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कश्मीर मुद्दे पर ट्रंप के बयान को लेकर विदेश मंत्री ने दी सफाई, कहा- PM ने नहीं किया ऐसा कोई अनुरोध

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा ‘‘पाकिस्तान के साथ कोई भी बातचीत सीमा पार से जारी आतंकवाद बंद होने के बाद, लाहौर घोषणापत्र और शिमला समझौते के अंतर्गत ही होगी।’’ उन्होंने कहा ‘‘ हम अपना रूख फिर से दोहराते हैं कि पाकिस्तान के साथ सभी लंबित मुद्दों का समाधान द्विपक्षीय तरीके से ही किया जाएगा ।’’

Author नई दिल्ली | July 23, 2019 6:35 PM
विदेश मंत्री एस जयशंकर

कश्मीर मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान की प्रतिगूंज मंगलवार को संसद के दोनों सदनों में सुनाई दी और विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से सफाई देने की मांग की जबकि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ‘‘मध्यस्थता’’ की बात को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान के साथ कोई भी बातचीत सीमा पार से जारी आतंकवाद बंद होने के बाद हो पायेगी और यह लाहौर घोषणापत्र और शिमला समझौते के अंतर्गत ही होगी।
विपक्ष के हंगामे के कारण राज्यसभा में बैठक को एक बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में ट्रम्प ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दो हफ्ते पहले उनके साथ थे और उन्होंने कश्मीर मामले पर मध्यस्थता की पेशकश की थी और उन्हें (ट्रंप को) इसमें मध्यस्थता करने पर खुशी होगी। लोकसभा एवं राज्यसभा में विपक्ष द्वारा यह मुद्दा उठाये जाने पर विदेश मंत्री जयशंकर ने दोनों सदनों में बयान दिया। उन्होंने कहा, ‘‘हम सदन को पूरी तरह आश्वस्त करना चाहेंगे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया है।’’ उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति से इस तरह का कोई अनुरोध नहीं किया गया है।

विदेश मंत्री ने कहा ‘‘पाकिस्तान के साथ कोई भी बातचीत सीमा पार से जारी आतंकवाद बंद होने के बाद, लाहौर घोषणापत्र और शिमला समझौते के अंतर्गत ही होगी।’’ उन्होंने कहा ‘‘ हम अपना रूख फिर से दोहराते हैं कि पाकिस्तान के साथ सभी लंबित मुद्दों का समाधान द्विपक्षीय तरीके से ही किया जाएगा ।’’ उनके बयान से विपक्षी सदस्य संतुष्ट नहीं हुए और प्रधानमंत्री से सदन में आ कर स्पष्टीकरण देने की मांग करते हुए हंगामा करने लगे।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद की अगुवाई में विपक्षी दलों के नेताओं ने मंगलवार को संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा कि ट्रंप ने अपने कथित बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र किया है। ऐसे में मोदी को खुद संसद के दोनों सदनों में बयान दे कर स्थिति स्पष्ट करना चाहिये।
तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन, राजद के मनोज कुमार झा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के माजिद मेनन और आप के संजय सिंह सहित अन्य दलों के नेताओं ने संवाददाताओं से कहा कि ट्रंप ने अपने बयान में साफ तौर पर कहा है कि मोदी ने खुद उनसे कश्मीर मामले में मध्यस्थता करने की पहल की थी, इसलिये मोदी को स्वयं देश के समक्ष स्थिति को स्पष्ट करना चाहिये।

मेनन ने कहा, ‘‘यह बात हमारी समझ से परे है कि प्रधानमंत्री को दोनों सदनों में बयान देने के हमारे अनुरोध को स्वीकार करने में आखिर क्या परेशानी है ?’’ लोकसभा में प्रश्नकाल शुरु होने के साथ ही कांग्रेस, द्रमुक, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, सपा तथा कुछ अन्य दलों के सदस्य अपने स्थान पर खड़े हो गए और इस मुद्दे को लेकर नारेबाजी करने लगे। उन्होंने ‘कश्मीर में विदेशी दखलअंदाजी नहीं चलेगी’ और ‘प्रधानमंत्री जवाब दो’ के नारे लगाए। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने दावा किया कि भारत सरकार ने ‘‘अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने सिर झुका दिया है ।’’ उन्होंने कहा कि हमारा देश बहुत ताकतवर है, वह किसी के सामने नहीं झुक सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में आएं और जवाब दें।

इस पर संसदीय कार्य मंत्री प्रसाद जोशी ने कहा कि विपक्ष की ओर से देश की छवि कमजोर करने की कोशिश हो रही है जो निंदनीय है। बाद में शून्यकाल के दौरान जब विदेश मंत्री जयशंकर इस मुद्दे पर बयान दे रहे थे तो कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से बयान देने की मांग करते हुए सदन के वाकआउट किया। राज्यसभा में यह मुद्दा सुबह शून्यकाल से ही उठने लगा। सदन में कांग्रेस के उप नेता आनंद शर्मा ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने जो कुछ कहा उसका टीवी पर प्रसारण हुआ। उन्होंने कहा था कि हाल ही में जापान के ओसाका में संपन्न जी20 बैठक में भारत के प्रधानमंत्री ने उनसे कश्मीर पर मध्यस्थता का अनुरोध किया था।

उन्होंने कहा ‘‘पाकिस्तान और पाक के कब्जे वाले कश्मीर पर भारत का रूख साफ और यथावत है कि यह एक द्विपक्षीय मुद्दा है और भारत तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करेगा।’’ शर्मा ने कहा कि संसद का सत्र चल रहा है और दुनिया के एक सर्वाधिक शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति ने एक अन्य देश के प्रधानमंत्री से जो कहा है उसमें हमारे प्रधानमंत्री का जिक्र आया है। शर्मा ने मांग की कि प्रधानमंत्री को सदन में आ कर इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।
भाकपा के डी राजा ने जानना चाहा कि क्या कश्मीर पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को लेकर भारत के रूख में कोई बदलाव आया है।

उच्च सदन में विदेश मंत्री के इस मुद्दे पर बयान के बाद कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, सपा, वाम सहित विपक्षी दलों के सदस्यों ने मांग की कि प्रधानमंत्री को सदन में आ कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। सभापति वेंकैया नायडू ने सदस्यों से कहा कि यह राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा है और इस पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए।नायडू ने सवाल किया ‘‘आपको अमेरिकी राष्ट्रपति पर अधिक विश्वास है या भारत के विदेश मंत्री पर ?’’ उन्होंने सदस्यों से शांत रहने और शून्यकाल चलने देने की अपील करते हुए कहा कि यह देश हित से जुड़ा हुआ मुद्दा है और सबको एक आवाज में बोलना चाहिए अन्यथा ‘‘गलत संकेत जाएगा ।’’ इस मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के कारण प्रश्न काल और शून्यकाल बाधित रहे और बैठक को एक बार के स्थगन के बाद दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

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