प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 फरवरी को सर्वाइकल कैंसर फैलाने वाले ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (HPV) के खिलाफ पूरे देश में खास वैक्सीनेशन कैंपेन को राजस्थान के अजमेर से हरी झंडी दिखाएंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से सभी राज्यों को दिए गए निर्देशों के मुताबिक सभी 14 साल की लड़कियां और अगले 90 दिनों में 15 साल की होने वाली लड़कियां यह शॉट लगवाने के लिए एलिजिबल होंगी।
लड़कियों को वैक्सीन लगाने का फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि लगातार HPV इन्फेक्शन से ज्यादातर सर्वाइकल कैंसर होता है, जो भारतीय महिलाओं में कैंसर का दूसरा सबसे आम रूप है। इससे हर साल 1.25 लाख महिलाएं प्रभावित होती हैं और 75,000 लोगों की मौत हो जाती है।
वैक्सीनेशन पॉइंट कहां हैं?
ये वैक्सीन देशभर में सरकारी हेल्थ सेंटर और अस्पतालों में मौजूद लगभग 30,000 इम्यूनाइजेशन सेंटर के जरिए उपलब्ध कराई जाएंगी। ये वे सेंटर हैं जिनके पास कोल्ड चेन पॉइंट, शॉट देने के लिए ट्रेंड स्टाफ और किसी भी खराब रिएक्शन को मैनेज करने की सुविधाएं हैं। कैंपेन के पहले 90 दिनों तक इन सेंटर्स पर सभी दिन वैक्सीन उपलब्ध रहेगी। इस समय के बाद वैक्सीन उन्हीं सेंटर्स पर रेगुलर इम्यूनाइज़ेशन के दिनों में मिलेगी, जो आमतौर पर हफ़्ते में दो बार होता है।
नेशनल हेल्थ मिशन (राजस्थान) के डायरेक्टर डॉ. अमित यादव, ने कहा, “एक अनुमान के मुताबिक किसी राज्य की आबादी का 1% हिस्सा एलिजिबल एज ग्रुप में माना जाता है। इस कैलकुलेशन के आधार पर, सभी बड़े राज्यों को वैक्सीन की जरूरी डोज की आधी डोज पहले ही दी जा चुकी हैं।” पूरे राज्य में लगभग 1,000 वैक्सीनेशन पॉइंट हैं जहां शॉट दिए जाएंगे। इन सेंटर्स के स्टाफ को पहले ही बाएं हाथ पर 0.5 ml शॉट देने और किसी भी साइड इफ़ेक्ट को मैनेज करने की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। उन्होंने आगे कहा कि HPV वैक्सीन को स्टोर करने में कोई एक्स्ट्रा चुनौती नहीं थी क्योंकि उन्हें 2-8 डिग्री C टेम्परेचर रेंज में रखना होता है, जो सरकार के यूनिवर्सल इम्यूनाइज़ेशन प्रोग्राम के तहत ज़्यादातर दूसरी वैक्सीन के लिए आम सेटिंग है।
चलाई जा रही अवेयरनेस ड्राइव
डॉ. अमित यादव ने कहा कि लड़कियों को वैक्सीनेशन के लिए आगे आने के लिए बढ़ावा देने के लिए, एजुकेशन डिपार्टमेंट की मदद से स्कूलों के जरिए अवेयरनेस फैलाई गई है। जरूरी बात यह है कि हेल्थ मिनिस्ट्री ने शॉट देने से पहले माता-पिता या गार्जियन से मंज़ूरी लेना जरूरी कर दिया है। HPV वैक्सीनेशन के लिए ऑप्ट-इन मंज़ूरी की जरूरत होगी, न कि ऑप्ट-आउट तरीके की, जो बाकी सभी बचपन की वैक्सीन के लिए अपनाया जाता है। सरकार के रूटीन इम्यूनाइज़ेशन प्रोग्राम के तहत दी जाने वाली बाकी सभी बचपन की वैक्सीन के लिए, गार्जियन की मंज़ूरी मानी जाती है, जब तक कि वे कुछ और न कहें। 2017 में मीजल्स रूबेला कैच-अप और रूटीन इम्यूनाइज़ेशन शुरू करते समय भी यही तरीका अपनाया गया था।
लेकिन HPV वैक्सीनेशन के लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से राज्य को दी गई गाइडलाइंस के मुताबिक गार्जियन को U-win ऐप पर या इंटरनेट न होने पर हार्ड कॉपी पर अपनी मंज़ूरी देनी होगी। 90 दिन के इंटेंसिव कैंपेन के दौरान जिन लड़कियों को वैक्सीन लगेगी, उनके बाएं हाथ की तर्जनी उंगली पर निशान लगाया जाएगा।
एलिजिबिलिटी, कॉन्ट्राइंडिकेशन्स के लिए क्या गाइडलाइंस हैं?
