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नरेंद्र मोदी-शी जिनपिंग ने जिस भीमकाय ‘गेंद’ के आगे खिंचाया फोटो वह नहीं हिली 1200 साल से, जानिए इसकी कहानी

भीमकाय गेंद की तरह दिखने वाला यह पत्थर बहुत ही अजीबोगरीब तरीके से रखा हुआ है। इस पत्थर को देखकर ऐसा लगता है मानो ये जरा सी हलचल होने के बाद नीचे गिर जाएगा।

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अनऔपचारिक दौरे पर शुक्रवार को चेन्नई पहुंचे। इस दौरान उनका भव्य सवागत किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उन्होंने चेन्नई से करीब 50 किलोमीटर दूर पुरातनकालीन तटीय शहर मामल्लापुरम में एतिहासिक जगहों का दौरा किया। इस दौरान दोनों ने 1200 साल से ढलान पर टिके ‘माखन गेंद’ का दौरा किया। इस दौरान दोनों ने भीमकाय गेंद की तरह दिखने वाले पत्थर के आगे फोटो भी खिंचवाया।

यह पत्थर बहुत ही अजीबोगरीब तरीके से रखा हुआ है। पत्थर को देखकर ऐसा लगता है मानो ये जरा सी हलचल होने के बाद नीचे गिर जाएगा लेकिन ऐसा नहीं है और यह कई सालों से ज्यों का त्यों खड़ा है। इसे ‘कृष्ण की मक्खन गेंद’ भी कहते हैं। माना जाता है कि ये पत्थर मक्खन की गेंद है जिसे भगवान कृष्ण ने अपनी बाल्य अवस्था में नीचे गिरा दिया था। वहीं एक मान्यता ये भी है कि कृष्ण ने मक्खन खाते समय एक बूंद यहां गिरा दी थी। जिसके बाद उस बूंद ने विशालकाय पत्थर का रूप ले लिया।

यह रहस्यमयी पत्थर करीब 20 फीट ऊंचा और करीब 15 फीट चौड़ा है। यह न तो कभी हिलता है और ना ही कभी लुढ़कता है। 250 टन के इस पत्थर को हटाने की भी कोशिश हुई लेकिन यह असफल रही। कहा जाता है कि पत्थर को नीचे लाने के लिए सात हाथियों से इसे खिंचवाया गया था लेकिन पत्थर जस का तस अपनी जगह पर टिका रहा। हालांकि आज तक इस पत्थर के रहस्यों के बारे में कोई पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिल सका है जो यह बताए कि आखिर ये पत्थर यहां कैसे आया और इतनी वजनी होने के बाद भी यह ढलान पर क्यों टिका हुआ है।

बता दें कि शी और मोदी ‘पंच रथ’ से पल्लव वंश की सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक शोर मंदिर भी गए जिसकी रोशनी देखते ही बन रही थी। इसके बाद दोनों देशों ने शोर मंदिर की पृष्ठभूमि में एक सांस्कृतिक प्रस्तुति का आनंद लिया। दोनों नेता शनिवार सुबह आमने-सामने की बातचीत करेंगे, जिसके बाद प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता होगी। इसके बाद दोनों पक्ष शिखर वार्ता के परिणाम पर अलग-अलग बयान जारी करेंगे।

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