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डीएमके प्रमुख करुणानिधि से मिले पीएम नरेंद्र मोदी, हाथ थामकर बैठे

द्रमुक के कार्यकारी अध्यक्ष और करुणानिधि के बेटे एम के स्टालिन ने गेट पर प्रधानमंत्री का स्वागत किया और उन्हें एक लाल शॉल देकर सम्मानित किया।

नरेंद्र मोदी द्रमुक अध्यक्ष के बगल में बैठे और उनका हाथ थामे रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने द्रमुक अध्यक्ष एम करुणानिधि से चेन्नई में गोपालपुरम स्थित उनके आवास पर सोमवार को मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब 20 मिनट तक बैठक चली। मोदी द्रमुक अध्यक्ष के बगल में बैठे और उनका हाथ थामे रहे। इससे पहले द्रमुक के कार्यकारी अध्यक्ष और करुणानिधि के बेटे एम के स्टालिन ने गेट पर प्रधानमंत्री का स्वागत किया और उन्हें एक लाल शॉल देकर सम्मानित किया। मोदी के साथ राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, जहाजरानी राज्यमंत्री पी. राधाकृष्णन और प्रदेश भाजपा प्रमुख तामिलीसाई सुंदरराजन भी थे।

इस मौके पर करुणानिधि की बेटी कनिमोई समेत द्रमुक नेता भी मौजूद रहे। व्हीलचेयर पर निर्भर करुणानिधि थोड़ी देर के लिए बाहर आए और उन्होंने अपने समर्थकों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया। करुणानिधि दवा से हुई एलर्जी के कारण अक्तूबर 2016 से बीमार हैं और उन्हें गत दिसंबर में दो बार एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बीमार होने के बाद करुणानिधि पहली बार इस साल 19 अक्टूबर को द्रमुक के मुखपत्र ‘मुरासोली’ की 75 वर्ष की यात्रा को दिखाने वाली प्रदर्शनी में सार्वजनिक रूप से सामने आए थे। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने नब्बे वर्ष से अधिक आयु के करुणानिधि से गत वर्ष दिसंबर में उनके आवास पर मुलाकात की थी।

गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी तमिल दैनिक दिना थांथी के 75 साल पूरे होने पर आयोजित एक समारोह में हिस्सा लेने के लिए चेन्नई गए थे। मोदी ने यहां पर मीडिया से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा रखने एवं विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने को कहा। प्रधानमंत्री ने कहा, “संपादकीय स्वतंत्रता का उपयोग बुद्धिमत्तापूर्वक जनहित में किया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि लेखन एवं निर्णय करने की स्वतंत्रता में ‘तथ्यात्मक गलती’ होने की आजादी शामिल नहीं होना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि आज अखबार हमें केवल खबरें ही नहीं देते बल्कि वे हमारी सोच को बदल भी सकते हैं। मीडिया का मतलब है कि समाज में बदलाव लाने का एक साधन। इसलिए हम लोग मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहते हैं।

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