LAC पर बढ़ीं पीएलए की हरकतें, ईस्टर्न आर्मी कमांडर का दावा- सीमा पर रिजर्व फोर्स को तैनात कर रहा चीन

जून 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़पों के तुरंत बाद, जिसमें 20 भारतीय और कम से कम चार चीनी सैनिक मारे गए थे, भारत ने सैनिकों को खुली छूट दी थी। जो कि 1993 में दोनों देशों के बीच हुए पांच समझौतों और प्रोटोकॉल में एक बड़ा बदलाव था।

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जून 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़पों के तुरंत बाद, जिसमें 20 भारतीय और कम से कम चार चीनी सैनिक मारे गए थे, भारत ने सैनिकों को खुली छूट दी थी। (File Photo)

पूर्वी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे ने मंगलवार को कहा कि भारत वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सैनिकों के प्रबंधन के संबंध में चीन के साथ प्रोटोकॉल और समझौतों पर परस्पर सहमत है, लेकिन भविष्य में रणनीतिक स्तर पर इसकी समीक्षा की जा सकती है।

उन्होंने कहा, “दूसरी तरफ से क्या हो रहा है, इसको सोचे बगैर, एलएसी पर स्थिति से निपटने के संदर्भ में रणनीतिक मार्गदर्शन पारस्परिक रूप से सहमत प्रोटोकॉल और समझौतों का सम्मान करना है, और यह हमारा प्रयास रहा है। लेकिन हमें लगता है कि भविष्य में हमें इस पर फिर से सोचना पड़ेगा।” उच्च स्तर पर हमारी क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए, इस पर विचार किया जा रहा है।

जून 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़पों के तुरंत बाद, जिसमें 20 भारतीय और कम से कम चार चीनी सैनिक मारे गए थे, भारत ने सैनिकों को खुली छूट दी थी। जो कि 1993 में दोनों देशों के बीच हुए पांच समझौतों और प्रोटोकॉल में एक बड़ा बदलाव था। अगस्त और सितंबर 2020 में, पैंगोंग त्सो के उत्तर और दक्षिण तट पर संघर्ष के दौरान, दोनों पक्षों द्वारा चेतावनी के लिए फायरिंग की गई थी, जिसमें बड़ी तोपें भी शामिल थीं। ऐसा दशकों में पहली बार हुआ था।

पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सीमा के पश्चिमी क्षेत्र में स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है, क्योंकि चीन ने 10 अक्टूबर को पिछले कोर कमांडर-स्तरीय बैठक के दौरान हॉट स्प्रिंग्स में पेट्रोलिंग प्वाइंट (पीपी) 15 से पीछे हटने के लिए एक समझौते को मानने से इनकार कर दिया था। चीन ने देपसांग मैदानों, जहां उसके सैनिक भारत को अपनी गश्त सीमा तक पहुंचने से रोक रहे हैं, और डेमचोक, जहां कुछ तथाकथित नागरिकों ने एलएसी के भारतीय पक्ष में तंबू लगाए हैं, के मुद्दों पर चर्चा करने से भी इनकार कर दिया था।

हालांकि, पांडे ने कहा कि पूर्वी क्षेत्र की स्थिति बहुत कम असर हुआ है। पूर्वी सेना कमांडर के रूप में, पांडे चीन के साथ सिक्किम से अरुणाचल प्रदेश तक 1346 किलोमीटर एलएसी के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि जब पूरे पूर्वी कमान को देखा जाए तो पिछले डेढ़ साल में कुछ क्षेत्रों में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) द्वारा गश्त में मामूली वृद्धि हुई है। इसके अलावा मई 2020 में 17 महीने के लंबे गतिरोध के बाद से स्थिति में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों में पीएलए द्वारा गश्त में “मामूली वृद्धि” हुई है। “हमने एलएसी के करीब चीनी पक्ष में कुछ बुनियादी ढांचे को खड़ा होते हुए देखा है, इसकी वजह से वहां चीनी सैनिकों की संख्या भी बढ़ी है संख्या में सैनिक हैं जो अब वहां स्थित हैं या वहां रखे गए हैं। ”

बताया, “दोनों पक्ष एलएसी के करीब बुनियादी ढांचे विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे कुछ विवाद होता है। चूंकि यह बुनियादी ढांचा एलएसी के करीब है, इसलिए चीन की ओर से सीमा रक्षा सैनिकों की संख्या में मामूली वृद्धि हुई है।”

हालांकि उन्होंने अगस्त के अंत में तवांग में यांग्त्से के पास एलएसी के पार लगभग 200 पीएलए सैनिकों के मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन उन्होंने उल्लेख किया कि “दूसरी ओर से एलएसी के करीब आने वाले गश्ती दल की संख्या में पिछले कुछ वर्षों की तुलना में मामूली वृद्धि हुई है।”

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