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तीन तलाक के बाद पीएम मोदी का एक और बड़ा ऐलान- 30 लाख से ज्‍यादा महिलाओं का पैसा बढ़ाया

पोषण अभियान के अंतर्गत आईसीडीएस-सीएएस जैसी तकनीकों के उपयोग कर बेहतर प्रदर्शन करने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को 250 से 500 रुपये प्रोत्साहन राशि देने का भी एलान किया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक पर मुस्लिम महिलाओं के पक्ष में बिल लोकसभा से पास कराने के बाद अब ऐसी करीब तीस लाख से ज्यादा महिला कर्मियों का पैसा बढ़ाया है जो देशभर में राष्ट्रीय पोषण और बाल संरक्षण के काम में जुटी हुई हैं। नरेंद्र मोदी ऐप के जरिए देशभर की आंगनवाड़ी सेविकाओं, सहायिकाओं, आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम से बातचीत करते हुए पीएम मोदी ने उनका मानदेय बढ़ाने का ऐलान किया। पीएम ने कहा कि केंद्र सरकार की तरफ से जिन आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को 3000 रुपये मानदेय मिलते हैं, उन्हें अब 4500 रुपये मिलेंगे। इनके अलावा जिन्हें 2250 रुपये मानदेय मिलता है उन्हें बढ़ाकर 3500 रुपये कर दिया गया। आंगनवाड़ी सहायिकाओं को 1500 रुपये के स्थान पर 2200 रुपये मानदेय प्रतिमाह मिलेंगे। बढ़ा हुआ मानदेय अगले महीने से देने का एलान किया गया है। बता दें कि देश में लगभग 10.8 लाख आंगनवाड़ी सेविका, 10.16 लाख सहायिका और करीब 9 लाख आशा कार्यकर्ता हैं जो बाल संरक्षण, पोषण और गर्भवती महिलाओं की देखरेख में लगे हुए हैं। माना जा रहा है कि तीन तलाक के बाद चुनावी साल में पीएम मोदी ने इन तीस लाख से ज्यादा महिला कर्मियों को सीधे लाभ पहुंचाकर उनका दिल जीतने की कोशिश की है।

पोषण अभियान के अंतर्गत आईसीडीएस-सीएएस जैसी तकनीकों के उपयोग कर बेहतर प्रदर्शन करने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को 250 से 500 रुपये प्रोत्साहन राशि देने का भी एलान किया गया है। आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय को भी दोगुना कर दिया गया है। इसके अलावा सभी आशा कार्यकर्ताओं और उनकी सहायिकाओं को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत कुल 4 लाख रुपए की मुफ्त बीमा सुरक्षा भी दी जाएगी। आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ‘अपने लाखों हाथ’ कहते हुए पीएम ने कहा कि सरकार का ध्यान पोषण और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने पर है।

आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के योगदान की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘स्वस्थ और सक्षम भारत के निर्माण में आप सभी की शक्ति पर मुझे, पूरे देश को पूरा भरोसा है। हमें मिलकर कुपोषण के खिलाफ, गंदगी के खिलाफ, मातृत्व की समस्याओं के खिलाफ सफलता हासिल करनी होगी।’’ उन्होंने कहा कि देश की हर मां पर बच्चों को मजबूत करने का जिम्मा है। पोषण यानी खानपान, टीकाकरण, स्वच्छता के बारे में ऐसा नहीं है कि पहले लोग इस बारे में जानते नहीं थे या पहले इसकी कोई योजना नहीं थी। उन्होंने कहा कि इन तमाम बातों में पहले बहुत अधिक सफलता नहीं मिली। बहुत कम संसाधनों वाले देश भी इस मामले में हम से आगे निकल गए हैं। मोदी ने साथ ही कहा, ‘‘मैं देश के उन हजारों-लाखों डॉक्टरों का भी आभार व्यक्त करना चाहूंगा, जो बिना कोई फीस लिए, गर्भवती महिलाओं की जांच कर रहे हैं।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि एनीमिया या खून की कमी का स्तर हर वर्ष सिर्फ एक प्रतिशत की दर से घट रही है और सरकार ने तय किया कि राष्ट्रीय पोषण अभियान के तहत इस गति को तीन गुना किया जाए। उन्होंने कहा, ‘‘एनीमिया मुक्त भारत के इस संकल्प को आप सभी पूरी ताकत से पूरा करेंगे। एनीमिया से मुक्ति का मतलब लाखों गर्भवती महिलाओं और बच्चों को जीवन दान है।’’ उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर एनीमिया एक बहुत बड़ी समस्या है। देश में काफी संख्या में लोग एनीमिया के शिकार हैं। ये बीमारी आयोडीन और आयरन जैसे तत्वों की कमी से होती है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में आयोडीन युक्त नमक का उपयोग बढ़ा है। मोदी ने कहा कि अब आप सभी कार्यकर्ताओं को आयोडीन और आयरन युक्त डबल फोर्टिफाइड नमक के इस्तेमाल के लिए लोगों को और जागरूक करना पड़ेगा ताकि एनीमिया जैसी बीमारियों को दूर किया जा सके।

उन्होंने कहा कि एनीमिया या खून की कमी हर वर्ष सिर्फ एक प्रतिशत की दर से घट रही है और सरकार ने तय किया कि राष्ट्रीय पोषण अभियान के तहत इस गति को तीन प्रतिशत किया जाए। उन्होंने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश की महिलाओं को इस बात की जानकारी है कि किस तरह इंसेफेलाइटिस की बीमारी का प्रभाव रहा। सरकार ने इससे निपटने के लिए कई मिशन शुरू किया है। जापानी इंसेफेलाइटिस समेत पांच नये टीके जोड़े गए हैं। मोदी ने बताया कि दो साल पहले प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व कार्यक्रम शुरू किया गया था। इसके तहत 1.5 करोड़ महिलाओं की जांच की गई है। गर्भवती महिलाओं के लिये प्रधानमंत्री मातृत्व बंदन योजना के तहत 5000 रूपये की सहायता दी जा रही है।

(एजेंसी इनपुट्स के साथ)

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