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‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने ललित मोदी प्रकरण का नहीं किया जिक्र, विपक्ष ने साधा निशाना

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में देश के 100 जिलों विशेष तौर पर हरियाणा में घटते लिंगानुपात पर आज चिंता व्यक्त की और लड़कियों की सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया पर अभियान चलाने की वकालत की...

Author June 28, 2015 6:27 PM
आकाशवाणी पर ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीतिक मुद्दों को उठाने से परहेज किया। (PTI Photo)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने मासिक रेडियो संबोधन में कई सामाजिक मुद्दों पर बोले लेकिन ललित मोदी प्रकरण से उठे राजनीतिक तूफान पर चुप रहना पसंद किया जिस विषय पर कांग्रेस ने तीखे हमले किये हैं। ललित मोदी प्रकरण पर चुप रहने के लिए भाकपा और आप भी प्रधानमंत्री पर हमला कर रही है।

आकाशवाणी पर ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने राजनीतिक मुद्दों को उठाने से परहेज किया और उन लोगों को भी निराश किया जो उनसे ललित मोदी प्रकरण पर बोलने की उम्मीद लगाए थे और जिस मामले में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का नाम जुड़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने जिन मुद्दों पर चर्चा की उनमें देश के 100 जिलों विशेष तौर पर हरियाणा में घटते लिंगानुपात का मुद्दा शामिल है, साथ ही कन्याओं की सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया पर अभियान चलाने की वकालत की। उन्होंने सरकार की जन सुरक्षा योजनाओं से माताओं, बहनों को जोड़ने और उन्हें रक्षाबंधन पर इसका तोहफा देने की अपील की।

उन्होंने सरकार की तीन समाज कल्याण योजनाओं और तीन विकास योजनाओं का जिक्र किया जिनमें 2022 तक सभी को आवास की योजना शामिल है। प्रधानमंत्री के आज के संबोधन में 21 जून को अंतराष्ट्रीय योग दिवस का विशेष तौर पर जिक्र किया गया।

अपने 20 मिनट के संबोधन में प्रधानमंत्री ने बूंद बूंद पानी को बचाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधे लगाने की जरूरत पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘कुछ लोगों को लगता है कि मन की बात में मैं सरकार की बड़ी बड़ी योजनाओं की घोषणा करूं… जी नहीं, वो तो मैं दिन रात करता ही रहता हूं। आपसे तो मैं हल्की फुल्की, खट्टी मीठी बात करता हूं, बस मुझे इसी में आनंद आता है।’’

मन की बात कार्यक्रम के बाद कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने प्रधानमंत्री के ललित मोदी प्रकरण पर नहीं बोलने पर निराशा व्यक्त की। कांग्रेस के पी चिदंबरम, दिग्विजय सिंह और भाकपा के डी राजा और आप के आशीष खेतान ने भी इस पर निराशा व्यक्त की।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, ‘‘पूरे भारत में कोई भी मन की बात नहीं सुनना चाहता है, सभी लोग कार्यक्रम में जनता की बात सुनना चाहते हैं।’’

मोदी पर चुटकी लेते हुए आजाद ने कहा कि वह कार्यक्रम में सपनों के सौदागर की तरह बने रहे क्योंकि वह भारत और दुनिया में केवल सपने ही बेच रहे हैं। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह प्रधानमंत्री के हित में है कि वह भ्रष्टाचार में शामिल लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करें अन्यथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह उनका पीछा करेगी।’’

तमिलनाडु के पुदुकोट्टई में पी चिदंबरम ने मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘‘प्रधानमंत्री अब तक मनमोहन सिंह की चुप रहने के लिए आलोचना करते रहे हैं और अब वह खुद चुप हैं।’’

