Modi Cabinet Expansion: केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार इस समय नीट पेपरलीक, सीबीएसी कॉपी पुनर्मूल्यांकन, श्री राम जन्मभूमि मन्दिर दान में गबन, सीएम मोहन यादव पर लगे आरोपों से घिरी हुई है। विपक्ष द्वारा शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को हटाने की माँग के बीच मीडिया में यह चर्चा गर्म हो चुकी है कि मोदी कैबिनेट में शीघ्र ही बड़ा फेरबदल होने वाला है।

दो केंद्रीय मंत्रियों (रवनीत सिंह बिट्टू और जार्ज कुरियन) को दुबारा राज्य सभा न भेजे जाने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में दो जगह खाली हुई हैं। पंकज चौधरी को यूपी बीजेपी का अध्यक्ष बनाए जाने उनकी भी कैबिनेट से विदाई तय है। साफ है कि मोदी कैबिनेट में वैकेंसी है। अब यह पीएम मोदी और भाजपा आलाकमान पर निर्भर है कि वह इन वैकेंसी को कब भरते हैं। कई राजनीतिक जानकार दावा कर रहे हैं कि मोदी कैबिनेट के कई मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है और कुछ का मंत्रालय बदल सकता है।

साल 2014 में नरेंद्र मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने। यह उनका तीसरा कार्यकाल है। अपने पहले दो कार्यकाल में पीएम मोदी ने कुल चार बार कैबिनेट में फेरबदल की थी। आइए एक नजर डालते हैं, मोदी कैबिनेट के पिछले परिवर्तन पर ताकि हम समझ सके कि पीएम मोदी अपनी कैबिनेट में किस तरह के बदलाव करते रहे हैं।

पहली बार नवंबर 2014 में हुआ था विस्तार

सबसे पहली बार 10 नवंबर 2014 को मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ था। पीएम मोदी ने 6 महीने पहले ही 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। तब पीएम मोदी ने 45 मंत्रियों के साथ शपथ ली थी और जब विभागों का बंटवारा हुआ तो कई मंत्रियों को एक से अधिक विभाग दिए गए थे। मंत्रियों पर काम का बोझ बढ़ता जा रहा था, ऐसे में 10 नवंबर 2014 को मोदी सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार हुआ। नवंबर 2014 में कुल 21 मंत्रियों को शामिल किया गया था। इसमें चार कैबिनेट, 14 राज्य मंत्री और तीन राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार शामिल थे।

सामने आई थी शिवसेना-बीजेपी के रिश्तों में खटास

पहले मंत्रिमंडल विस्तार में जेपी नड्डा को पहली बार सीधा कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। तो वहीं शिवसेना से आए सुरेश प्रभु को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया। सुरेश प्रभु को बाद में रेल मंत्रालय मिला था। इसी दौरान शिवसेना और बीजेपी के रिश्ते में पहली बार खटास सामने आई थी। शिवसेना के अनिल देसाई को शपथ नहीं दिलाई जा सकी क्योंकि वह वहां पर मौजूद नहीं थे।

राजीव प्रताप रूडी-बंडारू दत्तात्रेय को राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया था। साथ ही मुख्तार अब्बास नकवी के रूप में मुस्लिम चेहरे को भी जगह मिली थी। राज्यवर्धन राठौर और रामकृपाल यादव को भी मंत्रिमंडल में जगह मिली थी। बाबुल सुप्रियो को भी पहले मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान मोदी कैबिनेट में जगह मिली थी। उन्हें राज्य मंत्री बनाया गया था। बाबुल सुप्रियो बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट से जीते थे। तब वह बंगाल में बीजेपी का प्रमुख चेहरा थे।

5 जुलाई 2016 को हुआ दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार

मोदी सरकार का दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार 5 जुलाई 2016 को हुआ था। नोटबंदी से ठीक 3 महीने पहले दूसरे मंत्रिमंडल विस्तार में 19 राज्य मंत्रियों को सरकार में जगह मिली थी, जबकि पांच मंत्रियों को हटा दिया गया था। साथ ही प्रकाश जावड़ेकर को प्रमोशन मिला था।

