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मोदी के मन की बात- पाक है ना-पाक

भारतीय सेना में विश्वास जताते हुए मोदी ने कहा कि वह अपने पराक्रम से इस तरह के सभी षड्यंत्रों को विफल कर देगी।
Author नई दिल्ली | September 26, 2016 01:08 am
पीएम मोदी (file photo)

सेना बोलती नहीं, पराक्रम दिखाती है

उड़ी हमले को लेकर आक्रोश की तुलना 1965 के युद्ध के समय के आक्रोश से करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि इस आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को निश्चित तौर पर दंडित किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सेना बोलती नहीं, बल्कि पराक्रम दिखाने में विश्वास रखती है। कश्मीर के लोगों के लिए संदेश देते हुए मोदी ने कहा कि ‘शांति, एकता और सद्भाव’ के माध्यम से ही समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। उन्होंने भरोसा जताया कि सभी मुद्दों का हल बातचीत के जरिए किया जा सकता है।
अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में मोदी ने संबोधन की शुरुआत 18 सितंबर को हुए उड़ी हमले में शहीद 18 जवानों को श्रद्धांजलि देने के साथ की। उन्होंने कहा कि यह कायरतापूर्ण कृत्य पूरे देश को झकझोरने के लिए काफी था। इसको लेकर देश में शोक और आक्रोश दोनों है। प्रधानमंत्री ने कहा- यह क्षति सिर्फ उन परिवारों की नहीं है जिन्होंने अपने बेटे, भाई और पति खोए हैं। यह क्षति संपूर्ण देश की है। इसलिए आज मैं वही कहूंगा जो मैंने उस दिन (घटना के दिन) भी कहा था और आज फिर दोहराता हूं कि दोषियों को निश्चित रूप से दंडित किया जाएगा।

भारतीय सेना में विश्वास जताते हुए मोदी ने कहा कि वह अपने पराक्रम से इस तरह के सभी षड्यंत्रों को विफल कर देगी। ये (सैनिक) वे लोग हैं जो अदम्य साहस दिखाते हैं ताकि 125 करोड़ लोग शांतिपूर्ण ढंग से रह सकें। हमें अपनी सेना पर गर्व है। लोगों और नेताओं को बोलने के अवसर मिलते है और वे ऐसा करते भी हैं। पर सेना बोलती नहीं है। सेना अपना पराक्रम दिखाती है। प्रधानमंत्री ने 11वीं कक्षा के एक छात्र का संदेश पढ़ा जिसने उड़ी की घटना को लेकर आक्रोश प्रकट किया था और इसको लेकर कुछ करने की इच्छा जताई थी। इस छात्र ने काफी सोचने के बाद यह संकल्प लिया कि वह रोजाना तीन घंटे अतिरिक्त पढ़ाई करेगा ताकि देश के लिए योगदान दे सके। मोदी ने इस छात्र के रचनात्मक विचार की सराहना करते हुए कहा कि देश के लोगों में जो आक्रोश है, उसका बहुत महत्त्व है। यह देश के जागने का प्रतीक है। यह आक्रोश कुछ करने जैसा है। जब 1965 युद्ध (पाकिस्तान के साथ) शुरू हुआ था तब लाल बहादुर शास्त्री देश का नेतृत्व कर रहे थे। उस समय देश में इसी तरह की भावना और आक्रोश था। वह देशभक्ति का ज्वार था।

अपने 35 मिनट के संबोधन में प्रधानमंत्री ने कश्मीर के लोगों से भी विशेष तौर पर बात करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि कश्मीर के लोगों ने राष्ट्रविरोधी ताकतों को साफ तौर पर समझना शुरू कर दिया है। जैसे-जैसे वास्तविकता उनके सामने आ रही है, वैसे-वैसे उन्होंने ऐसी ताकतों से दूरी बनानी शुरू कर दी है और शांति के पथ पर चलना आरंभ कर दिया है। सभी मां-बाप की इच्छा है कि कश्मीर में स्कूल और कॉलेज सही ढंग से काम करना आरंभ कर दें और किसान चाहते हैं कि उनके उत्पाद देश के बाजारों में पहुंचे। मुझे पूरा भरोसा है कि हम बातचीत के माध्यम से सभी मुद्दों को हल कर लेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने हालिया परालंपिक का हवाला दिया और इसमें हिस्सा लेने वाले और पदक जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनको कई लोगों से संदेश मिले हैं जिनमें आग्रह किया गया है कि ‘मन की बात’ में परालंपिक के बारे में बात करें। इस परालंपिक और भाग लेने वाले हमारे खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने दिव्यांगों को लेकर दृष्टिकोण पूरी तरह बदल दिया। हाल ही में परालंपिक में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों से मुलाकात करने वाले मोदी ने पदक विजेता दीपा मलिक को उद्धृत किया जिन्होंने कहा था कि पदक जीतकर उन्होंने अपनी विकलांगता को पराजित किया है।

