ताज़ा खबर
 

PM मोदी ने महिलाओं को जमकर किया प्रोत्साहित लेकिन महिला आरक्षण बिल पर साधी चुप्पी

महिला-नीत विकास के महत्व पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार कहा कि महिलाओं को प्रौद्योगिकी संपन्न और जनप्रतिनिधि के तौर पर और प्रभावी बनना चाहिए क्योंकि केवल व्यवस्था में बदलाव से काम नहीं चलेगा।

Author नई दिल्ली | March 7, 2016 4:03 AM
महिलाओं पर खुलकर बोले मोदी लेकिन महिला आरक्षण पर कुछ नहीं

महिला-नीत विकास के महत्व पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार कहा कि महिलाओं को प्रौद्योगिकी संपन्न और जनप्रतिनिधि के तौर पर और प्रभावी बनना चाहिए क्योंकि केवल व्यवस्था में बदलाव से काम नहीं चलेगा। प्रधानमंत्री हालांकि महिला आरक्षण विधेयक पर कुछ नहीं बोले, जिसकी शनिवार राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने पुरजोर वकालत की थी।

संसद के केंद्रीय कक्ष में महिला विधायकों के राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें महिला विकास से आगे बढ़कर सोचना चाहिए और महिला-नीत विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल व्यवस्था में बदलाव पर्याप्त नहीं होगा। ढांचे में कुछ बदलाव होते रहते हैं और महिला जन प्रतिनिधियों और नेताओं को प्रौद्योगिकी के स्तर पर संपन्न बनने और प्रभावी हस्तक्षेप करने की जरूरत है।

मोदी ने कहा,‘आपको स्वयं को प्रभावशाली बनाना होगा। आपको मुद्दों को तथ्यों और आंकड़ों के साथ पेश करना होगा। केवल व्यवस्था में बदलाव से काम नहीं चलेगा। ढांचे में कुछ बदलाव होते रहते हैं। नेतृत्व के तौर पर स्थापित करने के लिए आपको विषयों की जानकारी होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा,‘जन प्रतिनिधि के तौर पर स्वतंत्र छवि बनाने का प्रयास करें। आप अपने क्षेत्र में अपनी छवि बनाएं। एक बार आपकी छवि, आपके काम करने का तरीका स्थापित होगा तो यह लंबे समय तक बना रहेगा।’ मोदी ने कहा कि एक बार आपकी छवि बनने पर आप देखेंगी कि लोग आपके विचारों को स्वीकार करने लगे हैं।

प्रधानमंत्री ने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को इस सम्मेलन के आयोजन, उनके नेतृत्व एवं विजन के लिए बधाई दी। प्रधानमंत्री ने महिला विधायकों से प्रौद्योगिकी के उपयोग के द्वारा अपने विधानसभा क्षेत्रों से जुड़ने का आग्रह किया और इस बारे में अपने खुद के अनुभव साझा किए।
सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए राष्ट्रपति ने शनिवार संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक तिहाई प्रतिनिधित्व प्रदान करने वाले विधेयक को पारित कराने का आह्वान किया था। प्रणब मुखर्जी ने कहा था कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह विधयेक अब तक संसद में पारित नहीं हो सका है। इसे पारित कराना सभी राजनीतिक दलों का दायित्व है क्योंंकि इस विषय पर उनकी प्रतिबद्धता इसे अमलीजामा पहनाकर ही पूरी की जा सकती है। राष्ट्रपति ने कहा था कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दो तिहाई बहुमत से एक सदन में (लोकसभा) पारित होने के बाद भी महिलाओं को संसद और राज्य विधानसभाओं एवं परिषदों में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाला विधेयक दूसरे सदन (राज्यसभा) में पारित नहीं हो सका है।

संसद एवं विधानसभाओं में महिलाओं को एक तिहाई प्रतिनिधित्व प्रदान करने वाले विधेयक को पारित कराने पर जोर देते हुए शनिवार उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने राजनीतिक दलों से इस कानून के अमल में आने तक महिला उम्मीदवारों का नामांकन स्वेच्छा से बढ़ाने की वकालत की थी।

बहरहाल, प्रधानमंत्री ने विधेयक का कोई जिक्र नहीं किया लेकिन रवैये में बदलाव और महिलाओं की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने की जरूरत जैसे बड़े मुद्दों पर जोर दिया। अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने महिला नेताओं का आह्वान किया कि वे प्रतिस्पर्धा के कारण ईर्ष्या से ऊपर उठकर महिला नेतृत्व को जमीनी स्तर तक बढ़ावा दें।

प्रधानमंत्री ने कहा,‘राजनीति प्रतिस्पर्धा का खेल है, लेकिन जब प्रतिस्पर्धा में ईर्ष्या की भावना हावी हो जाती है तो आप आगे नहीं बढ़ सकते। यदि आप यह महसूस करने लगते हैं कि यदि आपके क्षेत्र में और ज्यादा प्रतिभाशाली महिलाएं आ गईं, तो आपका क्या होगा या यदि आपकी कोशिश यह है कि मैं वहां हूं तो और किसी को प्रगति नहीं करने दूंगी। बल्कि, यदि आप दूसरों को आने देंगे तो आप बहुत ऊंचाई को छुएंगे। तब एक पिरामिड जैसी संरचना सामने आती है।’

