भारत पश्चिम एशिया में अस्थिरता के बीच सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। इस बीच खबर आ रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 मई को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का दौरा कर सकते हैं। UAE की भारत के साथ बड़ी स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप है और बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं। सूत्रों ने शनिवार को बताया कि UAE को प्रधानमंत्री के यूरोप दौरे में आखिरी समय में शामिल किया गया है। 28 फरवरी को पश्चिम एशिया युद्ध शुरू होने के बाद से UAE ईरानी मिसाइल हमलों का मुख्य टारगेट रहा है। ईरान, UAE पर अमेरिकी मिलिट्री बेस, सुविधाओं और लोगों को सुरक्षित जगह देने का आरोप लगाता है।

अचानक तय हुआ UAE का दौरा

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संकट के बीच (जिसने भारत समेत दुनिया के ज़्यादातर हिस्सों में एनर्जी सप्लाई पर असर डाला है) UAE ने घोषणा की कि वह सऊदी अरब के नेतृत्व वाले तेल उत्पादक एक्सपोर्टर्स के ग्रुप OPEC और OPEC प्लस से बाहर निकल रहा है। भारत यूएई और ईरान के बीच डिप्लोमैटिक मुश्किलों से जूझ रहा है, लेकिन उसने UAE पर हुए हमलों की बार-बार निंदा की है। UAE से पीएम मोदी यूरोप के लिए रवाना होंगे। पीएम मोदी का 15 से 17 मई नीदरलैंड दौरा, 17 मई को स्वीडन, 17 से 19 मई नॉर्वे और 19 से 20 मई को इटली का दौरा तय है। सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पश्चिम एशिया के हालात एक वजह है प्रधानमंत्री मोदी ने UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मिलने का फैसला किया है।

5 मई को पूर्वी अमीरात फुजैरा में ईरानी ड्रोन हमले के बाद लगी आग में UAE में तीन भारतीय नागरिकों के घायल होने के एक दिन बाद पीएम मोदी ने हमलों की कड़ी निंदा की थी। पीएम मोदी ने कहा था कि आम लोगों और इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना मंज़ूर नहीं है। विदेश मंत्रालय ने एक अलग बयान में इन दुश्मनी और आम लोगों के इंफ्रास्ट्रक्चर और बेगुनाह लोगों को निशाना बनाने को तुरंत रोकने की अपील की।

अजीत डोभाल कर चुके हैं UAE के राष्ट्रपति से मुलाकात

इससे पहले अप्रैल के आखिरी हफ्ते में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल UAE गए थे और अबू धाबी में राष्ट्रपति से मिले थे। यह उनके सऊदी अरब दौरे के एक हफ्ते बाद हुआ था। अजीत डोभाल का दौरा एक आउटरीच था, क्योंकि वे सिक्योरिटी और स्ट्रेटेजिक मामलों (खासकर काउंटर-टेररिज्म कोऑपरेशन) पर UAE सरकार के साथ समन्वय कर रहे हैं। इसने ही पीएम मोदी के दौरे की नींव भी रखी।

एनर्जी ट्रेड पर फोकस

पिछले दो महीनों में ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने की वजह से एनर्जी से भरपूर UAE के साथ ट्रेड में रुकावट आई है। सिर्फ़ 11 भारतीय जहाज़ ही स्ट्रेट से गुज़र पाए हैं। पीएम मोदी ने पिछले दो महीनों में UAE, सऊदी अरब और दूसरी खाड़ी देशों के नेताओं से बात की है। विदेश मंत्री एस जयशंकर भी इन देशों के विदेश मंत्रियों के संपर्क में हैं।

अप्रैल में जयशंकर यूएई के राष्ट्रपति से भी मिले थे। भारत-UAE स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप की मज़बूती पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा था कि मुश्किल क्षेत्रीय माहौल के बावजूद दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत मज़बूत और पारदर्शी बनी हुई है।

यूएई में लगभग 47 लाख भारतीय रहते हैं। UAE में बड़ी भारतीय कम्युनिटी द्वारा सालाना भेजा जाने वाला रेमिटेंस दुनिया में सबसे ज़्यादा है। भारतीय प्रवासी कम्युनिटी UAE में सबसे बड़ी एथनिक कम्युनिटी है, जो देश की आबादी का लगभग 35 परसेंट है।

भारत-यूएई ट्रेड की वैल्यू 1970 के दशक में USD 180 मिलियन सालाना थी, लेकिन 2023-24 में USD 84 बिलियन तक पहुंच गया।UAE, चीन और अमेरिका के बाद भारत का तीसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर बन गया है। अप्रैल 2000-सितंबर 2024 के समय में UAE से FDI इनफ्लो लगभग USD 22 बिलियन (कुल इनवर्ड FDI इनफ्लो का 3.1%) था, जिससे यह इन्वेस्टमेंट का सातवां सबसे बड़ा सोर्स बन गया। यूएई ने कुछ समय में भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में 75 बिलियन अमेरिकी डॉलर इन्वेस्ट करने का वादा किया है।

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पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। मंच पर बीजेपी के सबसे पुराने कार्यकर्ता माखनलाल सरकार को भी जगह मिली। पढ़ें पूरी खबर