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री पूर्व आईपीएल प्रमुख की ईडी मामलों में मदद कर रहे हैं। सिंह ने कहा, ‘‘रविवार को वह मन की बात करते हैं, जब से ललित मोदी प्रकरण सामने आया है वह बुनियादी सवालों का उत्तर नहीं दे रहे हैं। मेरा आरोप यह है कि नरेंद्र मोदी, ललित मोदी की मदद कर रहे हैं। मेरा आरोप यह है कि उन्होंने ललित मोदी से वादा किया है कि वह ईडी मामलों में उन्हें बचायेंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘नरेन्द्र मोदी को इस मामले में बेदाग निकल कर आयें। वे (भाजपा) नैतिकता और जवाबदेही की बात करते हैं लेकिन जब भाजपा के इस पर अमल करने की बात आती है तो वे कहते हैं कि जो हम कह रहे हैं वह पूरी तरह सही है।’’

भाकपा के डी राजा ने नरेन््रद मोदी की आलोचना करते हुए कहा, ‘‘ मन की बात में प्रधानमंत्री ने कई मुद्दों पर बात की लेकिन ललित मोदी प्रकरण पर कुछ नहीं कहा। राजे के बारे में कुछ नहीं बोले। वह चुप रहे। वह चुप क्यों हैं? स्थिति और अस्पष्ट होती जा रही है, वह किसे बचा रहे हैं। क्या मोदी कुछ छुपाना चाह रहे हैं या किसी व्यक्ति को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। वह क्यों चुप हैं। यह एक मुद्दा है।’’

आप नेता आशीष खेतान ने कहा, ‘‘पूरे देश की केवल एक मन की बात है कि ललित मोदी प्रकरण, सुषमा स्वराज, वसुंधरा राजे पर प्रधानमंत्री क्या कहेंगे। और मन की बात नहीं हुई।’’

भाजपा प्रवक्ता सम्बित पात्रा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी ने बालिकाओं, लिंगानुपात, सामाजिक सुरक्षा, जल संरक्षण आदि के बारे में बात की। कांग्रेस की हताशा को दूर करने के अलावा भी कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।

प्रधानमंत्री ने आकाशवाणी पर ‘मन की बात’ कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा, ‘‘ मैं पिछले कुछ दिनों की घटनाओं को और नजरिये से देखता हूं। काम करती सरकार, दौड़ती सरकार… एक बार लक्ष्य तय हो तो कैसे परिणाम ला सकती है.. से पिछले दिनों हमने देखा है। और जब चारों तरफ निराशा थी, ये हम न भूलें, एक साल पहले चारों तरफ एक ही स्वर सुनाई देता था, कि कुछ नहीं होता, कुछ नहीं होता, कुछ नहीं होता।’’

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने इस योजना को पेश किया लेकिन जब व्यक्ति और समाज इससे जुड़ जाते हैें तब उसकी ताकत कितनी बढ़ जाती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दिनों हरियाणा के बीबीपुर गांव के एक सरपंच सुनील जगलान ने एक बहुत मजेदार पहल करते हुए अपने गांव में ‘सेल्फी विद डॉटर’ स्पर्धा की और एक माहौल सा बन गया कि हर पिता अपनी बेटी के साथ सेल्फी निकाल कर उसे सोशल मीडिया पर डाले। ये कल्पना मुझे अच्छी लगी।

उन्होंने कहा कि हरियाणा में बालकों की तुलना में बालिकाओं की संख्या बहुत कम है। देश के करीब 100 जिले ऐसे हैं जिनमें भी ये हालत चिंताजनक है। हरियाणा में सबसे ज्यादा। लेकिन उसी हरियाणा के एक छोटे से गांव का सरपंच बेटी बचाओ अभियान को इस प्रकार का मोड़ दे, तब मन को बहुत आनंद होता है, और एक नयी आशा जागती है।

मोदी ने कहा, ‘‘मैं भी आपसे आग्रह करता हूं कि आप भी अपनी बेटी के साथ, सेल्फी विद डॉटर’ में सेल्फी निकाल कर जरूर पोस्ट कीजिये। उसके साथ बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ इस विचार को ताकत देने वाला कोई टैगलाइन लिख करके दोगे, उत्तम पंक्ति लिख कर के दोगे, तो मैं रिट्वीट करूंगा।’’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘गत 15 अगस्त को मैंने लाल किले पर से स्कूलों में शौचालय के लिए अपील की थी। और मैंने कहा था अगले 15 अगस्त तक हमने इस काम को पूरा करना है। जो काम 60 साल में नहीं हो पाया वो एक साल में करने का आह्वान करना बड़ा साहस तो था, करीब साढ़े चार लाख टॉयलेट बनाने थे, लेकिन आज मैं संतोष के साथ कह सकता हूं अभी तो 15 अगस्त आने की देरी है, लेकिन करीब- करीब स्कूलों में टॉयलेट बनाने के काम को लोगों ने पूरा किया।’’