प्रधानमंत्री ने कहा कि सिर्फ बजट और आधारभूत संरचनाओं से देश मजबूत नहीं होता। उन्होंने कहा कि जैसे एक मां अपने बच्चे को मजबूती देती है, वैसे ही भारत का हर नागरिक देश को मजबूती देता है। मौका दिए जाने पर बहुत ऊंचाई तक पहुंचने की महिलाओं की काबिलियत की तारीफ करते हुए मोदी ने कहा,‘पहले इतने सालों में कई विदेश मंत्री हुए लेकिन हम उनके नाम तक नहीं जानते। लेकिन सुषमा स्वराज के शानदार काम के बारे में हर कोई जानता है।’

अफ्रीकी देश रवांडा को खड़ा करने में महिलाओं की भूमिका का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा,‘लोकसभा की सभी महिला अध्यक्षों ने अच्छा काम किया है। जब मौका दिया जाता है तो महिलाएं पुरुषों से ज्यादा सफल होती हैं।’ गौरतलब है कि रवांडा की संसद में 65 फीसदी महिलाएं हैं। मोदी ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ऐसी पहली सरकार है जिसमें इतनी महिला मंत्रियों को नियुक्त किया गया है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि क्या संसद के दोनों सदनों की महिला सदस्यों के वैचारिक आदान-प्रदान के लिए एक ई-प्लैटफॉर्म हो सकता है,‘एक मां अपने बच्चे को जितना सशक्त करती है, उतना कोई अपने देश को सशक्त नहीं कर सकता।’ प्रधानमंत्री ने अपने पति और बच्चों के लिए त्याग और धैर्य के गुणों के लिए महिलाओं की तारीफ की।

उन्होंने कहा कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में जल्दी नई प्रौद्योगिकियों से तालमेल बिठा सकती हैं। यहां तक कि निरक्षर महिलाएं भी नई प्रौद्योगिकियों के आ जाने से रसोई में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर रही हैं। महिला विधि-निर्माताआें से विधि निर्माण में एक प्रभावी भूमिका निभाने की अपील करते हुए मोदी ने कहा कि महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा काफी पहले चुनौतियों और समस्याओं का अंदाजा लगा लेती हैं, लिहाजा उन्हें विधि निर्माण के वक्त जरुरी बदलावों के बारे में सुझाव देना चाहिए।

देश को मजबूत करने में महिलाओं के ज्यादा योगदान की जरूरत पर जोर देते हुए मोदी ने कहा,‘महिला सशक्तिकरण के बारे में इस मानसिक अवस्था में बदलाव की जरूरत है। सशक्तिकरण उनके लिए किया जाता है जो सशक्त नहीं होते। जो पहले से ही सशक्त हैं, उनके सशक्तिकरण का क्या मतलब?’
प्रधानमंत्री ने कहा,‘महिलाओं को सशक्त करने वाले पुरुष कौन होते हैं? हम जब तक चुनौती का सामना नहीं करते, तब तक हम अपनी ताकत समझ नहीं पाते।’ मोदी ने महिला सांसदों से पूछा कि क्या उन्होंने अपनी अधीनस्थ महिला जनप्रतिनिधियों को सशक्त किया है। उन्होंने कहा,‘क्या आप अपनी संसदीय या विधानसभा सीट में ऐसी कोई कवायद कर सकते हैं जैसी स्पीकर ने यहां की है? इसमें कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। सभी पार्टियों की सदस्य यहां हैं। इस कार्यक्रम के लिए स्पीकर की ओर से गठित समिति में सभी पार्टियों की सदस्य हैं।’

भारत की पहली महिला राष्ट्रपति रहीं प्रतिभा पाटिल ने कहा कि महिला सांसदों और विधायकों को धनबल और बाहुबल से लड़ना चाहिए, क्योंकि इसने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की संसदीय प्रक्रिया में जगह बना ली है। पाटिल ने कहा,‘जब हम महिलाआें की भागीदारी की बात करते हैं तो मानसिकता में बदलाव की जरूरत पर भी बात करने की जरूरत है। लेकिन इसमें लंबा समय लगेगा। शुरुआत से ही हमारे बच्चों को पढ़ाया जाना चाहिए कि महिलाएं और पुरुष एकसमान हैं।’

उन्होंने ‘जेंडर बजटिंग’ की वकालत करते हुए कहा कि महिला जनप्रतिनिधियों को देखना चाहिए कि महिलाओं के कल्याण पर कितने पैसे खर्च किए जा रहे हैं। लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने खुशी जताई कि पुरुषों ने जहां महिला सशक्तिकरण की बातें की, वहीं महिला जनप्रतिनिधियों ने देश को सशक्त करने में अपनी भूमिका पर चर्चा की। इस सम्मेलन में बांग्लादेश संसद की स्पीकर शिरीन शर्मीन चौधरी ने भी शिरकत की सम्मेलन में एशिया स्तर पर ऐसा ही एक सम्मेलन आयोजित करने का भी सुझाव दिया गया।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App