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‘बहुमुखी प्रतिभा के विश्वस्तरीय धनी हैं पीएम मोदी’, SC जज अरुण मिश्रा ने की तारीफ तो लोग बताने लगे भक्त, पुरानी टिप्पणी भी कर रहे शेयर

न्यायमूर्ति मिश्रा की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स ने उन्हें ट्रोल कर दिया और उन्हें भक्त बता दिया।

सुप्रीम कोर्ट के जज अरुण मिश्रा ने पीएम मोदी की तारीफ की है।

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसनीय दूरद्रष्टा और बहुमुखी प्रतिभा वाला ऐसा नेता बताया जिनकी सोच वैश्विक स्तर की है, लेकिन स्थानीय हितों को अनदेखा नहीं करते।

अप्रचलित हो चुके 1500 से ज्यादा कानूनों को खत्म करने के लिए मोदी और केंद्रीय विधि मंत्री रवि शंकर प्रसाद की तारीफ करते हुए न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय का जिम्मेदार और सबसे अनुकूल सदस्य है।

न्यायमूर्ति मिश्रा की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स ने उन्हें ट्रोल कर दिया और उन्हें भक्त बता दिया।एक यूजर ने तो उन्हें उनके पुराने बयान भी याद दिला दिए जिसमें कहा गया था कि देश रहने लायक नहीं है।

दरअसल, टेलीकॉम कंपनियों पर सरकार की मेहरबानी को लेकर  न्यायमूर्ति मिश्रा ने सरकार को फटकार लगाई थी। अरुण मिश्रा ने यहां तक कहा था कि देश में कानून नहीं बचा है, पैसे के दम पर हमारे आदेश रोके जा रहे हैं, कोर्ट को बंद कर दो, अब देश छोड़ना ही बेहतर है।

उच्चतम न्यायालय में वरिष्ठता में तीसरे स्थान पर आने वाले न्यायमूर्ति मिश्रा ने सम्मेलन के शुभारंभ के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया।
मिश्रा ने कहा, ‘‘गरिमापूर्ण मानव अस्तित्व हमारी अहम चिंता है। हम वैश्विक स्तर की सोच रखकर अपने यहां काम करने वाले बहुमुखी प्रतिभा के धनी नरेंद्र मोदी का उनके प्रेरक भाषण के लिए शुक्रिया अदा करते हैं। उनके संबोधन सम्मेलन में विचार-विमर्श की शुरूआत के साथ और सम्मेलन का एजेंडा तय करने में उत्प्रेरक भूमिका निभाऐंगे।’’

उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में सबसे बड़ा लोकतंत्र है और लोगों को हैरानी होती है कि यह लोकतंत्र कैसे इतनी कामयाबी से काम करता है।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना प्राप्त दूरद्रष्टा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत एक जिम्मेदार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का मित्रतापूर्ण व्यवहार रखने वाला सदस्य है। विकास की प्रक्रिया में पर्यावरण का संरक्षण सर्वोच्च है।

न्यायिक प्रणाली को मजबूत करने की जरूरत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘अब हम 21 वीं सदी में हैं। हम केवल वर्तमान ही नहीं भविष्य के वास्ते आधुनिक आधारभूत संरचनाओं के लिए भी देख रहे हैं।’’ इस सम्मेलन में 20 से ज्यादा देशों के न्यायाधीश शिरकत कर रहे हैं।

(भाषा इनपुट्स के साथ)

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