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गरीबों को न्याय और समय के साथ बदलाव पर मोदी का जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि हर संस्था को समय के साथ बदलना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि हर संस्था को समय के साथ बदलना चाहिए। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि गरीबों को निशुल्क कानूनी सहायता देना न्यायाधीशों के चयन की एक कसौटी बन सकता है और न्याय सुनिश्चित करने में प्रशासन का समर्पण और प्रतिबद्धता नए रास्ते खोल सकती है। उनके इस बयान को सुप्रीम कोर्ट के कॉलिजियम प्रणाली को जारी रखने और न्यायिक नियुक्ति कानून को रद्द करने के परोक्ष संदर्भ में देखा जा रहा है।

मोदी ने कहा- कोई संस्था स्थिर नहीं रह सकती। समय के साथ बदलाव अपरिहार्य हैं। हमें अपने इस सोच को बदलने की जरूरत है कि पुरानी चीजें सबसे अच्छी हैं। मोदी ने सुप्रीम कोर्ट के एनजेएसी कानून को रद्द किए जाने का कोई उल्लेख नहीं किया। लेकिन एक न्यायिक मंच पर उनके बयानों को इसी विषय से जुड़ा माना जा रहा है।

उन्होंने कहा कि लोक अदालत की अवधारणा सफल रही है। लेकिन अगर हम कहते हैं कि पूर्णता आ गई है तो निष्क्रियता आ जाएगी। प्रधानमंत्री यहां राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के स्थापना दिवस समारोह में शीर्ष न्यायाधीशों, विधि अधिकारियों और कानून के जानकारों को संबोधित कर रहे थे। उनके साथ मंच पर न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर भी थे जो अगले प्रधान न्यायाधीश होंगे।

लाखों लोगों को निशुल्क विधिक सेवाएं देने के लिए प्राधिकरण की प्रशंसा करते हुए मोदी ने कहा कि प्रत्येक व्यवस्था में दायरा सतत रूप से बढ़ना चाहिए। इसकी विशेषताएं लगातार बदलती रहनी चाहिए और अधिकार बढ़ते रहने चाहिए। न्यायपालिका की ओर से स्थापित निशुल्क शिकायत निवारण प्रणाली की तारीफ करते हुए प्रधानमंत्री ने इसे बड़ी बात बताया जहां पिछले दो दशक में लोक अदालतों ने मुकदमों से पूर्व करीब साढ़े आठ करोड़ लंबित मामलों को सुलझाया। उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि एक दायरे से आगे जाकर सोचने से परिणाम कितने अच्छे हो सकते हैं।

गरीबों और वंचितों के लिए न्याय की जरूरत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा- यह बड़ी बात है। यह व्यवस्था की ताकत है। अगर सरकार भी न्याय के प्रति समर्पित है, इसके प्रति सतर्क है तो हमें रास्ता मिल सकता है। प्राधिकरण की नई पहलों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर प्रशासन न्याय सुनिश्चित करने के लिए समर्पित है, प्रतिबद्ध है तो कोई रास्ता निकल सकता है।

उन्होंने आगे कहा- मैं न्यायमूर्ति ठाकुर से थोड़ा संकोच के साथ कह रहा था कि जब न्यायाधीशों की नियुक्ति हो तो क्या हम उनसे पूछ सकते हैं कि उन्होंने गरीबों को कानूनी सहायता प्रदान करने में कितना समय दिया है। लोक अदालतों पर विधि विश्वविद्यालयों की ओर से अनुसंधान का आह्वान करते हुए मोदी ने कहा कि व्यवस्था और नियमों में थोड़े बदलावों से जनता को फायदा हो सकता है।

उन्होंने कहा- हम न्यायपालिका पर बोझ कम कर सकते हैं और न्याय की गुणवत्ता पर जोर दे सकते हैं। सामूहिक प्रयासों की जरूरत है। देश के संपूर्ण विकास के लिए गरीबों को न्याय दिलाने पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि सबका साथ, सबका विकास के उनके नारे में ‘सबका न्याय’ भी जुड़ना चाहिए।

 

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