कोई भी 14 साल की लड़की (अपनी जन्मतिथि के हिसाब से) शॉट लगवाने के लिए एलिजिबल होगी। हेल्थ मिनिस्ट्री की गाइडलाइंस के मुताबिक 90 दिन के कैंपेन पीरियड में 15 साल की होने वाली लड़कियां भी शॉट के लिए एलिजिबल होंगी। गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि जिन लड़कियों को कोई गंभीर बीमारी है, उन्हें ठीक होने तक शॉट नहीं लगवाना चाहिए। जिन लड़कियों को पिछले वैक्सीनेशन से एलर्जिक रिएक्शन हुआ है, या जिन्हें यीस्ट से एलर्जी है, उन्हें वैक्सीन नहीं लगवानी चाहिए। जो कोई भी टारगेट एज ग्रुप से बाहर है या प्रेग्नेंट है, उसे शॉट नहीं लगवाना चाहिए। और जिन लड़कियों ने पहले ही HPV वैक्सीन (Gardasil-4, Gardasil-9, Cervarix, या Cervavac) लगवा ली हैं, वे इस कैंपेन के तहत शॉट के लिए एलिजिबल नहीं होंगी। उनके वैक्सीनेशन स्टेटस को U-win प्लेटफॉर्म पर अपडेट किया जाएगा।
गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि वैक्सीनेशन सेंटर्स को यह पक्का करना चाहिए कि शॉट लगवाते समय लड़कियां खाली पेट न हों, साथ ही पेरेंट्स को सलाह दी गई है कि वे उन्हें वैक्सीनेशन सेंटर ले जाने से पहले नाश्ता दें। सेंटर्स को यह भी सलाह दी गई है कि वे साइट पर कुछ रिफ्रेशमेंट का इंतज़ाम करें ताकि जिस बच्चे ने घर पर नाश्ता नहीं किया हो, उसे भी शॉट लग सके।
इम्यूनाइजेशन के बाद क्या करना होगा?
इम्यूनाइजेशन के बाद बच्चों को यह पक्का करने के लिए सेंटर पर 30 मिनट तक इंतज़ार करना होगा कि वैक्सीन की वजह से उन्हें कोई साइड इफ़ेक्ट न हो। गाइडलाइंस में कहा गया है कि वे ऑब्ज़र्वेशन रूम में कुछ दिलचस्प एक्टिविटी का इंतज़ाम करें ताकि लड़कियों का ध्यान वैक्सीनेशन के बाद के दर्द और एंग्जायटी से हटे। सेंटर्स से भीड़ कम करने के लिए भी कहा गया है। लड़कियां सीधे आकर या सरकार के U-win वैक्सीनेशन मैनेजमेंट एप्लीकेशन पर अपने वैक्सीनेशन स्लॉट बुक कर सकती हैं।
HPV वैक्सीनेशन के बाद होने वाले आम रिएक्शन में इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द, लालिमा या सूजन, बुखार, सिरदर्द, थकान, जी मिचलाना, चक्कर आना या बेहोशी शामिल हैं। इनमें से आखिरी दो वैक्सीन के बजाय शॉट लगने या खाली पेट होने के डर से जुड़े होते हैं। इन सभी को पैरासिटामोल, लिक्विड देने, कपड़ों की परतें हटाने या इंजेक्शन वाली जगह पर ठंडा सेक करने जैसे आसान तरीकों से मैनेज किया जा सकता है। यह सब ज़्यादातर कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाता है।
फिर भी सेंटर्स को एनाफिलेक्सिस एक गंभीर एलर्जिक रिएक्शन जो सांस की नली को बंद कर सकता है और अगर तुरंत इलाज न किया जाए तो मौत भी हो सकती है और उसको मैनेज करने के लिए किट दी जाती हैं। वैक्सीनेशन सेंटर्स को उनके सबसे पास के 24*7 हेल्थ सेंटर से भी जोड़ा जाएगा ताकि जरूरत पड़ने पर मदद मिल सके। पढ़ें कैंसर के इन शुरुआती संकेतों को न करें नजरअंदाज
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सर्वाइकल कैंसर एक ऐसी जानलेवा बीमारी है जिससे हमारे देश में हर 7 मिनट में एक महिला की मौत होती है। हर साल 67,000 महिलाओं की मौत सर्वाइकल कैंसर से होती है। इस बीमारी से बचाव करना 100% तक मुमकिन है। पढ़ें पूरी खबर
