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प्रधानमंत्री ने सैनिकों संग मनाई दिवाली, तीन युद्ध स्मारकों पर गए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार दूसरे साल सैनिकों के साथ दीपावली मनाई और कहा कि दुनिया इनके पराक्रम और चरित्र के कारण भारत को सम्मान की नजर से देखती है.

Author अमृतसर/फिरोजपुर | November 11, 2015 8:34 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को अमृतसर में खासा स्थित डोगराई युद्ध स्मारक गए और पुष्पांजलि अर्पित की। (पीटीआई फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार दूसरे साल सैनिकों के साथ दिवाली मनाई और 1965 के भारत-पाक युद्ध से जुड़े सैन्य प्रतिष्ठानों का दौरा किया, जहां उन्होंने उनके पराक्रम एवं चरित्र की प्रशंसा की। साथ ही, पूर्व सैनिकों के लिए ‘वन रैंक वन पेंशन’ को ‘त्रुटि रहित’ ढंग से लागू करने का वादा किया। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब ‘वन रैंक वन पेंशन’ के मुद्दे पर कई पूर्व सैनिक प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पहला मौका है जब सरकार ने इस योजना को लागू करने के फैसले की अधिसूचना जारी करने के साथ इसकी कमियों को दूर करने के लिए एक आयोग का भी गठन किया है। उन्होंने कहा, ‘यह एक ‘फूल प्रूफ’ व्यवस्था है।’

प्रधानमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को नये सिरे से जोर देने की भी हिमायत की। मोदी ने बुधवार को भारत-पाक सीमा से लगे तीन सैन्य प्रतिष्ठानों का औचक दौरा किया। इनमें खासा स्थित डोगराई युद्ध स्मारक, वल्तोहा के पास असल उत्तर स्मारक और फिरोजपुर जिले में बरकी युद्ध स्मारक शमिल हैं। उन्होंने सैनिकों से बातचीत भी की। वह अमृतसर में खासा स्थित डोगराई युद्ध स्मारक गए और पुष्पांजलि अर्पित की। यह स्थान सबसे कठिन युद्ध स्थल के रूप में जाना जाता है जहां भारतीय सैनिकों ने 22 सितंबर 1965 को जीत प्राप्त की थी।

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उन्होंने पंजाब में अमृतसर-खेम करन रोड पर वलतोहा के पास असल उत्तर स्मारक और परमवीर चक्र विजेता कंपनी क्वार्टरमास्टर हवलदार अब्दुल हमीद की समाधि पर भी पुष्पचक्र अर्पित किया। मोदी ने इस बात का जिक्र किया कि 1965 में असल उत्तर लड़ाई के दौरान हमीद ने अकेले ही दुश्मन के तीन टैंक नष्ट कर दिए और उनके आक्रमण को रोकने में मदद की जबकि वह बुरी तरह से घायल थे।

मोदी ने बाद में ट्वीट किया, ‘सीक्यूएमएच अब्दुल हमीद को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उन्हें उनकी वीरता के लिए मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।’ असल उत्तर मेमोरियल असल उत्तर लड़ाई का प्रतीक है जो 1965 में भारतीय सरजमीं पर लड़ी गई टैंकों की सबसे बड़ी लड़ाई में एक थी।

modi प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब के असल उत्तर में बने सीक्यूएमएच अब्दुल हमीद के स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। असल उत्तर मेमोरियल असल उत्तर लड़ाई का प्रतीक है जो 1965 में भारतीय सरजमीं पर लड़ी गई टैंकों की सबसे बड़ी लड़ाई में एक थी। (पीटीआई फोटो)

 

खासा में सैनिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं आपके साथ दिवाली मनाने आया हूं। मैं इस अवसर को पाकर खुश हूं।’ सैनिकों की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आपके पराक्रम, समर्पण और सपनों के कारण पूरी दुनिया भारत को सम्मान की नजर से देखती है। यह केवल वर्दी के कारण नहीं बल्कि सशस्त्र बलों के चरित्र के कारण है।’

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया में भारत का सिर गर्व से ऊंचा रहता है क्योंकि सशस्त्र बलों के नेताओं की पीढ़ियों ने बलों को संजोया संवारा है। मोदी ने कहा, ‘‘मैं उन लोगों को बधाई देता हूं जिन्होंने इन वर्षो में सशस्त्र बलों को नेतृत्व प्रदान किया।’’

