दिल्ली में आयोजित हो रही 18वीं BRICS समिट में शामिल होने के लिए 11 सदस्यों के नेता भारत पहुंच गए हैं। ब्रिक्स की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी देशों के नेताओं को संबोधित किया। उन्होंने इस दौरान यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में सुधार की बात भी कही।

शनिवार दोपहर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पहुंचे। शाम 5.45 बजे पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति की मुलाकात हो सकती है।

तीन मुख्य पहलुओं पर ध्यान देने की बात की

पीएम मोदी ने BRICS समिट में कहा, “इस रोडमैप को तैयार करते समय हमें तीन मुख्य पहलुओं पर ध्यान देना होगा- प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम बनाना। पहला प्रतिनिधित्व के बारे में मैं यह कहना चाहूंगा कि यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में सुधार को अब और टाला नहीं जा सकता। इस मामले पर बातचीत को एक निश्चित समय-सीमा और स्पष्ट नतीजों से जोड़ा जाना चाहिए। इसी तरह, वित्तीय संस्थानों में वोटिंग पावर, लीडरशिप की भूमिकाएं और पॉलिसी की प्राथमिकताएं आज की आर्थिक हकीकत के हिसाब से होनी चाहिए। जो देश ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ को आगे बढ़ाते हैं, उन्हें ग्लोबल इकोनॉमिक गवर्नेंस को आकार देने में भी उचित भूमिका निभानी चाहिए।”

दूसरा जवाबदेही को लेकर पीएम मोदी ने कहा, “वैश्विक संस्थानों में मानवता का विश्वास तभी बढ़ेगा जब इस प्रभावी समस्याओं का समाधान करने में सक्षम होगा। हमें कलेक्टिव रिस्पांस स्पीड, स्केल और लास्ट माइल स्टोन पर ध्यान देना होगा। समुद्री नाविकों का वैश्विक व्यापार में बहुत बड़ा योगदान है, लेकिन अक्सर मुश्किल समय में उन्हें सहारे की कमी महसूस होती है। मेरा प्रस्ताव है कि क्या है समुद्री नाविकों के लिए सीफेर्रस इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क बना सकते हैं। इसके माध्यम से संबंधित देश के मैरिटाइम अथॉरिटी और अभियानों को जोड़ा जाएगा। इससे डिस्ट्रेस अलर्ट, मेडिकल असिस्टेंट, परिवारों को सूचना और बचाव अभियान में सहयोग दिया जा सकता है।”

उन्होंने कहा, “तीसरी बात नियम बनाने के संबंध में मैं कहना चाहता हूं, भविष्य की ग्लोबल रूट तय करने में सामान भागीदारी सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। एआई, साइबर स्पेस, आउटर स्पेस, बायो-टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी भविष्य के अवसरों के साथ, वे भविष्य के नियम भी तय कर रहे हैं। हमें ग्लोबल साउथ को रूल टेकर से रूल सेपर बनने पर प्रयास करने होंगे। ब्रिक्स के माध्यम से युवा डिप्लोमैट और पॉलिसी मेकर्स को निगोशिएशन स्किल, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और लीगल एक्सपर्टिस प्रदान कर सकते हैं।”

वैश्विक संकटों का सामना करने में ग्लोबल साउथ आगे- पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “आज, ‘ग्लोबल साउथ’ वैश्विक संकटों का सामना करने में तो सबसे आगे है, लेकिन फैसले लेने में सबसे पीछे है। हमें ‘विशेषाधिकारों के पिरामिड’ को ‘साझेदारी के मंच’ में बदलना होगा-एक ऐसा मंच जहाँ हर देश की आवाज सुनी जाए, हर सदस्य की भागीदारी हो और हर कोशिश के केंद्र में मानवता का विकास हो। इसके लिए, मेरा प्रस्ताव है कि हम ग्लोबल शासन में सुधार के लिए मिलकर 10 प्रस्ताव तैयार करें, ताकि अगली समिट तक उन्हें BRICS सुधार रोडमैप का रूप दिया जा सके।”

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भारत 18वें BRICS समिट की मेजबानी कर रहा है, जिससे दुनिया के कुछ सबसे ताकतवर लीडर जियोपॉलिटिक्स, ट्रेड, टेक्नोलॉजी और ग्लोबल कोऑपरेशन पर चर्चा के लिए एक साथ आ रहे हैं। लेकिन हाई-लेवल डिप्लोमेसी के साथ-साथ, ध्यान से तैयार की गई मीडिया किट पत्रकारों को भारत की एक और करीबी झलक दिखा रही है। इसके खाने, लोकल प्रोड्यूस और पारंपरिक कारीगरी के जरिए लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें