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बोलने के अंदाज पर पीएम मोदी ने किया मजाक, उपराष्‍ट्रपति नायडू ने अपने स्‍टाइल में दिया जवाब

रविवार को एम वेंकैया नायडू द्वारा लिखे गए पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नायडू के बोलने के अलग अंदाज पर कमेंट किया। नायडू ने भी इस मजाक का जवाब अपने अंदाज में दिया।

Author September 3, 2018 12:22 PM
पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू (Photo: PTI)

उपराष्ट्रपति व राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू द्वारा रविवार (2 सितंबर) को अपनी किताब ‘मूविंग ऑन मूविंग फॉरवर्ड : ए ईयर इन ऑफिस’ के विमोचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। 245 पन्नों की इस पुस्तक में उन्होंने चित्रों और शब्दों द्वारा अपने एक साल के कार्यकाल के अनुभवों का वर्णन किया है। कार्यक्रम के दौरान लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नायडू के बोलने के अलग अंदाज पर कमेंट किया। पीएम मोदी ने मजाक करते हुए कहा कि वे सुपरफास्ट ट्रेन की तरह बोलते हैं। नायडू ने भी इस मजाक का जवाब अपने अंदाज में दिया।

अपने भाषण के दौरान नायडू लिखे हुए स्क्रिप्ट से हटकर कुछ अलग शब्दों का उपयोग करते रहे, जैसे “सेन्सेशनलिजम इज सेन्स्लेस”, “रिफॉर्म परफाॅर्म ट्रांसफाॅर्म”, “एलपीजी: लिब्रलाइजेशन, प्राइवेटाइजेशन और ग्लोबलाइजेशन” और “इंफाॅर्मेशन विथ कंफर्मेशन की बेटर दैन एम्यूनिशन”। इन शब्दों का प्रयोग कर उन्होंने अपनी वाकपटुता का परिचय दिया। इस कार्यक्रम के आरंभ में भी तस्वीर प्रदर्शन  की शुरूआत “उषा पति से उप राष्ट्रपति” शब्द के साथ हुई थी।

इस मौके पर वेंकैया नायडू ने कहा कि किताब लिखने का विचार सरकार के कार्यो में पारदर्शिता दर्शाने का था। नायडू ने के विमोचन के मौके पर कहा, “इस किताब का विचार लोगों को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करना था क्योंकि मेरा मानना है कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता व जवाबदेही होनी चाहिए।” इस मौके पर पीएम मोदी ने विपक्ष पर अप्रत्यक्ष रूप से हमला किया। उन्होंने कहा एक व्यक्ति जो अनुशासन की बात कहता है उसे ‘तानाशाह’ के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। उन्होंने सदन में अनुशासन लाने के लिए राज्यसभा सभापति एम.वेंकैया नायडू की तारीफ की। मोदी ने यह भी कहा कि राज्यसभा में व्यवधान के कारण नायडू सभापति के रूप में प्रशासनिक कुशलता दिखाने में सक्षम हुए। मोदी ने कहा, “नायडू अनुशासन को बनाए रखने वाले व्यक्ति हैं, लेकिन देश में हालात ऐसे हैं कि अनुशासन को अलोकतांत्रिक कहना आसान हो गया है। अगर कोई अनुशासन में लाने की कोशिश करता है तो उसे इसके लिए सजा का सामना करना होता है। उसे तानाशाह कहा जाता है।” इस किताब का विमोचन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी देवेगौड़ा व मनमोहन सिंह व लोकसभा की अध्यक्ष सुमित्रा महाजन व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली व अन्य की मौजूदगी में किया। (एजेंसी इनपुट के साथ)

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