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PM CARES ‘डोमेन नेम’ है PMO का- RTI में खुलासा; एक्टिविस्ट ने दागा सवाल- कैसे?

आरटीआई में पूछा गया है कि पीएम केयर्स फंड एक चैरिटेबल ट्रस्ट के तौर पर रजिस्टर्ड है, तो ऐसे में नियमों के मुताबिक इसे सरकार द्वारा डोमेन नेम नहीं दिया जा सकता है।

PM cares fund pmo domain name rtiपीएम केयर्स फंड अपने गठन के बाद से ही विवादों में बना हुआ है। (फाइल फोटो)

PM CARES Fund अपनी शुरुआत के बाद से ही विवादों में घिरा हुआ है। अब एक आरटीआई के जवाब से इसे लेकर कई और गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल आरटीआई में खुलासा हुआ है कि pmcares.gov.in डोमेन पीएमओ ऑफिस के पास है। बता दें कि यह आरटीआई सामाजिक कार्यकर्ता और रिटायर्ड नौसेना अधिकारी लोकेश बत्रा ने दाखिल की थी।

आरटीआई में नेशनल इंफोरमेटिक्स सेंटर से पूछा गया था कि पीएम केयर्स फंड की आधिकारिक वेबसाइट को gov.in का डोमेन नेम दिया गया है? इसके जवाब में नेशनल इंफोर्मेशन सेंटर ने अपने जवाब में खुलासा किया है कि pmcares.gov.in डोमेन नेम मिनिस्टरी ऑफ इलेक्ट्रोनिक्स एंड इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी (MEITY) द्वारा प्राइम मिनिस्ट ऑफिस (पीएमओ) को दिया गया था।

नियमों के अनुसार, सरकार किसी विशेष सेंट्रल गवर्नमेंट संस्था को ही डोमेन नेम जारी कर सकती है। आरटीआई में पूछा गया है कि पीएम केयर्स फंड एक चैरिटेबल ट्रस्ट के तौर पर रजिस्टर्ड है, तो ऐसे में नियमों के मुताबिक इसे सरकार द्वारा डोमेन नेम नहीं दिया जा सकता है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, नियम है कि कुछ अपवाद हो सकते हैं लेकिन इसके लिए भी किसी सरकारी संगठन के सचिव द्वारा विनती किया जाना जरूरी है लेकिन सरकार का कहना है कि पीएम केयर्स फंड किसी सरकारी संगठन से प्रशासित नहीं है।

ऐसे में अब इस पर सवाल उठ रहे हैं कि किसी नियम के तहत यह डोमेन नेम बनाया गया और पीएमओ को इसके लिए क्या कारण बताए गए। आरटीआई दाखिल करने वाले लोकेश बत्रा का कहना है कि सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए।

बता दें कि सरकार का कहना है कि पीएम केयर्स फंड राहत कार्यों, चिकित्सकीय मदद या फिर कोरोना के इलाज की रिसर्च के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इस फंड में लोगों द्वारा कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा, सरकारी कंपनियों द्वारा दान दिया गया है और इसे विदेशी फंडिंग भी मिली है।

पीएम केयर्स फंड की वैधानिकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। चूंकि पीएम इसके अध्यक्ष हैं और कई मंत्री इसके ट्रस्टी हैं लेकिन इस फंड को लेकर पारदर्शिता की कमी है। सरकार ने कहा है कि आरटीआई के जरिए फंड को लेकर सवाल नहीं पूछे जा सकते और ना ही इसका ऑडिट कैग द्वारा किया जाएगा।

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