सशस्त्र बलों के चरित्र की सराहना करने का प्रधानमंत्री का बयान ऐसे समय में आया है जब पूर्व सैनिकों का एक वर्ग आरोप लगा रहा है कि ‘वन रैंक, वन पेंशन’ को लागू करते हुए उनकी सभी मांगें नहीं मानी गई हंै। इसके विरोध में कई पूर्व सैनिकों ने अपने मेडल भी लौटाये हैं। उन्होंने बाद में ट्वीट किया, ‘मैंने सैनिकों के साथ समय बिताया और उनके साथ काफी अच्छी बातचीत हुई।’

प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी लगातार दूसरी बार सैनिकों के साथ दीपावली मना रहे हैं। पिछले वर्ष उन्होंने दुनिया के सबसे ऊंचे रणक्षेत्र सियाचिन में सैनिकों के साथ दीपावली मनायी थी। वह सैनिकों से खुलकर मिले जुले, हाथ मिलाए और उनके साथ तस्वीरें खिंचवाई। उन्होंने कहा कि अपने परिवार के साथ दीपावली मनाने की परंपरा रही है और वह उन्हें अपने परिवार के तरह मानते हैं। वह उनके साथ यह प्रकाश पर्व मनाने के लिए यहां आए हैं। मोदी ने कहा, ‘‘मैं आपके साथ दीपावली मनाकर खुशी महसूस कर रहा हूं।’’
अमृतसर के बाहरी इलाके में खासा स्थित डोगरई युद्ध स्मारक पर मोदी ने पुष्पचक्र अर्पित किया। 22 सितंबर 1965 को भारतीय सैनिकों द्वारा फतह की गई यह सबसे मुश्किल लड़ाइयों में एक स्थान था। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिकों ने जो लहू बहाया था उसके चलते ही जीत संभव हो पाई थी।

बीएसएफ का खास परिसर अमृतसर-अटारी रोड पर स्थित है जो पाकिस्तान जाता है। यह भारत-पाक सीमा से 13 किलोमीटर पहले पड़ता है। उन्होंने खासा में सैनिकों से कहा, ‘‘मैं आपको और आपके परिवारों को दिवाली की शुभकामनाएं देता हूं।’’

modi-diwali प्रधानमंत्री मोदी फिरोजपुर स्थित बरकी युद्ध स्मारक भी गए और शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की। इसे 1965 के भारत पाक युद्ध में शहीद हुए ‘7 इंफेंट्री डिवीजन’ के सैनिकों की याद में 1969 में बनाया गया था। (पीटीआई फोटो)

मोदी यहां से करीब 98 किलोमीटर दूर बरकी स्मारक भी गए, जिसे 1965 के भारत पाक युद्ध में शहीद हुए ‘7 इंफेंट्री डिवीजन’ के सैनिकों की याद में 1969 में बनाया गया था। उन्होंने फिरोजपुर में सैनिकों के नाम अपने संबोधन में कहा, ‘‘हाल ही में, रक्षा क्षेत्र में देश ने महत्वपूर्ण फैसले किए हैं। यह भारत की कोशिश है कि रक्षा विनिर्माण यहां हो रहा है।’’

उन्होंने सिलसिलेवार रूप से किए गए ट्वीट में कहा कि 22 सितंबर 1965 का युद्ध हमारे बलों द्वारा लड़ी गई सबसे कठिन लड़ाइयों में एक थी। डोगराई की लड़ाई हमारे सैनिकों ने लड़ी और जीती-डोगराई की लड़ाई सीओ 3 जाट के लेफ्टिनेंट डेसमंड हायदे के प्रेरणादायी नेतृत्व के तहत जीती गई। इसने हमारी सेना के इतिहास में एक गौरवपूर्ण अध्याय जोड़ दिया।

इससे पहले दिन में उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘दिवाली के इस पावन अवसर पर मैं अपने जवानों के साथ वक्त बिताने के लिए सीमावर्ती इलाकों की यात्रा पर हूं।’’

इस बीच, स्थानीय पुलिस प्रधानमंत्री के औचक दौरे से चकित रह गई। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘‘प्रधानमंत्री की यात्रा के बारे में कोई सूचना नहीं थी।’’

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