स्वच्छ भारत अभियान के बारे मोदी ने कहा कि इस अभियान ने गति पकड़ ली है और लोग स्वच्छता के बारे में जागरूक हो रहे हैं और इस दिशा में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में 2.5 करोड़ शौचालय बनाए गए हैं और 1.5 करोड़ शौचालय और बनाए जाएंगे। बहरहाल उन्होंने यह भी कहा कि खुले में शौच का चलन अब भी बरकरार है और इसे रोका जाना चाहिए। मोदी ने कारपोरेट जगत से अपील की कि वे इस दिशा में योगदान दें व इसको लेकर काम करने वाले युवाओं के प्रायोजक बनें।

मुसलमानों को वोट की मंडी नहीं, सशक्त बनाएं

धर्मनिरपेक्षता की परिभाषा को तोड़े मरोड़े जाने की बात कहते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को जनसंघ के विचारक दीनदयाल उपाध्याय का हवाला दिया और कहा कि मुसलिमों को ‘अपना’ माना चाहिए और उन्हें वोट बैंक की वस्तु के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। भाजपा की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार का मिशन ‘सबका साथ, सबका विकास’ कोई राजनीतिक नारा नहीं है बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का कल्याण सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता है। अपने भाषण में मोदी ने धर्मनिरपेक्षता, संतुलित व समावेशी विकास और चुनाव सुधारों की जरूरत के बारे विस्तार से चर्चा की और दीनदयाल उपाध्याय को उनकी जन्मशती पर उन्हें नमन किया। उन्होंने कहा कि इन दिनों (धर्मनिरपेक्षता की) इसकी परिभाषा को तोड़ मरोड़ कर पेश किया जाता है। यहां तक कि इन दिनों राष्ट्रवाद को भी कोसा जाता है।

दीनदयाल उपाध्याय के जीवन व योगदान का जिक्र करते हुए मोदी ने उनका हवाला देते हुए कहा कि मुसलमानों को न पुरस्कृत करें और न ही तिरस्कृत। उन्हें सशक्त बनाएं। वे न तो वोट बैंक की मंडी हैं और न ही घृणा की सामग्री। उन्हें अपना समझें।भाजपा की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक के दौरान मुख्य रूप से पार्टी का जोर केरल में अपना प्रभाव बढ़ाने पर रहा। प्रधानमंत्री ने जनसंघ के दिनों के बाद से पार्टी की यात्रा को याद किया और इस बात पर जोर दिया कि हमने विचारधारा के साथ कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि भाजपा अगर विचारधारा से समझौता करती तो काफी पहले सत्ता हासिल कर लेती। मोदी ने कहा कि कोई भी अछूत नहीं है और अगर कोई मनुष्य आहत होता है तो पूरे समाज को इसकी पीड़ा की अनुभूति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार देश के पूर्वी हिस्से का विकास करने के प्रयास में लगी है जो एकात्म मानववाद की विचारधारा से प्रेरित है। ऐसा इसलिए है क्योंकि देश के पश्चिमी हिस्से विकसित हैं जबकि पूर्वी भाग पिछड़ा है… ऐसे में भारत माता कैसे समृद्ध होगी।

गरीबों व समाज के वंचित वर्गों के उत्थान और विकास पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि सरकार सबका साथ, सबका विकास के प्रति प्रतिबद्ध है और समाज के अंतिम पायदान के लोगों को केंद्र की विकास योजनाओं के केंद्र में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की समस्याओं का एकमात्र समाधान विकास है। अगर समाज की खाई को पाट दिया जाए तो अंतिम पायदान के लोगों को विकास का लाभ मिल सकता है।

उन्होंने पार्टी नेताओं से अपने आचरण के जरिए उदाहरण पेश करने को कहा, साथ ही कहा कि आजादी के बाद से आम जनों में राजनीतिकों की छवि खराब हो रही है। मोदी ने कहा कि अपने आचरण के जरिये उदाहरण पेश करना ही दीनदयाल उपाध्याय को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों में अच्छे लोग हैं, पर भाजपा में ऐसे लोगों की संख्या ज्यादा है क्योंकि इनकी विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता है।

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