कृषि क़ानून वापस: त्वरित प्रतिक्रिया देने से बचे भाजपा नेता, नवाब मलिक बोले- सात साल में पहली बार मोदी को झुकाया

प्रधानमंत्री का देश के नाम संबोधन खत्म होने के तुरंत बाद कृषि क़ानून वापस लेने के उनके ऐलान पर टीवी चैनलों पर नेताओं की प्रतिक्रियाएं आने लगीं।

प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की (फोटो : पीटीआई)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 नवंबर को तीनों कृषि क़ानून वापस लेने की घोषणा की। इसके बाद बीजेपी के तमाम बड़े नेता टिप्पणी से बचते नज़र आए। कुछ नेताओं ने कैमरे पर बोला तो बड़ा संभल कर। विपक्षी नेताओं ने तुरंत जमकर रीऐक्शन देना शुरू किया।

प्रधानमंत्री का देश के नाम संबोधन खत्म होने के तुरंत बाद कृषि क़ानून वापस लेने के उनके ऐलान पर टीवी चैनलों पर नेताओं की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। बीजेपी का कोई बड़ा नेता सामने नहीं आया। विनय कटियार और अनिल विज जैसे कुछ नेता ही बोलते दिखे। कटियार ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कुछ सोच कर ही फैसला लिया होगा। विज बोले- अब किसानों को अपने घर जाकर नियमित काम में लगना चाहिए।

कृषि कानूनों के वापस लिए जाने पर विपक्षी दलों के नेताओं ने जमकर रिएक्शन दिया। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक ने ट्वीट करते हुए लिखा कि झुकती है दुनिया झुकाने वाला चाहिए। तीनों कृषि कायदे वापस लिए गए,  हमारे देश के किसानों को मेरा सलाम और शहीद किसानों को अभिवादन। वहीं यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष बी वी श्रीनिवास ने ट्वीट करते हुए लिखा कि किसानों की जीत, तानाशाह की हार।

आम आदमी पार्टी के नेता व दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के फैसले पर कहा कि किसानों व किसान आंदोलन को बधाई। निरंकुश सरकार को आपके एक साल लंबे अहिंसक आंदोलन ने झुकने को मजबूर कर दिया। केंद्र सरकार को सैकड़ों किसानों की शहादत के सामने आखिर झुकना पड़ा। सरकार उन किसानों के परिवारों से भी माफी मांगे जिनकी जान इन क़ानूनों के ख़िलाफ़ आंदोलन में गई है।  
वहीं आप सांसद संजय सिंह ने ट्वीट करते हुए लिखा कि ये मोदी के अन्याय पर किसान आंदोलन की जीत ढेरों बधाई। भारत के अन्नदाता किसानों  पर एक साल तक घोर अत्याचार हुआ। सैंकड़ों किसानों की शहादत हुई। अन्नदाताओं को आतंकवादी कह कर अपमानित किया। इस पर मौन क्यों रहे मोदी जी? देश समझ रहा है चुनाव में हार के डर से तीनों काला क़ानून वापस हुआ।

भले ही ही प्रधानमंत्री मोदी ने कृषि कानूनों को रद्द करने का ऐलान कर आंदोलनकारी किसानों से अपने अपने घर वापस जाने का आग्रह किया हो। लेकिन किसान नेता राकेश टिकैत ने साफ़ कर दिया है कि यह आंदोलन तत्काल ख़त्म नहीं होगा। किसान नेता राकेश टिकैत ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि आंदोलन तत्काल वापस नहीं होगा, हम उस दिन का इंतजार करेंगे जब कृषि कानूनों को संसद में रद्द किया जाएगा। सरकार MSP के साथ-साथ किसानों के दूसरे मुद्दों पर भी बातचीत करें।

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