पांच मंत्रियों की हुई थी छुट्टी

जिन पांच मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपा था, वे निहालचंद, राम शंकर कठेरिया, सांवर लाल जाट, मनुस्कभाई डी वासवा और एमके कुंदरिया थे।

19 नए चेहरों को मिली थी जगह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में नए चेहरे मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से शामिल हुए थे। यूपी में 6 महीने बाद ही चुनाव होने वाले थे। मोदी सरकार में एसएस अहलूवालिया, रमेश चंदप्पा जिगजिनागी, परषोत्तम रूपाला, एमजे अकबर, अर्जुन राम मेघवाल, अनिल माधव दवे, विजय गोयल, राजेन गोहेन, महेंद्र नाथ पांडे, सीआर चौधरी, पीपी चौधरी, रामदास अठावले, सुभाष रामराव भामरे, जसवंत सिंह भाभोर, मनसुख मंडाविया, फग्गन सिंह कुलस्ते, अजय टम्टा, अनुप्रिया सिंह पटेल और कृष्णा राज को शामिल किया गया था।

प्रकाश जावड़ेकर का हुआ था प्रमोशन

पर्यावरण राज्य मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को मंत्रिमंडल में प्रमोट किया गया था। उन्होंने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली थी। उत्तर प्रदेश से तीन नए चेहरों को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया था। माना गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने यूपी विधानसभा चुनावों से पहले जातिगत समीकरणों को संतुलित करने के लिए ऐसा किया।

सितंबर 2017 में हुआ तीसरा मंत्रिमंडल विस्तार

मोदी सरकार का तीसरा मंत्रिमंडल विस्तार सितंबर 2017 में हुआ था। इस विस्तार में 9 नए मंत्रियों को शामिल किया गया। चार मंत्रियों को प्रमोशन मिला जबकि 6 को मंत्री पद से हटाया गया था।

कैबिनेट रैंक पर प्रमोशन पाने वालों में मुख्तार अब्बास नकवी, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल और धर्मेंद्र प्रधान थे। इसके अलावा जिन 9 नेताओं को राज्य मंत्री के रूप में मंत्रिमंडल में शामिल किया गया उनमें अश्विनी कुमार चौबे, वीरेंद्र कुमार, गजेंद्र सिंह शेखावत, अनंत कुमार हेगडे, सत्यपाल सिंह, शिव प्रताप शुक्ला, अल्फोंस, राजकुमार सिंह और हरदीप सिंह पुरी शामिल थे।

चुनावी राज्यों का रखा गया ध्यान

इस मंत्रिमंडल विस्तार में चुनाव का भी ध्यान रखा गया था। कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश में चुनाव होने वाले थे। ऐसे में अनंत कुमार हेगड़े को कर्नाटक कोटे से, वीरेंद्र कुमार को मध्य प्रदेश और गजेंद्र सिंह शेखावत को राजस्थान कोटे से मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था।

6 की हुई मंत्रिमंडल से छुट्टी

जिन 6 नेताओं की मंत्रिमंडल से विदाई हुई, उनमें कलराज मिश्रा, बंडारू दत्तात्रेय, राजीव प्रताप रूडी, फग्गन सिंह कुलस्ते, संजीव बालियान और महेंद्र नाथ पांडे शामिल थे। कलराज मिश्रा की उम्र 76 साल हो गई थी। वहीं महेंद्र नाथ पांडे को यूपी बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया था, जिसकी वजह से उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा। वहीं बंडारू दत्तात्रेय, रोहित वेमुला मामले में आरोपों से घिरे हुए थे।

अल्फोंस सीपीआई (एम) के पूर्व सदस्य और केरल से विधायक थे, जो 2011 में भाजपा में शामिल हुए थे। मंत्रिमंडल में उनका शामिल होना दक्षिणी राज्य में भाजपा की पैठ मजबूत करने की योजनाओं के अनुरूप था। पूर्व आईएफएस अधिकारी हरदीप सिंह पुरी, सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में आए, वह 2014 के आम चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए थे।

मई 2019 में 57 मंत्रियों के साथ पीएम मोदी ने ली थी शपथ

इसके बाद 2019 का लोकसभा चुनाव हुआ और बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 मई 2019 को दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। पीएम मोदी के साथ 57 मंत्रियों ने शपथ ली थी।

