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PM Modi- A Success Story Since 1987: वडनगर स्टेशन से भारतीय राजनीति के शिखर तक, कभी जंगल तो कभी पहाड़ों में यूं बीती जिंदगी, पीछे छूटे कई दिग्गज

PM Narendra Modi Birthday: संगठन और प्रचार में अपनी कुशलता से वे कई दिग्गजों की पसंद बन चुके थे। लेकिन राजनीतिक शिखर पर चढ़ने की शुरुआत 1987 में हुई। 3 फरवरी 1987 को उन्होंने बतौर संगठन सचिव गुजरात में भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

PM Narendra Modi Birthday: भारतीय राजनीति में सर्वकालिक सफल कहानियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बेहद खास स्थान है। एक चाय बेचने वाले किशोर से देश के राजनीतिक शिखर तक पहुंचने की उनकी कहानी भी अद्भुत है। संघर्ष, त्याग, समर्पण और शिद्दत की यह दास्तां हर किसी के लिए बेहतरीन प्रेरणास्रोत है। राजनीति में मोदी की एंट्री भले ही देर से हुई लेकिन जब हुई तो फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1987 में बीजेपी जॉइन करने के बाद से ही हर कदम पर उन्होंने उपलब्धियां अपने नाम कीं। जानिए कैसा रहा उनका सफर…

आपातकाल के बाद छाए मोदीः 1972 में मोदी आरएसएस का जॉइन कर चुके थे। 1975 में जब इंदिरा सरकार ने देश में आपातकाल लगाने का ऐलान किया था तब मोदी ‘गुजरात लोक संघर्ष समिति’ के महासचिव बने थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक से जुड़े रहकर उन्होंने कई कार्यक्रमों में सफल भागीदारी की। 3 जून 1978 को उन्हें संघ में विभाग प्रचारक बनाया गया और वडोदरा में काम करने की जिम्मेदारी दी गई। 1980 में उन्हें दक्षिण गुजरात और सूरत की भी जिम्मेदारी मिली।

1978 शुरुआती दिनों में संगठन का काम करते नरेंद्र मोदी (फोटो- @narendramodi.in)

1987 बना टर्निंग पॉइंटः अब तक संगठन और प्रचार में अपनी कुशलता से वे कई दिग्गजों की पसंद बन चुके थे। लेकिन राजनीतिक शिखर पर चढ़ने की शुरुआत 1987 में हुई। 3 फरवरी 1987 को उन्होंने बतौर संगठन सचिव गुजरात में भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। इसी साल बीजेपी ने अहमदाबाद निकाय चुनाव में जीत दर्ज की और इस जीत में मोदी के योगदान की खासी सराहना हुई।

संगठन कुशलता का लोहा मनवायाः 1990 में गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 67 सीटें मिली। यह बीजेपी के लिए बड़ी कामयाबी थी, इस जीत में मोदी के योगदान की खूब तारीफ हुई। 1990 में वो सोमनाथ-अयोध्या यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बने। सितंबर 1991 में उन्होंने सीनियर बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी की ‘एकता यात्रा’ में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।

Nyay Yatra Aur AMC election win अहमदाबाद निकाय चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद और लालकृष्ण आडवाणी की न्याय यात्रा में नरेंद्र मोदी (फोटो- narendramodi.in)

गुजरात से दिल्ली की ओर…: 1995 में मोदी गुजरात से निकलकर दिल्ली की तरफ बढ़े। अक्टूबर 1995 में उन्हें राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया। इसके साथ ही उन्हें हरियाणा समेत कई उत्तर भारतीय राज्यों का प्रभार सौंपा गया। 1998 में वे संगठन महासचिव बन गए।

लगातार चार बार बने मुख्यमंत्रीः 2001 को नरेंद्र मोदी वापस गुजरात लौटे और इस बार मुख्यमंत्री बनकर लौटे। इस साल 7 अक्टूबर को उन्होंने पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 2002 में बीजेपी ने मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और एकतरफा जीत दर्ज की। इसके बाद उनके नेतृत्व में 2007 और 2012 में भी बीजेपी ने गुजरात चुनाव जीते। लगातार चार बार नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद उन्होंने बीजेपी में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और जसवंत सिंह जैसे कई दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए दिल्ली की सियासत में झंडे गाड़ दिए।

…और चूम लिया भारतीय सियासत का शिखरः जून 2013 में मोदी को बीजेपी ने लोकसभा चुनाव 2014 के लिए कैंपेन कमेटी का प्रमुख बनाया और इसी साल नवंबर में उन्हें पार्टी के कुछ सीनियर नेताओं के विरोध के बावजूद बीजेपी की तरफ से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया। 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने अपने दम पर ही बहुमत हासिल कर लिया। इसके बाद एनडीए की सरकार बनी और नरेंद्र मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बन गए। 1984 के 30 साल बाद किसी एक पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला था। लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी एक बार फिर मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ी और इस बार पार्टी ने अकेले अपने दम पर 300 का आंकड़ा पार कर लिया। एनडीए की सरकार बनी और मोदी दूसरी बार प्रधानमंत्री बने।

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कभी जंगलों तो कभी पहाड़ों पर बिताई जिंदगीः दावे के मुताबिक नरेंद्र मोदी की जिंदगी में कई ऐसे लम्हे रहे हैं जो उनके लिए संघर्ष और दूसरों के लिए आकर्षण के केंद्र रहे हैं। बताया जाता है कि वे हर साल कुछ दिन निर्जन स्थानों पर बिताते थे, जहां वे पूरी तरह से प्रकृति के करीब होते थे। यह सिलसिला महत्वपूर्ण राजनीतिक जिम्मेदारियां संभालने तक जारी रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक नरेंद्र मोदी एक समय सबकुछ छोड़कर भारत यात्रा पर निकल गए थे। इस दौरान वे हिमालय, ऋषिकेश और रामकृष्ण मिशन भी गए, जहां उन्होंने जिंदगी का काफी वक्त गुजारा। वेबसाइट नरेंद्र मोदी डॉट इन के मुताबिक जब 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के लिए सैनिक ट्रेन से जा रहे थे, तब मोदी ने मेहसाणा स्टेशन पर उन्हें चाय पिलाई थी।

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