प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस 2026 के मौके पर लाल किले की प्राचीर से ‘दिमागी नक्सल’ का जिक्र किया था। इसके बाद से हंगामा मचा हुआ है। कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने खुद को दिमागी नक्सल बताया। कई अन्य ओगों ने भी खुद को दिमागी नक्सल बताया। पीएम मोदी ने कहा था कि 2014 से सरकार की कार्रवाई से जंगल में होने वाली बगावत काफी हद तक खत्म हो गई है, जिसमें 3,500 से ज़्यादा सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। पीएम मोदी ने कहा कि माओवादी मानसिकता वाले ‘दिमागी नक्सल’ पहले सरकारी कमेटियों में पदों पर थे और पॉलिसी पर असर डालते थे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं को राष्ट्र-निर्माण से जोड़े रखने पर ध्यान देना है। उन्होंने चेतावनी दी कि हथियारों से लैस माओवादी हिंसा आखिरी सांस ले रही है इसके बावजूद संस्थानों में एक वैचारिक नक्सल मानसिकता अभी भी मौजूद है। इस मुद्दे पर चल रहे हंगामे के बीच बीजेपी ने अपना पुराना स्टैंड याद दिलाया है, जब केंद्र में यूपीए की सरकार थी और उसी दौरान 2010 में दंतेवाड़ा में हुए नक्सली हमले में 76 जवानों की मौत हुई थी।
बीजेपी ने किया था चिदंबरम का समर्थन
उस दौरान देश के गृह मंत्री पी चिदंबरम थे और उन्होंने इस्तीफे की पेशकश की थी। इसके बाद बीजेपी ने तत्कालीन गृह मंत्री पी. चिदंबरम का समर्थन करते हुए उनसे दंतेवाड़ा में माओवादियों द्वारा 76 जवानों की हत्या के बाद इस्तीफा न देने को कहा था। बीजेपी ने कहा था कि उन्हें ‘पीठ नहीं दिखानी चाहिए’ क्योंकि इसका मतलब नक्सलियों की जीत होगी।
चिदंबरम को पीठ नहीं दिखानी चाहिए- बीजेपी
बीजेपी प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने उस समय प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, “बीजेपी नहीं चाहती कि चिदंबरम इस समय इस्तीफा दें। इस समय उनका इस्तीफा नक्सलियों की जीत होगी। उन्हें पीठ नहीं दिखानी चाहिए क्योंकि देश के गृह मंत्री के तौर पर उन पर देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी है और वे एक घायल सैनिक की तरह पीछे हटकर नहीं रो सकते। बीजेपी माओवादियों की जीत को स्वीकार नहीं करेगी, जो सुरक्षाबलों पर अब तक का सबसे बुरा हमला करने में कामयाब रहे हैं।”
राजीव प्रताप रूडी ने कहा था, “हालांकि सरकार सभी फ्रंट पर फेल हो गई है, लेकिन यह किसी सेनापति (कमांडर) के पद छोड़ने का समय नहीं है। एंटी-नक्सल ऑपरेशन में शामिल सुरक्षाबलों को प्रेरणा की जरूरत है। उनका हौसला कम नहीं होना चाहिए। हमारी चिंता यह है कि सिक्योरिटी फोर्स इस स्टेज पर लड़ाई हारते हुए न दिखें।”
बीजेपी ने लगाया था आरोप
राजीव प्रताप रूडी ने कहा था कि बीजेपी उम्मीद करती है कि इस अहम मोड़ पर गृह मंत्री का स्टैंड, बयान और लीडरशिप कबूलनामे के बजाय उम्मीद जगाने वाला हो। रूडी ने कहा कि गृह मंत्री को यह भी साफ करना चाहिए कि क्या उन्होंने अपनी मर्ज़ी से इस्तीफ़ा देने की पेशकश की थी या इस खतरे से निपटने में पूरी छूट न मिलने के बाद उन पर दबाव था।
जब राजीव प्रताप रूडी से पूछा गया कि 26/11 के मुंबई आतंकी हमले के बाद जब बीजेपी ने उनका इस्तीफ़ा मांगा था, तो वह उनका समर्थन क्यों कर रही थी, तो रूडी ने कहा कि पार्टी पॉलिटिक्स से अलग सरकार के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि पार्टी पार्लियामेंट में नक्सलवाद और बढ़ती कीमतों समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों पर बहस करने के लिए पार्लियामेंट सही फोरम है।
चिदंबरम ने की थी इस्तीफे की पेशकश
बता दें कि सुरक्षाबलों पर सबसे बुरे नक्सली हमले की ज़िम्मेदारी लेते हुए गृह मंत्री चिदंबरम ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कैबिनेट से अपना इस्तीफ़ा देने की पेशकश की थी। हालांकि मनमोहन सिंह ने इस्तीफे लेने से मना कर दिया था।
कैसे हुआ था हमला?
6 अप्रैल 2010 को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में नक्सलियों ने घात लगाकर सीआरपीएफ जवान की टुकड़ियों पर हमला किया था। इस हमले में सीआरपीएफ के 75 जवान और छत्तीसगढ़ पुलिस का एक स्थानीय जवान शहीद हुआ था। यह हमला ताड़मेटला और चिंतलनार के जंगलों में किया गया था। देश के इतिहास में सुरक्षाबलों पर नक्सलियों द्वारा ये सबसे घातक हमला था।
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिमागी नक्सल वाली टिप्पणी पर पलटवार किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा कि मुझे दिमागी नक्सल होने पर गर्व है। पढ़ें पूरी खबर
