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कोरोना टीकाः छुट्टी के दिन केंद्र का SC में हलफ़नामा- यकीन करें, आपको दखल की ज़रूरत न पड़ेगी

केंद्र ने वैक्सीन वितरण नीति पर उठाए थे सवाल। कहा था कि इस पर सरकार करे पुनर्विचार। जनता के स्वास्थ्य के अधिकार पर चोट पड़ती है इससे

वैक्सीन नीति ऐसे बनाई गई है कि वितरण न्यायसंगत हो। (express file)

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि उसकी बनाई वैक्सीन नीति बहुत बढ़िया है, अतएव आप उसमें दखल न दें। उल्लेखनीय है कि अदालत कोविड वैक्सीनों के मामले की सुओ मोटो सुनवाई कर रहा है। उसने पिछले दिनों केंद्र से कहा था कि वह अपनी वैक्सीन नीति पर एक बार फिर से विचार करे क्योंकि यह जिस ढंग से बनाई गई है उससे नागरिकों के स्वस्थ रहने के अधिकार पर चोट पड़ती है। यह अधिकार अनुच्छेद 21 का अविभाज्य हिस्सा है।

केंद्र सरकार ने जवाब में अपने हलफनामे में कहा है कि उसकी वैक्सीन नीति ऐसे बनाई गई है कि वितरण न्यायसंगत हो। इस नीति के बनाने में हमें देखना था कि वैक्सीनों की उपलब्धता सीमित है, वह वर्ग कौन है जो कोविड संक्रमण के ज्यादा खतरे में है। हमें यह सत्य भी देखना था कि महामारी में अचानक आए उफान के कारण पूरे देश में एकबारगी टीकाकरण नहीं कराया जा सकता। केंद्र ने कहा कि यह नीति “उचित, न्यायसंगत, अविभेदकारी है।” इसमें 45 साल से ऊपर और नीचे की उम्र वालों का बुद्धिमत्ता पूर्ण विभाजन किया गया है।

यह नीति विशेषज्ञों, राज्य सरकारों और वैक्सीन बनाने वालों के साथ कई बार की बातचीत के बाद बनाई गई है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के मुताबिक ही तैयार की गई है।

इन बातों को देखते हुए इतनी बड़ी महामारी के बीच केंद्र की नीति में कोर्ट के दखल की कोई जरूरत नहीं है। जनता के व्यापक हित में कार्यकारिणी को भी थोड़ी छूट तो चाहिए।

उल्लेखनीय है कि एक मई की वैक्सीनेशन रणनीति के मुताबिक वैक्सीन बनाने वाले अपने मासिक उत्पादन का पचास प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार को देंगे। बाकी का पचास प्रतिशत राज्य सरकारों, प्राइवेट अस्पतालों और औद्योगिक इकाइयों के अस्पतालों को दिया जाएगा।

इस रणनीति में 18 से 44 आयुवर्ग के लोगों को केंद्र सरकार के वैक्सीनेश से अलग रखा गया है। कोर्ट यह भी पूछता है कि केंद्र और राज्यों के लिए अलग अलग दाम क्यों हैं।

जवाब में केंद्र कहता है कि हालांकि राज्य वैक्सीन निर्माता से सीधे खरीद रहे हैं तो भी केंद्र ने मैन्यूफैक्चरर्स से अनौपचारिक बातचीत के जरिए यह सुनिश्चित किया है कि सभी राज्यों को एक ही दाम देने पड़ें।

रही बात केंद्र के लिए कम और राज्यों/अस्पतालों के लिए ज्यादा दामो की बात तो इसके पीछे खरीद की मात्रा का मामला है। केंद्र थोक में ज्यादा माल खरीदेगा। यह बात तो कीमतों के परिलक्षित तो होगी ही। लेकिन इस सबके बाद भी अलग दामों का लाभार्थी के लिए फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि सभी राज्यों ने अभी से कह दिया है कि वे अपने नागरिकों को कोविड टीका मुफ्त में लगाएंगी।

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