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दुनिया ने देखी देश की ताकत, दस राष्ट्राध्यक्षों की मौजूदगी में गणतंत्र दिवस पर सेना के शौर्य व साहस का अद्भुत प्रदर्शन

देश ने अपने दक्षिण पूर्वी एशिया के पड़ोसियों के साथ शुक्रवार को हर्षोल्लास के साथ धूमधाम से 69वां गणतंत्र दिवस मनाया।

Author नई दिल्ली | January 27, 2018 1:59 AM
महिला सैनिकों ने इस मौके पर एक से बढ़कर एक करतब दिखाए।

देश ने अपने दक्षिण पूर्वी एशिया के पड़ोसियों के साथ शुक्रवार को हर्षोल्लास के साथ धूमधाम से 69वां गणतंत्र दिवस मनाया। पहली बार दस आसियान देशों के राष्ट्राध्यक्षों व हजारों देशवासियों की मौजूदगी में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश के आन बान शान का प्रतीक तिरंगा फहराया। इसके साथ ही राजपथ पर देश के शौर्य व समृद्धि का अद्भुत प्रदर्शन किया गया। उभरती नारी शक्ति, हर मोर्चे पर उनकी दक्षता व आसियान देशों के साथ राजनीतिक, सामाजिक व सांस्कृतिक संबंधों को प्रमुखता से दिखाती झांकियों ने जम कर तालियां बटोरी। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच समारोह शांतिपूर्ण ढंग से निपट जाने पर सुरक्षा एजंसियों ने राहत की सांस ली।

राष्ट्रपति कोविंद ने राजपथ पर सुबह ठीक दस बजे तिरंगा फहराया व परेड की सलामी ली। तिरंगे को 21 तोपों की सलामी दी गई। हालांकि धुंध होने की वजह से तिरंगे पर हेलिकॉप्टर से होने वाली पुष्प वर्षा नहीं हो सकी। इसके बाद राष्ट्रपति ने वायुसेना के गरुड़ कमांडो कार्पोरल ज्योति प्रकाश निराला को देश की सुरक्षा में दिए उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए शांतिकाल का सर्वोच्च सैन्य सम्मान अशोक चक्र (मरणोपरांत) प्रदान किया। कार्पोरल निराला ने अपनी जांबाजी से जम्मू कश्मीर के बांदीपोरा में दो आतंकवादियों को मार गिराया व इसमें अपने प्राणों की बलिदान तक करने से नहीं हिचके। जब सलामी मंच पर उनकी पत्नी सुषमानंद व उनकी मां मालती देवी को यह पुरस्कार सौंपा गया उस वक्त राष्ट्रपति सहित हजारों देशवासियों की आंखें गर्व मिश्रित दुख से छलक पड़ीं। कार्पोरल निराला भारतीय वायु सेना के कमांडो दस्ते गरुड़ के अंग थे। पिछले साल 18 नवंबर को बांदीपोरा के चंदरगेर गांव में घात लगाकर किए गए आतंकी हमले में वे घायल हो गए थे।

लेकिन इसके बावजूद उन्होंने जवाबी गोलीबारी करते हुए दो आतंकवादियों को ढेर कर दिया। इसके पहले प्रधानमंत्री ने अमर जवान ज्योति पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित तमाम गणमान्य जनों की मौजूदगी में इस साल की परेड में कई नए हथियारों का प्रदर्शन किया गया। अदम्य सैन्य ताकत का परिचय देते हुए तमाम मिसाइलों, राडारों व तकनीकी उपकरणों, तुरंता पुल व टैंकों का काफिला जब राजपथ से गुजरा तो लोग रोमांचित हो उठे। मेक इन इंडिया कार्यक्रम को सेना की दक्षता बढ़ाने में दिए योगदान को भी परेड में जगह दी गई। तमाम सैन्य टुकड़ियों व उंटों के कदमताल ने भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
परेड में आकाशवाणी की भी झांकी थी जिसमें आज से नहीं बल्कि आजादी की लड़ाई से लेकर आज तक रेडियो की अहमियत को दिखाया गया। झांकी में आजादी के समय देश में भड़के सांप्रदायिक दंगों के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के रेडियो पर प्रसारित संदेश को भी दिखाया गया। इस झांकी में खेती, मनोरंजन शिक्षा सहित तमाम क्षेत्रों में रेडियो के उपयोग क ो दिखाने के साथ ही आकाशवाणी में सात दशक में हुए बदलावों और इसके आधुनिक रूप की झलक भी पेश की गई।