उन्होंने कहा कि मतलब सरकार, लोग, सरकारी मुलाजिम, सब कोई देश के लिए काम करना चाहते हैं। निस्वार्थ भाव से सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय, अगर हम संकल्प ले करके चलते हैं, तो सरकार भी दौड़ती है, सरकार के लोग भी दौड़ते हैं और जनता-जनार्दन पलक-पावडे बिछा करके उनका स्वागत भी करती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अभी-अभी हमने तीन नई योजनाएं पेश कीं, खास करके शहरी जनों के लिए। हमारे देश में करीब 500 छोटे-मोटे शहर हैं। अमृत योजना के तहत हमने अपने शहरों को जीने योग्य बनाने के लिए बड़ा अभियान शूरू किया है। देश में दुनिया की बराबरी करके स्मार्ट सिटी होने चाहिए और गरीब से गरीब व्यक्ति को रहने के लिए घर होना चाहिए।

मोदी ने कहा कि और घर भी वो, जिसमें बिजली हो, पानी हो, शौचालय हो, नजदीक में पढ़ने के लिए स्कूल का प्रबंध हो। 2022 में जब भारत आजादी के 75 साल मनायेगा हम देशवासियों को घर देना चाहते हैं। इन तीन बातों को ले कर एक बड़ी योजना को आरम्भ किया है। मुझे विश्वास है कि शहरी जीवन में बदलाव लाने में ये सारी योजनाएं काम आयेंगी।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर देश दुनिया में आयोजित सफल कार्यक्रम का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 21 जून को ऐसा दृश्य देखा कि जहां जहां सूरज गया, जहां जहां सूरज की किरणें गई, दुनिया का ऐसा कोई भूभाग नहीं था, जहां योग द्वारा सूर्य का स्वागत नहीं हुआ हो। हम दावे के साथ कह सकते हैं कि योग अभ्यासुओं की दुनिया में सूरज कभी ढलता नहीं है। योग के माध्यम से दुनिया भर में भारत के प्रति जिज्ञासा बढ़ी है। हमें अपनी विरासत विश्व के साथ बांटनी चाहिए, परिचित कराना चाहिए। हम विश्व को उत्तम योग शिक्षक प्रदान कर सकते हैं और अपनी परंपराओं को एक प्लेटफॉर्म पर पेश कर सकते हैं।

मोदी ने कहा, ‘‘मैं देश के नौजवानों विशेष तौर पर आईटी पेशेवरों से आग्रह करता हूं कि आप सब नौजवान मिलजुल करके ऑनलाइन योग कार्यक्रम की कुछ योजना बनाइए। योग से संबंधित संस्थाओं का परिचय हो, योग गुरुओं की जानकारी हो, योग के संबंध में जानकारी हो। योग सीखना हो तो कहां सीख सकते हैं, योग टीचर चाहिये तो कहां से मिलेगा, एक डाटाबेस तैयार करना चाहिये और मैं मानता हूं, आप कर सकते हैं।’’

योग दिवस कार्यक्रम आयोजित करने में आयुष विभाग के कार्यो की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि अगर लक्ष्य सामने हो तो छोटी से छोटी इकाई भी कितना काम कर सकती है, यह उसका नमूना है।

उन्होंने कहा कि पिछले महीने हमने तीन जन सुरक्षा योजनाओं को लॉन्च लिया था, इतने कम समय में बहुत ही सकारात्मक परिणाम मिला है। भारत में जन सुरक्षा की दृष्टि से बहुत कम काम हुआ है लेकिन इन तीन योजनाओं के कारण हम इस दिशा में आगे बढ़े हैं। इतने कम समय में 10 करोड़ से भी ज्यादा लोग इससे जुड़ गए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अगस्त महीने में रक्षाबंधन त्योहार आता है। हम सभी देशवासी रक्षाबंधन के त्योहार के पहले एक जबरदस्त जन आन्दोलन खड़ा करें और हमारे देश की माताओं-बहनों को जन सुरक्षा योजना का लाभ सुलभ कराने में सहायक बने।

