नरेंद्र मोदी के “आंदोलनजीवी परजीवी जैसे हैं” और कृषि मंत्री के “भीड़ इकट्ठा होने से नहीं वापस होते कानून” वाले बयान शेयर कर रहे लोग, बोले- बस भूलिएगा मत…

किसान आंदोलन के बीच लगातार कृषि मंत्री और अन्य भाजपा नेता इन तीनों कृषि कानूनों की वकालत कर रहे थे और उन्हें किसानों के हित में बता रहे थे। इस दौरान मोदी सरकार के मंत्रियों ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए किसान आंदोलन को एक साजिश तक बताया था। आंदोलन के समय में ‘टूलकिट विवाद’ भी काफी चर्चा में रहा था।

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पंजाब के पटियाला में प्रदर्शनरत किसान। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः हरमीत सोढ़ी)

प्रकाश पर्व के पवित्र मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के किसानों के हक में एक बड़ा फैसला लेते हुए विवादास्पद तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि वे तमाम प्रयासों के बावजूद कुछ किसानों को नहीं समझा पाए। पीएम मोदी के इस ऐलान के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी कहा कि उनको दु:ख है कि वे किसानों को इसके फायदे बताने में सफल नहीं हो सके।

एक साल से अधिक समय से कई किसान संगठन इन कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे और सरकार से इन कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे थे। किसानों के लगातार विरोध के बीच, मोदी सरकार के मंत्रियों ने हमेशा तीनों कृषि कानूनों का बचाव किया था और किसान आंदोलन को साजिश तक बताया था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ये पुराने बयान यूजर्स द्वारा शेयर किए जा रहे हैं और सरकार को घेरा जा रहा है। 

रियाटर्ड आईएएस सूर्य प्रताप सिंह ने पीएम मोदी के तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के ऐलान के बाद ट्वीट कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा और मंत्रियों के बयानों का एक फोटो शेयर करते हुए कहा, ‘इन बयानों को भूलना मत, आज 9 बजे लोकतंत्र का नहीं चुनाव का डर बोला है।’

यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बी ने भी इसी फोटो को शेयर करते हुए लिखा, ‘बस भूलिएगा मत।’ पत्रकार रोहिणी सिंह ने एक यूजर द्वारा शेयर किए संसद सत्र के दौरान चर्चा का एक वीडियो रीट्वीट किया, जिसमें कांग्रेस सांसद दीपेंदर हुड्डा तीन कृषि कानूनों की कमियों को गिनाते दिखाई दे रहे हैं।

पीएम मोदी पर तंज कसते हुए वरिष्ठ पत्रकार दीपक शर्मा ने ट्वीट किया, ‘चुनाव के जमीनी सच ने फकीर को डरा दिया!’

इसी तरह अनेक यूजर्स ने मोदी सरकार के मंत्रियों के बयानों और पीएम मोदी के ‘आंदोलनजीवी’ वाले बयानों को शेयर किया है और भाजपा पर निशाना साधा है।

दरअसल, किसान आंदोलन के बीच लगातार कृषि मंत्री और अन्य भाजपा नेता इन तीनों कृषि कानूनों की वकालत कर रहे थे और उन्हें किसानों के हित में बता रहे थे। इस दौरान मोदी सरकार के मंत्रियों ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए किसान आंदोलन को एक साजिश तक बताया था। आंदोलन के समय में ‘टूलकिट विवाद’ भी काफी चर्चा में रहा था।

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