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पांच लड़ाकू राफेल IAF की जरूरतें नहीं कर सकते पूरी? मोदी सरकार ने इमरजेंसी में की रक्षा डील, दो दशक की रक्षा खरीद पर भी उठ रहे सवाल

राफेल को लेकर अंतिम अनुबंध 2016 के अंत में किया गया था। यह मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता थी इसके बावजूद भी इतना समय लगना इस बात की ओर इशारा करता है कि भारत में रक्षा खरीद प्रक्रिया कितनी जटिल है।

Rafale, PM Modi, Indian Airforceएक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राफेल का सौदा मोदी सरकार ने इमरजेंसी में किया था।

हाल ही में 5 लड़ाकू विमान राफेल की पहले खेप देश के एयर फोर्स स्टेशन अंबाला पहुंची। इस दौरान देशभर में गर्व और उत्सव का माहौल था। जल्द ही इसे औपचारिक तौर पर भारतीय वायुसेना में शामिल भी कर लिया जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या पांच लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी हैं?

द प्रिंट में छपे एक लेख के मुताबिक राफेल सौदा वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव के मद्देनजर आपात स्थिति में किया जा रहा है। यह वायुसेना के लिए खरीद और प्लानिंग की खामियों को दर्शाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राफेल्स की खरीद में गर्व करने की कोई बात नहीं है। नई पीढ़ी के फाइटर जेट हासिल करने में देश को 19 साल का समय लग गया।राफेल से भारतीय वायुसेना की नई जेनरेशन के विमान की जरूरतें पूरी नहीं होंगी। पिछले प्रस्ताव के मुताबिक वायुसेना को 36 नहीं बल्कि 126 विमान मेक इन इंडिया के तहत मिलने थे।

पीएम मोदी के 2015 के फ्रांस दौरे के वक्त राफेल विमान खरीदने की बात हुई थी और महज पांच विमान मिलने में पांच साल का वक्त लग गया। राफेल को लेकर अंतिम अनुबंध 2016 के अंत में किया गया था। यह मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता थी इसके बावजूद भी इतना समय लगना इस बात की ओर इशारा करता है कि भारत में रक्षा खरीद प्रक्रिया कितनी जटिल है। इतना ही नहीं आपातकालीन खरीद के हिस्से के रूप में, सशस्त्र बल राइफलों, ड्रोन और विशेष गोला-बारूद के सोर्सिंग के लिए 100 से अधिक खरीद अनुबंधों पर काम कर रहे हैं।

पूर्व रक्षा सचिव जी मोहन कुमार ने द इकोनॉमिक टाइम्स में एक लेख में इस बात का भी जिक्र किया है कि सशस्त्र बलों के 15 साल के दीर्घकालिक एकीकृत परिप्रेक्ष्य योजनाएँ (LTIPP) में भी कुछ कागजी काम बाकी है।  ऐसी कई डील्स हैं जो अभी अधर में लटकी हुई हैं। मसलन,  भारतीय वायुसेना और  हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL)  के बीच 83 LCA-MK 1A विमान के अनुबंध के लिए देरी देखी जा रही है। दिसंबर 2017 में एचएएल को विमान के लिए एक अनुरोध प्रस्ताव जारी किया गया था, लेकिन एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाने बाकी हैं।

यहां तक ​​कि पनडुब्बियों के मामले में, खरीद की प्रक्रिया इतनी धीरे है कि परियोजना 75I श्रेणी की पनडुब्बी को लेकर एक औपचारिक निविदा जारी की जानी अभी बाकी है जबकि इस परियोजना को पहली बार 2007 में मंजूरी दी गई थी।

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