साथ ही पहली बार आयकर विभाग की भी झांकी भी दिखाई गई जिसमें आधार कार्ड को भी जगह दी गई थी। इसका विषय नोटबंदी के बाद शुरू किया गया कालाधन-रोधी विशेष अभियान था। झांकी का विषय स्वच्छ धन अभियान था। इसमें अभियान को सफल बनाने में लोगों के विशेष सहयोग को दिखाया गया। आॅनलाइन शापिंग से लेकर कर जमा करने का संदेश दिया गया। इस बार परेड में पहली बार कृषि क्षेत्र में शोध करने वाले सरकारी संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आइसीएआर) की झांकी शामिल की गई। मिश्रित खेती नाम से इस झांकी का मूल विषय एकीकृत खेती है जिसका लक्ष्य पर्यावरण के अनुकूल खेती व इसके जरिए किसानों की आय को दोगुना करना व लोगों का पोषण बढ़ाना है।
इसके अलावा भारत के विदेश मंत्रालय की भी दो झांकियां पेश की गर्इं। इन झांकियों में भारत के आसियान देशों के साथ संबंधों को दिखाया गया। स्कूली बच्चों ने भी रंगारंग कार्यक्रम में आसियान देशों की पारंपरिक वेशभूषा में मनोहारी प्रस्तुति दी जिससे दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। जनजातीय कार्य मंत्रालय की ओर से पेश की गई झांकी में पीपीपी माडल पर आदिवासियों की आर्थिक शक्ति बढ़ाने की बात कही गई व इनके वनोपज के उचित मूल्य को हक से मांगने का संदेश दिया गया। खेल मंत्रालय की झांकी में खेलों में भारत को उभरती शक्ति के तौर पर दिखाया गया।

इसके बाद राज्यों की झांकी पेश की गई। इसमें मध्य प्रदेश, मणिपुर, गुजरात, त्रिपुरा, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, केरल, असम, पंजाब व हिमाचल प्रदेश की झांकियां शामिल थी। गुजरात की झांकी में साबरमती आश्रम की गतिविधियों और दांडी मार्च पर निकल रहे गांधी जी के भित्तिचित्र को दर्शाया गया। जबकि हिमाचल की झांकी में बौद्ध मठ कीह गोंपा को जगह दी गई।  इनके अलावा अर्धसैन्य बलों की झांकियों में भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) की झांकी भी राजपथ से गुजरी जिसमें दुर्गम बर्फीली चोटियों पर देश की सुरक्षा में इस बल के अद्भुत योगदान को दिखाया गया। इसके बाद मंत्रालयों की झांकियां पेश की गर्इं।

परेड के अंत में वायुसेना के विमानों ने करतब दिखाए। इसमें सुखोई 30 एमकेआइ विमानों ने आसमान में त्रिशूल जैसी आकृति बनाकर तालिया बटोरीं। जबकि स्वदेशाी तेजस विमानों के अलावा पांच मिग विमानों ने अपनी प्रस्तुति से लोगों को मोहित किया। सुखोई विमानों के बीच सी 17 ग्लोबमास्टर ने भी उड़ान भरी। इसके अलावा हरक्यूलिस व जगुआर विमानों ने भी परेड में हिस्सा लिया। बहादुर बच्चों ने जम कर तालिया बटोरी व बाद में आसमान में छोड़े गए तिरंगे गुब्बारों को दर्शक दीर्घा में मौजूद बच्चे देर तक ललचाई आंखों से निहारते रहे।

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