उन्होंने कहा कि हमारे घर में खाना पकाने वाली कोई बहन हो या बर्तन साफ करने वाली बहन हो या हमारे खेत में मजदूरी करने वाली कोई बहन हो या हमारे परिवार में अपनी बहनें हों। हम रक्षाबंधन के पवित्र त्योहार को ध्यान में रखते हुए 12 रुपए वाली या 330 रुपए वाली जन सुरक्षा योजनाएं जीवन भर के लिए अपनी बहनों को गिफ्ट दे सकते हैं। रक्षाबंधन की भाई की तरफ से बहन को एक बहुत बड़ी गिफ्ट हो सकती हैं। हम ऐसा संकल्प लें।

प्रधानमंत्री ने नागपुर के योगेश दांडेकर, मैसूर के हर्षवर्धन, प्रवीण नाडकर्णी जी, दिव्यांशु गुप्ता के सुझावों का जिक्र करते हुए कहा कि इस बार मॉनसून के लिए मुझसे कुछ कहने का सुझाव बहुत लोगों ने भेजा है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से सूरज की किरणे जीवन देती हैं, वैसे ही वर्षा हमारे जीवन को ताकत देती है। बूंद बूंद पानी का बहुत मूल्य होता है। हमें एक नागरिक के नाते, समाज के नाते, बूंद बूूंद पानी बचाने का स्वभाव बनाना ही पडेगा। गांव का पानी गांव में रहे, शहर का पानी शहर में रहे, ये हमारा संकल्प होना चाहिए, पानी रोकने के लिए प्रयास करना चाहिए। और वर्षा का पानी रूकता है और अगर जमीन में वापिस जाता है और रीचार्ज होता है, तो सालभर की समस्यार्आं का समाधान हो जाता है।

वर्षा जल के संरक्षण के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने पोरबंदर में महात्मा गांधी के घर का जिक्र किया जहां ऐसी व्यवस्था थी। उन्होंने कहा कि हम भी तो कर सकते हैं। और ये जन आन्दोलन बनना चाहिए, गांव-गांव ये व्यवस्था होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हरियाली हमारी आंखों को कितनी भाती है। इस वर्षा के मौसम में वृक्षारोपण, पेड़ लगाने का अभियान सामाजिक संगठनों के द्वारा, युवकों के द्वारा बहुत बड़ी मात्रा में होना चाहिए। और मैं तो एक सुझाव देता हूं कि पौधे के बगल में एक पुराना मिट्टी का घड़ा भी लगा दीजिये और उसमे पानी भर दीजिये। किसानों को भी कहता रहता हूं कि आप अपने खेत के किनारे पर बाड़ लगाने के बजाय पौधे लगाइये। वो आपकी सम्पति बन जाएंगे।

मोदी ने कहा कि बारिश बहुत पसंद आती है लेकिन साथ-साथ कभी-कभी बारिश के दौरान ही सबसे ज्यादा बीमारी आती है डॉक्टरों को फुरसत तक नहीं मिलती, इतने पेशंट आते हैं। वातावरण में नमी बढ़ जाने के कारण बेक्टेरिया पनपने लगते हैं और इसके लिए साफ -सफाई बहुत महत्वपूर्ण बन जाती है, शुद्ध पानी पीने का आग्रह आवश्यक रहता है। हम जितनी केयर करेंगे बीमारी हमसे दूर रहेगी। पानी तो चाहिये, वर्षा भी चाहिये लेकिन बीमारी से बचना भी चाहिये।

प्रधानमंत्री नेकइंक्रेडिबल इंडिया हैशटैग पर छुट्टियां बिताने विभिन्न स्थानों पर गए लोगों द्वारा फोटो पोस्ट करने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हम इसे जारी रखेंगे और इसे देश, दुनिया और नई पीढ़ी देखेगी।

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