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पूर्व प्रधानमंत्रियों के साथ फोटो खिंचवाएं, चहलकदमी करें

‘प्रधानमंत्री संग्रहालय’ में सभी प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल के दौरान लिए गए महत्त्वपूर्ण निर्णयों के बारे में तो बताया ही गया है साथ ही प्रधानमंत्रियों द्वारा उपयोग में लाई गर्इं चीजें और उन्हें उपहार मिली वस्तुएं भी यहां प्रदर्शित की गई हैं।

आधुनिक तकनीक पर आधारित बने ‘प्रधानमंत्री संग्रहालय’ में आप चीजों को देखने और सुनने के साथ महसूस भी कर पाएंगे। आजादी के 75 साल के ‘अमृत महोत्सव’ के दौरान शुरू हो रहे इस संग्रहालय में आप पूर्व प्रधानमंत्रियों और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ न सिर्फ तस्वीर खिंचवा सकते हैं बल्कि उनके साथ संसद परिसर में चहलकदमी भी कर सकते हैं। इतना ही नहीं तकनीक के सहारे किसी भी प्रधानमंत्री के हस्ताक्षर भी आप ले सकते हैं। यह संग्रहालय 21 अप्रैल से आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा।

इस संग्रहालय की रूपरेखा तैयार करने वाले नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि देश में पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का आवास तीन मूर्ति ही रहा था और बाद में इसे नेहरू संग्रहालय में बदल दिया गया। इस कड़ी को जारी रखते हुए इसी परिसर में ‘प्रधानमंत्री संग्रहालय’ बनाया गया है ताकि निरंतरता बनी रहे। 10,491 वर्ग मीटर क्षेत्र में बने इस संग्रहालय को बनाने में 306 करोड़ रुपए की लागत आई। मिश्रा ने बताया कि इस संग्रहालय को इस तरह से डिजाइन किया है कि अधिक से अधिक ऊर्जा की बचत की जा सके। उन्होंने बताया कि ‘प्रधानमंत्री संग्रहालय’ को बनाए जाते समय एक भी पेड़ को न तो काटा गया और न ही हस्तांतरित किया गया हैं।

‘प्रधानमंत्री संग्रहालय’ में सभी प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल के दौरान लिए गए महत्त्वपूर्ण निर्णयों के बारे में तो बताया ही गया है साथ ही प्रधानमंत्रियों द्वारा उपयोग में लाई गर्इं चीजें और उन्हें उपहार मिली वस्तुएं भी यहां प्रदर्शित की गई हैं। इस संग्रहालय में कुल 43 गैलेरियां हैं। यहां प्रधानमंत्रियों के लाल किले से दिए गए प्रमुख भाषणों को भी सुना जा सकता है। नृपेंद्र मिश्रा ने बताया संग्रहालय का आकार और निशान (लोगो) का विशेष अर्थ है। यह ‘लोगो’ दर्शाता है जैसे भारत के लोगों ने अपने हाथों में धर्म चक्र को थाम रखा है जो देश और लोकतंत्र का प्रतीक है। प्रकाश और ध्वनि कार्यक्रम ‘प्रधानमंत्री संग्रहालय’ में हर रात ‘प्रकाश और ध्वनि’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की कहानी के साथ 75 सालों में देश की उपलब्धियों को दर्शाया जाएगा।

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