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‘राहुल गांधी मंदिर और नरेंद्र मोदी मस्जिद में… देश को समझ सको तो जानो’

पीएम मोदी जिस तरह से मस्जिद के दौरे पर गए हैं और वहां उन्होंने दाऊदी बोहरा समुदाय की तारीफ की है, उसे भाजपा की सॉफ्ट सेक्यूलरिज्म इमेज से जोड़कर देखा जा रहा है।

2019 लोकसभा चुनाव के लिए रणनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। (file pic)

शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंदौर की सैफी मस्जिद में दाऊदी बोहरा समुदाय के एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुए। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी हाल ही में कैलाश मानसरोवर की यात्रा कर लौटे हैं। साथ ही राहुल गांधी बीते कुछ दिनों में मंदिरों के कई बार चक्कर लगाकर चुके हैं। अब इन बातों को राजनैतिक मतलब निकाले जाएं तो साफ पता चलता है कि चुनाव नजदीक हैं और दोनों ही नेता अपने-अपने तरीके से वोटरों को लुभाने का प्रयास कर रहे हैं। हाल के समय में जिस तरह से भारतीय राजनीति में धर्म का प्रभाव बढ़ा है, उसे देखते हुए इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि अभी नेताओं द्वारा मंदिर-मस्जिदों के दौरे जारी रहेंगे। पीएम मोदी जिस तरह से मस्जिद के दौरे पर गए हैं और वहां उन्होंने दाऊदी बोहरा समुदाय की तारीफ की है, उसे भाजपा की सॉफ्ट सेक्यूलरिज्म इमेज से जोड़कर देखा जा रहा है। उसी तरह कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा मंदिरों में जाना कांग्रेस की सॉफ्ट हिंदुत्व की छवि से जोड़कर देखा जा रहा है।

2019 लोकसभा चुनाव भले ही अभी कुछ महीने दूर हो, लेकिन चुनावी बिसात बिछनी बाकायदा शुरु हो चुकी है। भाजपा की बात करें तो भाजपा साल 2014 में प्रचंड बहुमत से सत्ता में आए थी, लेकिन आगामी लोकसभा चुनावों में उसके लिए सत्ता की राह इतनी आसान नहीं होने वाली है। विपक्षी पार्टियां भाजपा के खिलाफ महागठबंधन कर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। हालांकि अभी तक महागठबंधन सिर्फ कागजों पर ही दिखाई दे रहा है और जमीनी हकीकत बनने के लिए अभी राजनैतिक पार्टियों को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। लेकिन कुछ समय पहले बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में हुए उप-चुनावों में जिस तरह से भाजपा को मुंह की खानी पड़ी है, उसके बाद आगामी लोकसभा चुनाव में यकीनन भाजपा को कड़ी टक्कर मिल सकती है।

दूसरी तरफ कांग्रेस अभी भी भाजपा के मुकाबले थोड़ी कमजोर नजर आ रही है। हालांकि राहुल गांधी पहले के मुकाबले काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं। उनकी इस सक्रियता का असर दिखा भी है और एक वक्त हाशिए पर जाती दिखाई दे रही कांग्रेस फिर से संजीवनी पाती दिखाई दे रही है। इस साल के अंत में राजस्थान, कांग्रेस और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों से साफ हो जाएगा कि 2019 में कांग्रेस भाजपा को चुनौती पेश कर पाएगी या नहीं। अब कांग्रेस राफेल डील, पेट्रोल डीजल के बढ़ते दाम और हालिया विजय माल्या के मुद्दे पर भाजपा को घेरने की कोशिश कर रही है।

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