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत होने वाला निर्माण कार्य तय वक्त से काफी पीछे है। ‘फैक्टचेकर’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, योजना का काम लक्ष्य से तकरीबन 54 फीसदी पीछे चल रहा है।

रिपोर्ट में फरवरी 2019 में लोकसभा में पेश किए गए आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के आधार पर कहा गया कि पीएमएवाई (शहरों में) के अंतर्गत तकरीबन 15 लाख घर 31 जनवरी, 2019 तक बने, जबकि लगभग इससे संख्या से थोड़े से कम घरों का अधिग्रहण किया गया। यह आंकड़ा पास/सैंक्शन किए गए उन 75 लाख घरों का महज 20 फीसदी है।

वहीं, देश के ग्रामीण हिस्सों में सरकार ने लगभग 75 लाख घरों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया है। सरल भाषा में समझें तो पीएमएवाई-ग्रामीण के पहले चरण में मोदी सरकार ने 31 मार्च 2019 तक की तय की हुई डेडलाइन तक एक करोड़ घरों के लक्ष्य का लगभग 77 फीसदी हिस्सा पूरा कर लिया है।

15 अप्रैल, 2019 के पीएमएवाई डैशबोर्ड के हवाले से कहा गया कि पीएमएवाई-ग्रामीण के अगले चरण में अभी लगभग 23 लाख घर और बनाए जाने हैं। हालांकि, आंकड़ें यह भी दर्शाते हैं कि फिलहाल सिर्फ 34 फीसदी लाभार्थियों को ही पूरा पेमेंट मिल पाया है।

सरकार ने इन घरों के निर्माण के लिए लगभग 1.1 लाख करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता राशि सैंक्शन की है, जिसमें लगभग 31 फीसदी दी जा चुकी है। सात फरवरी, 2019 को राज्यसभा में मंत्रालय के जमा किए गए आंकड़े के हवाले से रिपोर्ट में आगे बताया गया कि अभी तक बनाए गए 82.6 फीसदी घर आर्थिक रूप से पिछड़े तबकों के लाभार्थियों को दिए गए हैं।

बता दें कि 25 जून, 2015 को पीएम ने यह योजना लॉन्च की थी। उनका कहना था कि सभी के लिए घर मुहैया कराने से संबंधित योजना के तहत शहरी इलाकों में दो करोड़ घर, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग तीन करोड़ घर बनाए जाएंगे।

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