मोदी सरकार का चौथा मंत्रिमंडल विस्तार

दुबारा पीएम बनने के दो साल बाद पीएम मोदी ने मंत्रिमंडल विस्तार किया। यह पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल का पहला जबकि मोदी सरकार का चौथा मंत्रिमंडल विस्तार था। यह पीएम मोदी के नेतृत्व में अब तक का सबसे बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार था। इसमें 36 नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिली थी। इसके अलावा 12 मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था।

इनकी हुई थी मंत्रिमंडल से छुट्टी

चौथे मंत्रिमंडल विस्तार में डॉक्टर हर्षवर्धन, रवि शंकर प्रसाद प्रकाश जावड़ेकर रमेश पोखरियाल निशंक, थावरचंद गहलोत, सदानंद गौड़ा, संतोष कुमार गंगवार, रतनलाल कटारिया, बाबुल सुप्रियो, प्रताप चंद्र सारंगी, संजय धोत्रे, सुश्री देवश्री चौधरी जैसे बड़े नेताओं को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया गया था।

नए चेहरों को मिली थी जगह

जिन नए चेहरों को कैबिनेट मंत्री के रूप में जगह मिली थी, उनमें नारायण राणे, ज्योतिराज सिंधिया, राम प्रसाद सिंह, अश्विनी वैष्णव, पशुपति कुमार पारस, राजकुमार सिंह, मनसुख मांडवीया, भूपेंद्र यादव, पुरुषोत्तम रुपाला, जी किशन रेड्डी और अनुराग सिंह ठाकुर शामिल थे। अजय भट्ट, शोभा कारंदलजे, सुनीता दुग्गल, मीनाक्षी लेखी, भारती पवार, शांतनु ठाकुर, अनुप्रिया पटेल को राज्य मंत्री के रूप में मंत्रिमंडल में जगह मिली थी।

उत्तर प्रदेश का रखा गया ध्यान

मंत्रिमंडल में उत्तर प्रदेश का ध्यान रखा गया, क्योंकि अगले साल यूपी में चुनाव होने वाले थे। मोदी सरकार के चौथे मंत्रिमंडल विस्तार के बाद उत्तर प्रदेश के सबसे ज्यादा मंत्री हो गए थे। उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 16 मंत्री, मोदी मंत्रिमंडल में जगह पा चुके थे। उसके बाद महाराष्ट्र से 9, बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात से 6, कर्नाटक – राजस्थान और झारखंड से 3 मंत्री, तेलंगाना, असम, हरियाणा, ओडिशा से 2-2 और गोवा, त्रिपुरा, मणिपुर, पंजाब, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, जम्मू कश्मीर और छत्तीसगढ़ से एक-एक मंत्री मोदी सरकार में थे।

पांचवें मंत्रिमंडल विस्तार में क्या हो सकता खास?

2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ 71 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली थी। यानी पीएम मोदी का अब तक का ये सबसे बड़ा मंत्रिमंडल है। सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल विस्तार में युवा चेहरों को जगह मिल सकती है, जबकि कई मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। माना जा रहा है कि कुछ वरिष्ठ मंत्रियों को संगठन के काम में लगाया जा सकता है। मोदी सरकार का फोकस मंत्रिमंडल की औसत उम्र कम करने पर हो सकता है।

यह भी पढ़ें- मानसून सत्र से पहले मोदी कैबिनेट में फेरबदल की चर्चा तेज, धर्मेंद्र प्रधान की होगी छुट्टी?

इस बात की प्रबल संभावना है कि कुछ केंद्रीय मंत्रियों को बीजेपी संगठन में भेजा जा सकता है और पार्टी के पदाधिकारियों को मोदी मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। NEET-UG के पेपर लीक और सीबीएसई के डिजिटल मार्किंग सिस्टम में गड़बड़ियों को लेकर हुए विवाद के कारण शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर अटकलें लग रही हैं। क्या प्रधान की मंत्रिमंडल से छुट्टी होगी या फिर उनका विभाग बदला जाएगा? पढ़ें पूरी खबर