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कोरोना से जंग: भारत को देसी वैक्सीन से उम्मीद, पीएम को सलाह देने वाली कमिटी के मुखिया ने कहा

विनोद पॉल ने न्यूज ब्रीफिंग में कहा कि एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का भारत में अंतिम चरण का ट्रायल चल रहा है और यह लगभग पूरा होने वाला है।

Serum Institute of India (SII), Indian Council of Medical Research (ICMR)Coronavirus Vaccine के लिए दुनिया भर के मुल्कों में रिसर्च और ट्रायल पर काम जोरों पर है। (फोटोः एजेंसी)

देश में कोरोना से जंग के बीच भारत को देसी कोरोना वैक्सीन से उम्मीद है। यह बात प्रधानमंत्री के सलाहकार समिति के प्रमुख विनोद पॉल ने कही। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी कंपनी फाइजर और मॉर्डना द्वारा विकसित कोरोना वैक्सीन बड़ी मात्रा में उपलब्ध नहीं हो सकती है।

रूस की स्पूतनिक V समेत 5 वैक्सीन कैंडिडेट्स फेज 2 से फेज 3 का ट्रायल अगले सप्ताह से शुरू हो रहा है। इसमें डॉ. रेड्डीज लैबोरट्रीज भी सहयोग कर रहा है। अन्य वैक्सीन जिनका जिनका परीक्षण होना है उनमें एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन शामिल है। इसका उत्पादन सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया कर रहा है। भारत बायोटेक और भारत सरकार मिलकर कोवैक्सीन विकसित करने में लगे हैं। जायडस कैडिला की जाइकोव-डी और बायोलॉजिकल ई. लिमिटेड भी कोरोना वैक्सीन बनाने में जुटा है।

पॉल ने न्यूज ब्रीफिंग में कहा कि एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का भारत में अंतिम चरण का ट्रायल चल रहा है और यह लगभग पूरा होने वाला है। मालूम हो कि भारत कोरोना वायरस के टीके के क्लीनिकल परीक्षण में प्रगति को लेकर अमेरिकी बायोटेक कंपनी मॉडर्ना के साथ संपर्क में है। कंपनी ने कहा है कि इस टीके ने 94.5 प्रतिशत प्रभाव दिखाया है।

यह जानकारी आधिकारिक सूत्रों ने दी। मॉडर्ना ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान द्वारा कोविड-19 के खिलाफ टीके- एम आरएनए-1273 के तीसरे चरण के अध्ययन के लिए नियुक्त स्वतंत्र डेटा सुरक्षा निगरानी बोर्ड (डीएसएमबी) ने टीके को 94.5 प्रतिशत प्रभावी पाया है। एक सूत्र ने कहा, ‘‘हम केवल मॉडर्ना से ही नहीं बल्कि फाइजर, सीरम इंस्टीट्यूट, भारत बायोटेक और जाइडस कैडिला के साथ भी प्रत्येक टीके के क्लीनिकल परीक्षणें की प्रगति को लेकर संपर्क में हैं।’

नये औषधि और कॉस्मेटिक नियम 2019 के अनुसार यदि किसी दवा या टीके का परीक्षण हो चुका है और उसे भारत के बाहर नियामक मंजूरी मिल गयी है, उसे सुरक्षित नियामक मंजूरी के लिए यहां दूसरे और तीसरे चरण के क्लीनिकल अध्ययन से गुजरना होगा।

कैंब्रिज, मेसाचुसेट्स स्थित मॉडर्ना की घोषणा से एक सप्ताह पहले ही फाइजर और बायोएनटेक ने कहा था कि उनके कोविड-19 के टीके प्रतिभागियों में कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम में 90 प्रतिशत से अधिक प्रभावी पाये गये हैं। मंगलवार के आंकड़ों के अनुसार देश में संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 88,74,290 हो गई है तथा 449 और लोगों की मौत हो जाने के बाद मृतक संख्या बढ़कर 1,30,519 हो गई।

सबसे पहले कोविड-19 टीका किसे लगाया जाएगा?: सबसे पहले कोविड-19 टीका किसे लगाया जाएगा? इस बारे में कोई निर्णय नहीं हुआ है, लेकिन अमेरिका और विश्व में अनेक विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि सबसे पहले टीका स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कर्मियों को लगाया जाना चाहिए। टीका विनियोजन पर काम कर रहे सर्गो फाउंडेशन से संबद्ध सेमा स्गेयर ने यह बात कही

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