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राज्‍यों में हार से लिया सबक! लोकसभा चुनाव से पहले वोटर्स को लुभाने के लिए मोदी सरकार के 6 कदम

सरकार ने बीते 26 दिसंबर को ई-कॉमर्स सेक्टर को लेकर भी अहम फैसला लिया है। इसके तहत ई-कॉमर्स कंपनियों को उन फर्म्स के उत्पादों को बेचने से प्रतिबंधित कर दिया है जिसमें संबंधित कंपनी की हिस्सेदारी है। नया प्रावधान एक फरवरी से लागू होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (पीटीआई फाइल फोटो)

पिछले वर्ष राज्यों के विधानसभा चुनावों में झटका लगने के बाद और 2019 लोकसभा चुनाव को करीब देखते हुए मोदी सरकार ने किसानों और लघु उद्योगपतियों को साधने के लिए कुछ उपायों की घोषणा की है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इस हफ्ते बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक खर्च बढ़ने पर मार्च तक वित्तीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने में सरकार को मदद करने के रूप में 30,000 से 40,000 करोड़ रुपये अंतरिम लाभांश हस्तांतरित कर सकता है। पिछले वर्ष मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के हाथों चुनाव हारने के बाद अरबों डॉलर के कृषि-ऋण माफी के प्रस्तावों के अलावा मोदी सरकार ने ये कदम उठाए हैं।

लघु व्यापार को मदद: सरकार ने गुरुवार (10 जनवरी) को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसीटी) नियमों में बदलाव करने की घोषणा की जो अतिरिक्त 20 लाख छोटे व्यवसायों को छूट देगा। 40 लाख रुपये तक की सालाना बिक्री करने वाले व्यापारों को जीएसटी से छूट दी जाएगी। वर्तमान में यह सीमा 20 लाख की सालाना बिक्री करने वाले व्यापारों की है। यह बदलाव एक अप्रैल से प्रभावी होगा।

किसानों को मदद: किसानों को राहत पैकेज के लिए पीएम मोदी तीन विकल्पों पर विचार कर रहे हैं ताकि फसल की कम कीमतों के कारण नुकसान झेल रहे किसानों की मदद की जा सके। इन विकल्पों के अमल पर तकरीबन 3 लाख करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। इन विकल्पों में किसानों को प्रत्यक्ष भुगतान, न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमत पर फसल बेचने वाले किसानों को मुआवजा और ऋण माफी शामिल हैं।

नौकरी में आरक्षण: लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी की सरकार ने एक और चौंकाने वाला कदम उठाया है। सरकार ने आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10 फीसदी का आरक्षण देने का फैसला किया है। लोकसभा और राज्यसभा में इस बाबत पेश संशोधन विधेयक पारित भी हो चुका है।

प्याज किसानों को विशेष राहत: सरकार ने बीते 28 दिसंबर को प्याज का निर्यात करने वाले किसानों को मिलने वाले इंसेटिव को दोगुना कर दिया है। पहले किसानों को पांच फीसद तक का इंसेटिव दिया जाता था जिसे बढ़ाकर 10 फीसद कर दिया गया है। हालांकि इससे सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ा है।

ई-कॉमर्स नियम: सरकार ने बीते 26 दिसंबर को ई-कॉमर्स सेक्टर को लेकर भी अहम फैसला लिया है। इसके तहत ई-कॉमर्स कंपनियों को उन फर्म्स के उत्पादों को बेचने से प्रतिबंधित कर दिया है जिसमें संबंधित कंपनी की हिस्सेदारी है। नया प्रावधान एक फरवरी से लागू होगा। इससे अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियां प्रभावित होंगी। बता दें कि खुदरा और अन्य छोटे कारोबारियों की शिकायतों के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है।

सेल्स टैक्स में कटौती: मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले टैक्स के मोर्चे पर भी अहम फैसला लिया है। आम लोगों को राहत देते हुए पिछले 22 दिसंबर को रोजमर्रा के कई उत्पादों पर लगने वाले सेल्स टैक्स में कटौती की है। सरकार के इस फैसले से 20 से ज्यादा वस्तुएं सस्ती हो गई हैं। इससे मध्यवर्ग और कारोबारियों को राहत मिली है।

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